Gashara churna 1/2-0-1/2 tsp after food with warm water Chitrakadi vati 1-1-1 to be chewed Haritaki churna 1 tsp at bedtime with warm water Drink plenty of fluids butter milk Do regular walking
1.अविपत्तिकर चूर्ण – 1 चम्मच गुनगुने पानी से - सुबह खाली पेट 2.हिंगवटी – 2 गोली - दिन में 2 बार भोजन के बाद गुनगुने पानी या छाछ के साथ 3.त्रिफला चूर्ण– रात को सोते समय 1 चम्मच गुनगुने पानी से घरेलू उपाय: - हरड़ (हरितकी) – कब्ज़ और गैस दोनों में लाभकारी। - अजवाइन + काला नमक – भोजन के बाद ½ चम्मच लेने से गैस कम होती है। - गुनगुना दूध + घी – रात को सोने से पहले 1 गिलास दूध में 1 चम्मच घी डालकर पीने से मल नरम होता है। योग और दिनचर्या - पवनमुक्तासन – गैस और कब्ज़ में बहुत लाभकारी। - वज्रासन – भोजन के बाद 5–10 मिनट बैठें। - रोज़ाना हल्की सैर/वॉक करें। 4. आयुर्वेदिक औषधियाँ (वैद्य की देखरेख में) - अविपत्तिकर चूर्ण – गैस और कब्ज़ दोनों में। - हिंगवटी – गैस और डकार में। - चूर्ण: त्रिफला + इसबगोल – मल को नियमित और नरम करने के लिए। आहार सुधार - सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना। - भोजन में फाइबर युक्त चीजें – दलिया, मूंग दाल, हरी सब्ज़ियाँ, सलाद। - तैलीय, मसालेदार, फास्ट फूड कम करें। - रात को हल्का भोजन करें, दही या भारी चीज़ें रात में न लें।
(Provisional Diagnosis): 👉 अजीर्णजन्य उदरवात सह मलावरोध 👉 अपानवायु दुष्टि, मन्दाग्नि 💊 औषधि विवरण (Rx) 1. Avipattikar Churna मात्रा: 3 ग्राम सेवन विधि: सुबह खाली पेट अनुपान: गुनगुना जल अवधि: 15 दिन 2. Hingvashtak Churna मात्रा: 2 ग्राम सेवन विधि: भोजन पश्चात, दिन में 2 बार अनुपान: गुनगुना जल अवधि: 15 दिन 3. Triphala Churna मात्रा: 5 ग्राम सेवन विधि: रात्रि को शयन से पूर्व अनुपान: गुनगुना जल अवधि: 15 दिन 4. Isabgol Husk (आवश्यकतानुसार) मात्रा: 5–10 ग्राम सेवन विधि: रात्रि को अनुपान: गुनगुना दूध/जल अवधि: आवश्यकता अनुसार 🥗 पथ्य–अपथ्य निर्देश पथ्य: गुनगुना जल सुपाच्य, हल्का भोजन छाछ (दोपहर में) समय पर भोजन व शौच अपथ्य: गुरु, अभिष्यंदी आहार तैल, विदाही, अत्यधिक मसालेदार भोजन बासी, फास्ट फूड रात्रि जागरण - सलाह - नियमित दिनचर्या अपनाएँ शौच के समय अत्यधिक जोर न लगाएँ भोजन के तुरंत बाद न लेटें - Follow-up: 15 दिन बाद
तला हुआ, डब्बाबंद खाना न खाएं। रात को देरी से खाना न खाएं। नियमित व्यायाम करें। हरी सागसब्जी एवं ताज़ा फल खाए। Sy Gason 15ml twice Tab Erandbhrushta haritaki 0-0-1 With lukewarm water at bedtime. Follow up after 1week
Hi You can take Tab gasex -2-BD Syp udarbhaskar -10 ml BD Ajmodadi churna+ hinghvastak churna -1 tsp BD All with warm water
