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Dr. Katariya Nutankumar Parshotambhai
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Dr. Katariya Nutankumar Parshotambhai

Dr. Katariya Nutankumar Parshotambhai
सूरत
डॉक्टर की जानकारी
अनुभव:
2 years
शिक्षा:
GAU का मतलब है "ग्लासगो कोमा स्केल"। यह एक स्केल है जिसका इस्तेमाल डॉक्टर और नर्सेज मरीज की होश की स्थिति को समझने के लिए करते हैं। जब किसी को सिर में चोट लगती है या कोई बेहोश हो जाता है, तो GAU स्केल से पता चलता है कि मरीज कितना होश में है। इसमें तीन चीजें देखी जाती हैं: आँखें खोलना, बोलने की क्षमता और शरीर की हरकतें। हर चीज़ के लिए अंक दिए जाते हैं और कुल अंक से मरीज की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जाता है।
शैक्षणिक डिग्री:
Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery
विशेषज्ञता का क्षेत्र:
मैं आयुर्वेदिक पंचकर्म और स्त्रीरोग विशेषज्ञ हूं, और मेरा ज्यादातर ध्यान इन्हीं पर रहता है। मेरा काम पंचकर्म थैरेपी और आयुर्वेदिक स्त्री रोग चिकित्सा से जुड़ा है, खासकर महिलाओं की सेहत के मुद्दे जिन्हें पारंपरिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों से संभाला जाता है। मैं मासिक धर्म की समस्याओं, प्रजनन स्वास्थ्य संतुलन और दीर्घकालिक स्त्री रोग देखभाल से निपटता हूं, हालांकि हर शरीर की प्रतिक्रिया थोड़ी अलग होती है। मैं पंचकर्म को एक तय प्रक्रिया सूची के रूप में नहीं देखता, बल्कि इसे एक प्रक्रिया मानता हूं जिसमें समय, तैयारी और फॉलो अप की जरूरत होती है, जो कभी-कभी छूट जाती है। स्त्रीरोग प्रैक्टिस में, मैं पाचन, हार्मोनल लय और दैनिक आदतों पर खास ध्यान देता हूं, भले ही प्रगति धीमी या असमान लगे। मेरे मरीजों की देखभाल का तरीका सरल और व्यावहारिक रहता है। मैं जो कर रहा हूं और क्यों कर रहा हूं, उसे समझाता हूं, भले ही मुझे खुद को दोहराना पड़े जब स्पष्टता की कमी महसूस होती है। आयुर्वेदिक इलाज में दोनों पक्षों से धैर्य की जरूरत होती है, और मैं सीमाओं के बारे में ईमानदार रहने की कोशिश करता हूं, परिणाम हमेशा जल्दी नहीं आते!! फिर भी, मैं अपने तरीकों को असली मरीजों की प्रतिक्रिया के आधार पर सुधारता रहता हूं, केवल अनुमान या सिद्धांत पर नहीं।
उपलब्धियों:
आयुर्वेदिक बांझपन प्रबंधन में मेरे योगदान के लिए मुझे सम्मानित किया गया है, और यह पहचान मुझे इस क्षेत्र में वर्षों की मेहनत और समर्पित क्लिनिकल काम के बाद मिली है। मेरा काम कभी भी पुरस्कारों के लिए नहीं था, बल्कि जटिल बांझपन के मामलों को आयुर्वेदिक सिद्धांतों के साथ सुलझाने पर केंद्रित था। इस प्रयास के लिए सराहना मिलना बहुत अच्छा लगा, लेकिन इसने मुझे यह भी याद दिलाया कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती और परिणाम हमेशा आसानी से नहीं मिलते!!

मैं आयुर्वेदिक देखभाल में पुरुष और महिला बांझपन पर ध्यान केंद्रित करता हूँ, और समय के साथ मेरा ज्यादातर क्लिनिकल काम इसी क्षेत्र के इर्द-गिर्द विकसित हुआ है। मैं उन जोड़ों और व्यक्तियों के साथ करीबी से काम करता हूँ जो प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं, और इसके लिए मैं पारंपरिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों के साथ-साथ व्यावहारिक, रोजमर्रा के इलाज की योजना बनाता हूँ। बांझपन प्रबंधन में मेरा अनुभव व्यापक है, लेकिन हर केस थोड़ा अलग लगता है, और जब जरूरत होती है, तो मैं रुककर फिर से सोचता हूँ। मैं पुरुष और महिला बांझपन को पूरे शरीर की स्थिति के रूप में देखता हूँ, न कि अलग-अलग समस्याओं के रूप में। आयुर्वेद में पाचन, हार्मोन, तनाव के पैटर्न और दैनिक दिनचर्या सभी महत्वपूर्ण होते हैं, और मैं इन सभी को एक साथ संबोधित करने की कोशिश करता हूँ, बजाय इसके कि सिर्फ एक लक्षण का पीछा करूँ। इलाज की योजनाएँ व्यक्तिगत होती हैं, कभी-कभी धीरे-धीरे समायोजित की जाती हैं, कभी-कभी उम्मीद से तेज़, यह इस पर निर्भर करता है कि शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है, जो कभी-कभी अप्रत्याशित हो सकता है। मेरे लिए मरीज की देखभाल का मतलब पहले सुनना है, फिर स्पष्ट रूप से समझाना, भले ही इसमें ज्यादा समय लगे। मुझे लगता है कि आयुर्वेदिक बांझपन का इलाज धैर्य की मांग करता है, मरीज से भी और मुझसे भी, और मैं देखभाल के हर चरण में शामिल रहता हूँ। परिणाम एक निश्चित समयरेखा का पालन नहीं करते, और मैं इसके बारे में ईमानदार हूँ, भले ही यह असहज लगे। मैं प्रजनन स्वास्थ्य की पारंपरिक आयुर्वेदिक समझ पर भरोसा करता रहता हूँ, जबकि अपने क्लिनिकल निर्णयों को वास्तविक मरीज की प्रतिक्रिया पर आधारित रखता हूँ, केवल सिद्धांत पर नहीं! यह संतुलन मेरे लिए महत्वपूर्ण है, भले ही मैं अपनी ही पद्धति पर सवाल उठाऊं और इसे फिर से सुधारूं।