नमस्ते शिल्पा जी, स्टेज-3 ब्रेस्ट कैंसर में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन पूर्ण होने के बाद आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य शरीर की शक्ति (बल), रोग प्रतिरोधक क्षमता (ओज), पाचन शक्ति और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना होता है। आयुर्वेद सहायक (supportive) भूमिका निभा सकता है, लेकिन इसे अपने ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह के साथ ही लेना चाहिए। आपको दर्द, गैस/ब्लोटिंग और कमजोरी की समस्या है, इसलिए चिकित्सकीय परामर्श से निम्न आयुर्वेदिक औषधियाँ लाभकारी हो सकती हैं: • अश्वगंधा चूर्ण 3–5 ग्राम, सुबह-शाम दूध या गुनगुने पानी के साथ। • गुडूची (गिलोय) सत्व 500 mg, दिन में 2 बार। • शतावरी चूर्ण 3 ग्राम, दिन में 2 बार। • गैस और पाचन के लिए अविपत्तिकर चूर्ण 3 ग्राम भोजन के बाद। साथ में: हल्का, सुपाच्य एवं पौष्टिक भोजन लें। ताजे फल, सब्जियाँ, मूंग दाल, घी की उचित मात्रा का सेवन करें। पर्याप्त नींद लें और प्रतिदिन 20–30 मिनट हल्की सैर करें। तनाव कम करने के लिए प्राणायाम एवं ध्यान करें। यदि आप वर्तमान में कोई हार्मोन थेरेपी (जैसे टैमोक्सीफेन आदि) ले रही हैं, तो कृपया उसकी जानकारी दें, क्योंकि उसके अनुसार आयुर्वेदिक दवाओं का चयन करना अधिक सुरक्षित और उचित रहेगा।
••नमस्ते। सबसे पहले आपकी हिम्मत और हौसले को सलाम। आपने कैंसर जैसी बड़ी बीमारी के खिलाफ सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन जैसी कड़े पड़ावों को पार किया है, जो कि अपने आप में एक बहुत बड़ी जंग जीतने जैसा है। 1. रोग प्रतिरोधक क्षमता और ताकत बढ़ाने वाली मुख्य जड़ी-बूटियाँ ये जड़ी-बूटियाँ आमतौर पर कैंसर के बाद रिकवरी के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती हैं: ••गिलोय (Giloy / Guduchi): यह शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करती है और खून को साफ करने में मदद करती है। ••अश्वगंधा (Ashwagandha): कीमोथेरेपी के बाद होने वाली अत्यधिक कमजोरी, थकान और तनाव को दूर करने में यह बहुत मददगार है। ••आंवला (Amla): यह विटामिन-C से भरपूर है, जो शरीर के सेल्स (Cells) को दोबारा ठीक करने और एंटीऑक्सीडेंट लेवल बढ़ाने में मदद करता है। ••हल्दी या कूर्क्यूमिन (Curcumin): हल्दी में कैंसर-रोधी गुण होते हैं। आजकल आयुर्वेदिक डॉक्टर शुद्ध कूर्क्यूमिन कैप्सूल की सलाह देते हैं, जो शरीर में सूजन (Inflammation) को कम करता है। ••शतावरी (Shatavari): यह महिलाओं के शरीर में हार्मोनल संतुलन और ताकत बनाए रखने के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है। ••एलोपैथी दवाएं बंद न करें: यदि आपके ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर डॉक्टर) ने अभी कोई दवा (जैसे Tamoxifen या Letrozole) दी है, तो उसे आयुर्वेदिक दवा शुरू करने के चक्कर में बिल्कुल बंद न करें। आयुर्वेद को सपोर्टिव थेरेपी की तरह चलाएं। खान-पान और जीवनशैली के नियम दवाओं के साथ-साथ शरीर को अंदर से मजबूत बनाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें: ताजा और सुपाच्य भोजन: घर का बना, कम तेल-मसाले का और आसानी से पचने वाला खाना खाएं। खिचड़ी, हरी सब्जियां, और सूप का सेवन करें। केमिकल और चीनी से दूरी: रिफाइंड चीनी (White Sugar) और डिब्बाबंद खाने (Processed Food) से पूरी तरह परहेज करें। हल्का प्राणायाम: अगर शरीर गवाही दे, तो सुबह-शाम 10-15 मिनट ‘अनुलोम-विलोम’ और ‘भ्रामरी’ प्राणायाम करें। इससे मानसिक तनाव कम होगा और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ेगा।