नमस्ते मैं आपकी परेशानी समझती हूँ। गैस, लगातार डकार आना, कभी-कभी नॉर्मल पेट साफ होना और फिर 1-2 दिन तक सख्त मल आना, और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में 2-3 बार मल त्याग करने में ज़ोर लगाना – यह एक बहुत आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। चिंता न करें, आयुर्वेद में इसका अच्छा इलाज है 😊 आयुर्वेदिक समझ यह समस्या मुख्य रूप से कमजोर पाचन अग्नि (अग्नि) और बढ़े हुए वात दोष के कारण होती है। गैस, डकार → वात + खराब पाचन सख्त मल, ज़ोर लगाना → अपान वात से जुड़ी समस्याएँ कभी ठीक, कभी नहीं → अनियमित दिनचर्या/खाना आयुर्वेदिक इलाज की योजना अंदरूनी दवाएँ 1. त्रिफला चूर्ण ½ चम्मच रात को सोने से पहले गर्म पानी के साथ (मल को नरम करता है, रोज़ाना पेट साफ करने में मदद करता है) 2. हिंग्वाष्टक चूर्ण ¼ चम्मच खाने के बाद गर्म पानी के साथ (गैस, डकार, पेट फूलना कम करता है) 3. अजवाइन + सोंठ (सूखी अदरक) ½ चम्मच अजवाइन + एक चुटकी सोंठ खाने के बाद गर्म पानी के साथ गैस के लिए बहुत अच्छा है डाइट प्लान ✔ सुबह खाली पेट गर्म पानी पिएँ ✔ समय पर खाएँ और हल्का खाना खाएँ ✔ खिचड़ी, दलिया, सब्जियाँ, छाछ ✔ छाछ में भुना जीरा + हींग डालें ❌ इन चीज़ों से बचें: ज़्यादा चाय, कॉफ़ी मैदा, बिस्कुट, बेकरी आइटम ज़्यादा तला हुआ खाना देर रात खाना लाइफ़स्टाइल टिप्स खाने के बाद 10-15 मिनट वज्रासन में बैठें सुबह हल्की सैर करें हर दिन एक ही समय पर पेट साफ करने की कोशिश करें बिल्कुल भी ज़ोर न लगाएँ ज़रूरी टेस्ट Hb (हीमोग्लोबिन) थायरॉइड पेट का अल्ट्रासाउंड (अगर कब्ज़ लंबे समय से है) यह समस्या पूरी तरह से ठीक हो सकती है; आपको बस इलाज नियमित रूप से करना होगा। आपको 2-3 हफ़्तों में गैस और पेट की अकड़न से काफी राहत मिलेगी। शुभकामनाएँ डॉ. स्नेहल विधाते
HELLO, Your problem is not just gas. It is digestive imbalance where food is not digested properly, leading to gas formation, bloating, discomfort and irregular motions In Ayurveda, this condition is mainly due to weak digestion and disturbed Vata Dosha -Your digestive fire has become weak -food stays in the stomach and intestines for longer time -this partially digested food turns into Ama (toxic, sticky waste) -Ama produces gas, heaviness, bloating, pain, frequent urges -Vata Dosha which controls movement and gas, becomes disturbed THIS CAUSES -excess gas -bloating -gurling sounds -irregular stool (sometimes loose,sometimes hard) -relief after passing gas or stool This condition is completely manageable and reversible if treated properly
TREATMENT GOALS -strengthen digestion -remove toxic undigested matter -normalize vata movement -reduce gas and bloating -regularize bowel movements -prevent recurrence INTERNAL MEDICATIONS 1) HIGWASTAKA CHURNA= 1/2 tsp with warm water before meals for 6 weeks = best medicines for gas and bloating, improves digestion, removes trapped gas, corrects vata imbalance 2) AJAMODADI CHURNA= 1/2 tsp with warm water after meals twice daily for 4 weeks =reduces abdominal pain and cramps, helps digestion of heavy food, prevents gas formation 3) AVIPATTIKAR CHURNA = 1 tsp with warm water at bedtime for 4 weeks =regulates bowel movements, clears ama, reduces acidity and heaviness, prevent morning discomfort 4) TRIPHALA CHURNA (if constipation)= 1/2-1 tsp at night =gentle bowel regulator