••सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम (Immediate Emergency Advice) जब नस दबने के कारण हाथ-पैर काम करना बंद कर दें और व्यक्ति खड़ा न हो पाए, तो इसे चिकित्सा की भाषा में Neurological Deficit (तंत्रिका तंत्र की अक्षमता) कहते हैं। तत्काल MRI कराएं: बिना समय गंवाए मरीज के Cervical (गर्दन) और Lumbar (कमर) Spine का MRI करवाएं ताकि यह पता चल सके कि नस किस स्तर पर और कितनी गंभीर रूप से दबी हुई है। ••न्यूरोसर्जन / ऑर्थोपेडिक सर्जन को दिखाएं: यदि नस पर दबाव (Compression) बहुत ज्यादा है और रीढ़ की हड्डी के अंदर का सिग्नल ब्लॉक हो रहा है, तो कई बार तुरंत सर्जिकल डीकंप्रेशन की जरूरत होती है ताकि मरीज हमेशा के लिए पैरालिसिस (अपंगता) का शिकार न हो। 🌿 तीव्र वात-शमन और नस की ताकत के लिए आयुर्वेदिक औषधियां (Ayurvedic Treatment) यदि डॉक्टर ने तुरंत सर्जरी की आवश्यकता नहीं बताई है और रूढ़िवादी (Conservative) इलाज की सलाह दी है, या आधुनिक इलाज के साथ-साथ आप आयुर्वेद अपनाना चाहते हैं, तो एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में निम्नलिखित औषधियों का उपयोग किया जाता है: 1. रस औषधियां (नस और तंत्रिका तंत्र को तुरंत ताकत देने के लिए) ••एकांगवीर रस (Ekangveer Ras): 1-1 गोली सुबह-शाम। (यह नसों की कमजोरी और लकवे जैसी स्थिति में सर्वोत्तम है)। ••बृहत् वात चिंतामणि रस (Brihat Vata Chintamani Ras): 1 गोली (स्वर्ण युक्त) सुबह और 1 गोली शाम को। ••नोट: यह दवा थोड़ी महंगी होती है लेकिन नस दबने, पैरालिसिस और नसों की अत्यधिक कमजोरी में यह ‘अमृत’ के समान काम करती है। महावातविध्वंसन रस (Mahavat Vidhwansan Ras): 1-1 गोली दिन में दो बार। 2. गुग्गुलु कल्प (सूजन और दर्द कम करने के लिए) ••त्रयोदशांग गुग्गुलु (Trayodashang Guggulu) या महायोगराज गुग्गुलु (Mahayogaraj Guggulu): 2-2 गोली सुबह-शाम हल्के गुनगुने पानी या रास्नादि क्वाथ के साथ। यह रीढ़ की हड्डी और नसों की सूजन को कम करता है। 3. कमजोरी दूर करने और मज्जा पोषण के लिए (For Weakness & Rejuvenation) ••अश्वगंधा चूर्ण / कैप्सूल (Ashwagandha): 1 कैप्सूल या 3 ग्राम चूर्ण दूध के साथ। यह मांसपेशियों और नसों को ताकत देता है। ••महारास्नादि काढ़ा (Maharasnadi Kwath): 20 ml काढ़ा बराबर मात्रा में गुनगुने पानी के साथ भोजन के बाद लें। 💆♂️ पंचकर्म चिकित्सा (सबसे प्रभावी इलाज) इस स्थिति में केवल मुंह से खाई जाने वाली दवाएं काफी नहीं होंगी। मरीज को पंचकर्म (Panchakarma) केंद्र में ले जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित थेरेपी रीढ़ की हड्डी के गैप को ठीक करने और नस को खोलने में मदद करती हैं: ••ग्रीवा बस्ती और कटि बस्ती (Greeva & Kati Basti): गर्दन और कमर पर उड़द के आटे का घेरा बनाकर उसमें औषधीय तेल (जैसे महानारायण तेल या सहचरादि तेल) भरा जाता है। ••शालिषष्टिक पिंड स्वेद (Shali Shashtika Pinda Sweda): विशेष प्रकार के औषधीय चावल और दूध के पोटली से सिकाई की जाती है, जो मांसपेशियों और नसों की कमजोरी (Muscle Wasting) को दूर करती है। मात्रा वस्ती (Anuvasana Basti): गुदा मार्ग से तेल की वस्ती (Enema) दी जाती है, जो शरीर के बढ़े हुए वात दोष को जड़ से खत्म करती है। 🛑 क्या न करें (Strict Warnings): ••मालिश न करें: घर पर मरीज की रीढ़ की हड्डी पर जोर से मालिश (Massage) या दबाव बिल्कुल न डालें। इससे नस और ज्यादा दब सकती है और स्थिति बदतर हो सकती है। मरीज को झटका न लगने दें: बैठते, उठते या लेटाते समय रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखें और किसी भी तरह के झटके से बचाएं।
Hello, Please ask the person to take MRI and then meet an ayurveda doctor in and around the area, who has panchakarma treatment set up. A course of panchakarma treatments along with internal medications(which is for long time) along with physical therapy is must. Take care, Kind regards.