••आयुर्वेद के दृष्टिकोण से, इस स्थिति को ‘पक्षघात’ (Pakshaghata) कहा जाता है। यह मुख्य रूप से शरीर में ‘वात दोष’ के अत्यधिक कुपित (असंतुलित) होने और मस्तिष्क की नसों में रक्त का प्रवाह रुकने के कारण होता है। •चूंकि अभी 5 महीने हुए हैं, यह समय रिकवरी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस अवस्था में आयुर्वेद और मॉडर्न थेरेपी का सही मेल आपके पिताजी को दोबारा पैरों पर खड़ा करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। एक आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में, मैं आपको निम्नलिखित महत्वपूर्ण उपचार और सलाह दे रहा हूँ: 1. पंचकर्म चिकित्सा (Panchakarma) – सबसे प्रभावी उपाय इस स्थिति में केवल दवाइयां खाने से ज्यादा जरूरी है पंचकर्म थेरेपी, जो नसों को दोबारा सक्रिय (Reactivate) करती है। इसके लिए आपको किसी अच्छे आयुर्वेदिक अस्पताल में जाना चाहिए: ••बाह्य अभ्यंग (Massage): प्रभावित हिस्से (दाहिने हाथ और पैर) पर महामाश तेल (Mahamash Taila), क्षीरबला तेल (Ksheerabala Taila) या धनवंतरी तेल से हल्के हाथों से नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें। यह नसों में खून का दौरा बढ़ाता है। ••स्वेदन (Fomentation): मालिश के बाद औषधीय काढ़े की भाप (Steam) दी जाती है, जिससे मांसपेशियों की जकड़न (Stiffness) कम होती है। ••नस्य (Nasya): नाक में अणु तेल (Anu Taila) या क्षीरबला तेल की 2-2 बूंदें डालना। आयुर्वेद के अनुसार “नासा हि शिरसो द्वारं” अर्थात नाक मस्तिष्क का द्वार है, यह थेरेपी दिमाग की नसों को ताकत देती है।. •प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियां (Herbs) ये दवाएं नसों की कमजोरी दूर करती हैं और दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाती हैं। (कृपया इन्हें शुरू करने से पहले स्थानीय डॉक्टर से खुराक तय करवाएं): ••अश्वगंधा और ब्राह्मी चूर्ण: आधा-आधा चम्मच सुबह-शाम गुनगुने दूध या पानी के साथ। यह नर्वस सिस्टम को रीजेनरेट करने में मदद करते हैं। ••एकांगवीर रस (Ekangveer Ras) या महावातविध्वंसन रस: यह विशेष रूप से पैरालिसिस के मरीजों को नसों की ताकत के लिए दिया जाता है। रसराज रस या वसंत कुसुमाकर रस: गंभीर मामलों में नसों को तुरंत ताकत देने के लिए इनका उपयोग किया जाता है। 3. आहार और जीवनशैली (Diet & Lifestyle) वात नाशक भोजन: उन्हें हमेशा ताजा, गर्म और आसानी से पचने वाला भोजन दें। खाने में घी और तिल के तेल का संतुलित उपयोग करें। ••क्या न दें: ठंडा पानी, बासी भोजन, उड़द की दाल, चावल, दही और ठंडी तासीर वाली चीजों से परहेज करें, क्योंकि ये वात बढ़ाते हैं और जकड़न पैदा करते हैं।
How to treat paralysis in my father after a brain stroke for 5 months? - #56223
Mere papa ji ko brain stroke hua tha jiski wajah se 5 month se mere papa ji paralysis ke patient ban gaye unka right side hand aur leg kaam nahi kr rahe hai wo chal phir nahi sakte hai
How has your father's overall health been since the stroke?:
- Improving graduallyHas he experienced any other symptoms apart from paralysis?:
- Speech difficultiesWhat kind of rehabilitation or therapy has he received so far?:
- Physical therapyHow would you describe his mood and mental state?:
- Frustrated or depressedIs he taking any medications for his condition?:
- Yes, prescribed medicationsHow is his appetite and digestion?:
- Poor appetiteHow often does he experience any pain or discomfort?:
- RarelyDoctors' responses
5 महीने पुराने स्ट्रोक के बाद होने वाला पैरालिसिस (Ayurveda में Pakshaghata) लंबे समय तक नियमित उपचार और फिजियोथेरेपी मांगता है। स्ट्रोक की आधुनिक दवाएँ बिना डॉक्टर की सलाह के बंद न करें। संक्षिप्त आयुर्वेदिक उपचार Mahayograj Guggulu 2 टैबलेट दिन में 2 बार भोजन के बाद। Ashwagandha Churna 3–5 ग्राम गुनगुने दूध के साथ रात में। Ekangveer Ras 1 टैबलेट दिन में 2 बार, चिकित्सकीय देखरेख में। बाह्य उपचार Mahanarayana Taila या Ksheerabala Taila से प्रभावित अंगों पर 15–20 मिनट मालिश। यदि संभव हो तो पंचकर्म विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यंग, स्वेदन और बस्ती चिकित्सा।
ब्रेन स्ट्रोक के बाद 5 महीने से हुई पैरालिसिस में आयुर्वेद सहायक भूमिका निभा सकता है, विशेषकर जब रोगी में धीरे-धीरे सुधार हो रहा हो। इस अवस्था को आयुर्वेद में पक्षाघात (Pakshaghata) माना जाता है, जो मुख्यतः वात दोष की वृद्धि से संबंधित है। आयुर्वेदिक प्रबंधन नियमित फिजियोथेरेपी जारी रखें, क्योंकि यह रिकवरी का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। आयुर्वेदिक उपचारों में अभ्यंग (औषधीय तेल से मालिश), स्वेदन (स्टीम), बस्ती कर्म तथा नस्य विशेषज्ञ चिकित्सक की देखरेख में लाभकारी हो सकते हैं। अश्वगंधा, बला, कपिकच्छु, एकांगवीर रस, बृहद वातचिंतामणि रस जैसी औषधियों का उपयोग किया जा सकता है। वाणी (Speech) में कठिनाई होने पर नियमित स्पीच थेरेपी भी जारी रखें। आहार एवं दिनचर्या सुपाच्य एवं पौष्टिक भोजन दें जैसे मूंग दाल, घी, दूध (यदि पचता हो), खिचड़ी, सब्जियां और ताजे फल। भूख कम होने पर छोटी-छोटी मात्रा में भोजन दें। पर्याप्त नींद और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें। ठंडी, बासी, अत्यधिक तली-भुनी एवं जंक फूड से परहेज करें। मानसिक स्वास्थ्य स्ट्रोक के बाद निराशा और अवसाद होना सामान्य है। परिवार का सहयोग, नियमित बातचीत और छोटी-छोटी उपलब्धियों के लिए प्रोत्साहन रोगी के आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करता है। महत्वपूर्ण यदि हाथ-पैर में बिल्कुल भी हरकत नहीं है, बोलने में लगातार कठिनाई है या कोई नया लक्षण (चेहरा टेढ़ा होना, अचानक कमजोरी बढ़ना, निगलने में समस्या) दिखाई दे तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
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