improvs gut health, prevents dependency EXTERNAL THERAPY 1) ABDOMINAL OIL MASSAGE = hing oil or sesame oil METHOD -gentle clockwise massage around navel -10 min daily -best done at night = pacifies vata, relieves bloaitng, improves bowel movement DIET -warm,freshly cooked meals -rice, wheat roti -moong dal -khichdi -boiled vegetables lauki,tori, pumpkin -buttermilk with roasted jeera -ginger tea AVOID -cold drinks, fridge water -bakrey items -deep fried food -curd especially at night -raw salads -cabbage , cauliflower -excess tea/coffee Eat less but properly digested food LIFESTYLE CHANGES -eat only when hungry -fixed meal timings -do not lie down immediately after meals -walk 10-15 min after meals -avoid day sleep -avoid stress while eating -do not suppress gas or stool urge YOGA ASANAS -pawanmuktasana -malsana -vajrasana after meals -apanasana PRANAYAM -Anulom vilom= daily -Mild kapalbhati empty stomach =improves gut movement and digestion naturally HOME REMEDIES -Jeera water= sip warm -hing + jeera= pinch of hing + roasted jeera powder- with warm water -Ginger + lemon before meals for digestion DURATION OF TREATMENT -Initial improvement= 7-10 days -Significant relief= 3-4 weeks -Complete correction= 6-8 weeks Consistency is the key This condition is functional not dangerous It occurs due to digestive weakness and lifestyle errors, not due to serious disease With -proper mediicnes -corect diet -simple lifestyle changes You can achieve complete and long term relief DO FOLLOW HOPE THIS MIGHT BE HELPFUL THANK YOU DR. MAITRI ACHARYA
नमस्ते, आपकी समस्या सिर्फ गैस नहीं है। यह पाचन तंत्र का असंतुलन है जहाँ खाना ठीक से नहीं पचता, जिससे गैस बनना, पेट फूलना, बेचैनी और अनियमित मल त्याग होता है। आयुर्वेद में, यह स्थिति मुख्य रूप से कमजोर पाचन और वात दोष में गड़बड़ी के कारण होती है। -आपकी पाचन अग्नि कमजोर हो गई है -खाना पेट और आंतों में ज़्यादा देर तक रहता है -यह आधा पचा हुआ खाना अमा (विषाक्त, चिपचिपा कचरा) में बदल जाता है -अमा गैस, भारीपन, पेट फूलना, दर्द, बार-बार शौच की इच्छा पैदा करता है -वात दोष जो गति और गैस को नियंत्रित करता है, वह गड़बड़ा जाता है इससे होता है -ज़्यादा गैस -पेट फूलना -पेट से गुड़गुड़ की आवाज़ें -अनियमित मल त्याग (कभी ढीला, कभी सख्त) -गैस या मल त्याग के बाद आराम अगर ठीक से इलाज किया जाए तो यह स्थिति पूरी तरह से ठीक हो सकती है और ठीक हो जाती है। इलाज के लक्ष्य -पाचन को मजबूत करना -विषाक्त बिना पचा हुआ पदार्थ निकालना -वात की गति को सामान्य करना -गैस और पेट फूलना कम करना -मल त्याग को नियमित करना -दोबारा होने से रोकना आंतरिक दवाएं 1) हिंग्वाष्टक चूर्ण = 1/2 चम्मच गर्म पानी के साथ खाना खाने से पहले 6 हफ़्ते तक = गैस और पेट फूलने के लिए सबसे अच्छी दवा, पाचन में सुधार करती है, फंसी हुई गैस निकालती है, वात असंतुलन को ठीक करती है 2) अजमोदादि चूर्ण = 1/2 