Baby ko ma ke doodh ke alava kuch bhi nhi dena hai. Constipation and bloating ke liye uske stomach ko halke haath se tummy pe anti clockwise round round ghumaye. Jab tak 2 months ka baby nahi hota usko kuch bhi meds nahi dena. Kapde ko halka garam krke pet ke sekai kare
नहीं, 20 दिन के नवजात शिशु को “बालकडू” (Balkadu) या कोई भी अन्य घरेलू घुट्टी/काढ़ा बिल्कुल नहीं देना चाहिए। 20 दिन के बच्चे को कोई भी बाहरी चीज़ देना बेहद खतरनाक हो सकता है। कृपया नीचे दी गई बातों को बहुत ध्यान से समझें: 1. 20 दिन के बच्चे को बालकडू क्यों नहीं देना चाहिए? सिर्फ स्तनपान (Exclusive Breastfeeding): मेडिकल साइंस और आयुर्वेद दोनों के अनुसार, जन्म से लेकर 6 महीने तक बच्चे को मां के दूध के अलावा और कुछ भी (यहाँ तक कि पानी, शहद, या बालकडू भी) नहीं देना चाहिए। कमज़ोर पाचन तंत्र और इन्फेक्शन का खतरा: 20 दिन के बच्चे की आंतें (gut) और लिवर अभी बहुत कच्चे और संवेदनशील होते हैं। बालकडू जैसी जड़ी-बूटियों को पचाने की क्षमता अभी बच्चे के शरीर में नहीं है। इसके अलावा, घरेलू काढ़े या घुट्टी से नवजात शिशु के पेट में गंभीर इन्फेक्शन (Infection) होने का खतरा बहुत ज़्यादा रहता है। 2. बच्चे के पेट में गैस और सूजन क्यों है? छोटे बच्चों के पेट में गैस होना एक सामान्य बात है क्योंकि उनका पाचन तंत्र अभी विकसित हो रहा होता है। स्तनपान करते समय कई बार बच्चे हवा अंदर खींच लेते हैं (Air swallowing), जिससे पेट फूल जाता है और दर्द होता है। 3. बच्चे को तुरंत आराम दिलाने के सुरक्षित उपाय (Safe Home Remedies) दवाई देने के बजाय आप अभी तुरंत ये सुरक्षित तरीके अपना सकती हैं: -डकार दिलाना (Burping) सबसे ज़रूरी है: बच्चे को हर बार दूध पिलाने के बाद अपनी छाती से सीधा सटाकर लगाएं और कम से कम 15-20 मिनट तक उसकी पीठ को तब तक सहलाएं जब तक वह डकार न ले ले। -टमी टाइम और साइकिलिंग एक्सरसाइज (Cycling Exercise): बच्चे को पीठ के बल लिटाएं और उसके दोनों पैरों को धीरे-धीरे साइकिल की तरह चलाकर उसके पेट की तरफ हल्का सा दबाएं। इससे पेट में फंसी गैस तुरंत बाहर निकल जाती है। -हींग का लेप (Hing Paste): थोड़े से गुनगुने पानी में एक चुटकी हींग मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को बच्चे की -नाभि (Navel) के आस-पास गोल घेरे में लगाएं। ध्यान रखें कि हींग नाभि के अंदर न जाए। यह गैस निकालने का बहुत ही सुरक्षित और असरदार तरीका है। -पेट की हल्की मालिश: गुनगुने नारियल या सरसों के तेल से बच्चे के पेट पर घड़ी की सुई की दिशा में (Clockwise) बिल्कुल हल्के हाथों से गोलाकार मालिश करें।