Is it safe to give my 4-month-old baby birth oil for her greenish-blue stools? - #56233
बच्ची 4 माह की है , कुछ दिन से अच्छे से मोशन नहीं कर रही , थोड़ा थोड़ा और हरा नीला कर रही है क्या जन्म घुट्टी देना ठीक रहेगा
How long has your baby been having these stool changes?:
- 1-2 weeksHow would you describe the frequency of her bowel movements?:
- Normal — multiple times a dayHave you noticed any other symptoms accompanying the stool changes?:
- No other symptomsIs she feeding well and gaining weight appropriately?:
- Yes, but not gaining weightHave you introduced any new foods or formulas recently?:
- No changesHow is her overall energy and activity level?:
- Active and playfulHave you consulted a doctor about her condition yet?:
- No, not yetDoctors' responses
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क्या इस स्थिति में जन्म घुट्टी देना ठीक रहेगा? ••••सीधा और स्पष्ट जवाब: नहीं, अभी बच्ची को जन्म घुट्टी या कोई भी बाहरी दवा अपनी मर्जी से देना बिल्कुल ठीक नहीं है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा (पीडियाट्रिक्स) दोनों ही यह मानते हैं कि 6 महीने से कम उम्र के बच्चों को सिर्फ और सिर्फ मां का दूध (Exclusive Breastfeeding) ही दिया जाना चाहिए। इस उम्र में बच्चे का पाचन तंत्र (Digestive System) बहुत नाजुक होता है। जन्म घुट्टी जैसी चीजों में कई तरह की जड़ी-बूटियाँ और शर्करा (sugar) होती है, जिसे 4 महीने की बच्ची का पेट पचा नहीं पाएगा, और इससे उसकी तकलीफ कम होने के बजाय बढ़ सकती है। मोशन (मल) के रंग और तरीके को समझें ••थोड़ा-थोड़ा और हरा-नीला मल आना: शिशु के मल का रंग बदलना अक्सर उनके पाचन तंत्र के विकास या मां के खान-पान पर निर्भर करता है। अगर बच्चा सिर्फ मां का दूध पी रहा है, तो मां के आहार में बदलाव (जैसे ज्यादा हरी सब्जियां या कोई दवा लेना) से भी बच्चे के मोशन का रंग बदल सकता है। इसके अलावा, कभी-कभी पेट में हल्की ‘वायु’ (गैस) बढ़ने के कारण भी मल का रंग और तरीका बदल जाता है। ••मोशन साफ न होना: छोटे बच्चों में कभी-कभी मल का पैटर्न बदलता रहता है। अगर बच्चा रो नहीं रहा है, उसका पेट कड़ा नहीं है, और वह अच्छी तरह दूध पी रहा है, तो आमतौर पर यह घबराने की बात नहीं होती। आप अभी क्या उपाय कर सकते हैं? (आयुर्वेदिक व सुरक्षित सलाह) चूंकि बच्ची अभी बहुत छोटी है, इसलिए उसे सीधे कोई दवा देने के बजाय आप निम्नलिखित सुरक्षित उपाय अपनाएं: 1. मां के खान-पान में बदलाव चूंकि बच्चा पूरी तरह मां के दूध पर निर्भर है, इसलिए मां का पाचन ठीक होना जरूरी है। ••मां अपने भोजन में जीरा, सौंफ, अजवाइन और हींग का प्रयोग बढ़ाएं। इससे दूध के माध्यम से बच्चे को भी गैस और अपच से राहत मिलेगी। ••मां भारी, बासी, ज्यादा तीखा-मसालेदार या गैस बनाने वाला खाना (जैसे छोले, राजमा, उड़द की दाल, गोभी) कुछ दिनों के लिए बिल्कुल न खाएं। 2. हींग का पानी (शिशु के लिए बाहरी उपाय) थोड़ी सी हींग को गुनगुने पानी में घोलकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को बच्ची की नाभि के आसपास (पेट पर) हल्के हाथों से क्लॉकवाइज (घड़ी की सुई की दिशा में) लगाएं। ध्यान रहे नाभि के अंदर पेस्ट न जाए। यह पेट की गैस और ऐंठन को दूर करने का बहुत ही सुरक्षित आयुर्वेदिक तरीका है। 3. सौम्य मालिश और व्यायाम बच्ची के पेट की गुनगुने नारियल तेल या तिल के तेल से हल्के हाथों से मालिश करें। ••बच्ची को पीठ के बल लिटाकर उसके पैरों को धीरे-धीरे साइकिल चलाने की तरह हिलाएं (Bicycle Exercise)। इससे पेट में फंसी गैस निकलती है और मोशन साफ होने में मदद मिलती है।
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