चम्मच गर्म पानी के साथ खाना खाने के बाद दिन में दो बार 4 हफ़्ते तक =पेट दर्द और ऐंठन कम करता है, भारी खाने को पचाने में मदद करता है, गैस बनने से रोकता है 3) अविपत्तिकर चूर्ण = 1 चम्मच गर्म पानी के साथ रात को सोते समय 4 हफ़्ते तक =मल त्याग को नियंत्रित करता है, अमा को साफ करता है, एसिडिटी और भारीपन कम करता है, सुबह की बेचैनी को रोकता है 4) त्रिफला चूर्ण (अगर कब्ज है) = 1/2-1 चम्मच रात में =हल्का मल नियामक आंतों के स्वास्थ्य में सुधार करता है, निर्भरता को रोकता है बाहरी उपचार 1) पेट की तेल मालिश = हींग का तेल या तिल का तेल तरीका -नाभि के चारों ओर धीरे-धीरे घड़ी की दिशा में मालिश करें -रोज़ 10 मिनट -रात में करना सबसे अच्छा है = वात को शांत करता है, पेट फूलने से राहत देता है, मल त्याग में सुधार करता है आहार -गर्म, ताज़ा पका हुआ खाना -चावल, गेहूं की रोटी -मूंग दाल -खिचड़ी -उबली हुई सब्जियां लौकी, तोरी, कद्दू -भुने हुए जीरे के साथ छाछ -अदरक की चाय परहेज करें -ठंडे पेय, फ्रिज का पानी -बेकरी चीज़ें -तली हुई चीज़ें -दही, खासकर रात में -कच्चे सलाद -पत्ता गोभी, फूल गोभी -ज़्यादा चाय/कॉफी कम खाएं लेकिन आसानी से पचने वाला खाना खाएं जीवनशैली में बदलाव -तभी खाएं जब भूख लगे -खाने का समय तय करें -खाना खाने के तुरंत बाद लेटे नहीं -खाना खाने के बाद 10-15 मिनट टहलें -दिन में सोने से बचें -खाना खाते समय तनाव से बचें -गैस या शौच को रोके नहीं योगासन -पवनमुक्तासन -मलासन -खाना खाने के बाद वज्रासन -अपानसन प्राणायाम -अनुलोम विलोम = रोज़ाना -हल्का कपालभाति खाली पेट =आंतों की गति और पाचन को स्वाभाविक रूप से बेहतर बनाता है घरेलू उपाय -जीरा पानी = गर्म करके पिएं -हींग + जीरा = चुटकी भर हींग + भुना हुआ जीरा पाउडर - गर्म पानी के साथ -पाचन के लिए खाना खाने से पहले अदरक + नींबू इलाज की अवधि -शुरुआती सुधार = 7-10 दिन -काफी राहत = 3-4 हफ़्ते -पूरी तरह ठीक = 6-8 हफ़्ते लगातार करना ज़रूरी है यह स्थिति फंक्शनल है, खतरनाक नहीं यह पाचन की कमज़ोरी और जीवनशैली की गलतियों के कारण होता है, किसी गंभीर बीमारी के कारण नहीं इसके साथ -सही दवाएं -सही डाइट -जीवनशैली में आसान बदलाव आप पूरी और लंबे समय तक राहत पा सकते हैं ज़रूर पालन करें उम्मीद है यह मददगार होगा धन्यवाद डॉ. मैत्री आचार्य
पेट में गैस डकार और लैटरिंग की समस्या आमतौर पर पाचन दोष और वात दोष की वजह से होती है भोजन में भारी तैलीय ठंडा या बासी चीजें कम करें चाय कॉफी और गैस वाले पदार्थों से दूरी बनाएं दिन में गुनगुना पानी धीरे-धीरे पिएं भोजन के बाद हल्की सैर करें पेट पर जोर या दबाव न डालें आयुर्वेदिक उपाय के रूप में आप त्रिफला चूर्ण तीन ग्राम रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ लें भोजन के बाद अजवाइन एक चुटकी और हींग मिलाकर खा सकते हैं या सौंफ पाउडर एक ग्राम पानी या चाय में मिलाकर लें अश्वगंधा एक ग्राम सुबह शाम दूध या गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट की सूजन और गैस कम होती है हल्की खिचड़ी और उबली सब्जियां खाएं अगर गैस लगातार बढ़े दर्द सूजन या वजन घटने लगे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें



