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कान में लगातार आवाज की समस्या
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Ear, Nose, and Throat Disorders
प्रश्न #41245
95 दिनों पहले
548

कान में लगातार आवाज की समस्या - #41245

Client_aaf88a

मेरे एक कान में लगभग 30 वर्षों से सुं - सुं की आवाज आती hai फिर दूसरे कान में भी 5 - 6 वर्ष से यह समस्या होने लगी है! Dr. ने बताया कि इसका कोई इलाज नहीं है इसलिए चुप हो गया था! अभी मेरी उम्र 67 साल की है, कृपया कोई उपचार बताएं!

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कान में सुं- सुं की आवाज की समस्या, जिसे टिन्निटस के नाम से भी जाना जाता है, अक्सर लंबे समय तक बनी रहती है और इसके लिए सीधे कोई विशेष एलोपैथी उपचार नहीं है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, यह वात दोष के असंतुलन के कारण हो सकता है। उम्र के साथ वात का बढ़ना सामान्य है और यह कान की ध्वनि से संबंधित विकार को जन्म दे सकता है।

इस समस्या के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपाय हैं जो आपको राहत दे सकते हैं:

1. तिल का तेल या नारियल तेल: कान में 1-2 बूंद तिल का गर्म तेल या नारियल तेल डालें। यह वात को संतुलित करता है और कान के अंदर ध्वनि के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। इसे सुबह-शाम प्रयोग कर सकते हैं।

2. अश्वगंधा और ब्राह्मी: ये जड़ी-बूटियाँ मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को शांत करने में सहायक होती हैं। अश्वगंधा और ब्राह्मी पाउडर को आधा चम्मच पानी या दूध के साथ रात को सोते समय लें।

3. हरिद्रा (हल्दी) का सेवन: हल्दी में सूजनरोधी गुण होते हैं। इसे गर्म दूध में मिलाकर पीने से लाभ हो सकता है। रात को हल्दी दूध के साथ पीना फायदेमंद हो सकता है।

4. ध्यान और योग: नियमित ध्यान और प्राणायाम करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और तंत्रिका तंत्र को मजबूती मिलती है। भ्रामरी प्राणायाम विशेष रूप से मददगार होता है।

5. आहार में बदलाव: अपने खाने में वात को बढ़ाने वाले तत्वों जैसे कि अधिक मसालेदार, तली-भुनी चीजों को सीमित करें। गर्म, ताज़ा और हल्के भोजन का सेवन करें।

6. धारोषधि का प्रयोग: यदि संभव हो, किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करके अपने लिए उचित धारोषधि का चयन करवाएं, जो वात संतुलन में सहायक हो।

इन उपचारों के साथ, नियमित रूप से आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करते रहें ताकि आपकी स्थिति का उचित मूल्यांकन किया जा सके और उसका उचित उपचार लागू किया जा सके।

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कान में सुं- सुं की आवाज जिसे टिनिटस (Tinnitus) के रूप में जाना जाता है, यह वात दोष के असंतुलन का संकेत हो सकता है। आयुर्वेद में वात दोष का निदान और संतुलन प्रमुख होता है। पहले आपके खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देना आवश्यक है। वात को संतुलित करने के लिए हल्का और गर्म भोजन करें जैसे सूप, खिचड़ी, और दलिया।

तिल के तेल से नियमित कान की मालिश और सिर की मालिश करें, विशेषकर सोने से पहले। यह वात संतुलन करने में मदद करेगा। ब्राह्मी और अश्वगंधा जैसी हर्ब्स का सेवन भी लाभकारी हो सकता है। ब्राह्मी की चूर्ण को दूध के साथ लेना आपके मानसिक शांति और सुन्न ध्वनि को कम करने में सहायक हो सकता है।

आयुर्वेद में नस्य करना भी एक सिद्ध उपाय है, जिसमें आप प्रतिदिन सुबह तिल के तेल की 2-3 बूँदें नाक में डाल सकते हैं। यह सिर के वात को नियंत्रित करने में सहायक होता है।

ध्यान रहे कि यह उपचार लम्बे समय तक किया जाना चाहिए और एक बार में ज्यादा सुधार की उम्मीद न करें। अगर कोई विशेष चक्कर, सुनने में कमी, या अन्य समस्या हो, तो तुरंत चिकित्सा परामर्श अवश्य लें।

आहार में त्रिफला का रात में सेवन भी किया जा सकता है, ये वात और पित्त दोनों को संतुलित करता है। ध्यान और योग का नियमित रूप से अभ्यास करना भी तनाव को कम करेगा जो कि टिनिटस को प्रबल कर सकता है।

मध्यम हेड मसाज और योग के साथ-साथ ध्यान, मन को शांत करके इन ध्वनियों के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकता है। इन सलाह के दौरान ध्यान रखें की कोई भी लक्षण बिगड़ता है अथवा शब्द अधिक ध्यान देने योग्य होते हैं तो सही चिकित्सा सलाह प्राप्त करें।

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Grace
13 घंटे पहले
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Mateo
15 घंटे पहले
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Elizabeth
15 घंटे पहले
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Jackson
15 घंटे पहले
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