How to treat my 8-year-old daughter’s stomach pain and ensure she doesn’t have constipation? - #56892
Meri bacchi 8 sal ki hai aur Main chahti hun kisko privity nahin Aaye aur uska hight khinche hamesha vah pet Dard Karti rahti iska kya solution hai
How long has your daughter been experiencing stomach pain?:
- 1-4 weeksHow often does she have bowel movements?:
- DailyDoes she have any other symptoms along with stomach pain?:
- Bloating or gasWhat is her typical diet like?:
- UnsureHas she had any recent changes in her routine or stress levels?:
- No changesHow would you describe her energy levels?:
- Not sureHas she been treated for this condition before?:
- Tried home remediesDoctors' responses
••आयुर्वेद के दृष्टिकोण से, आज के समय में बच्चों में यह समस्या मुख्य रूप से ‘आर्तव वह स्रोतस’ की दृष्टि, मंदाग्नि (कमजोर पाचन) और अपान वायु की विकृति के कारण देखी जा रही है। नीचे चिकित्सा और प्रबंधन (Management) के कुछ मुख्य सूत्र दिए गए हैं, जिन्हें आप अपने क्लिनिकल विवेक के अनुसार कस्टमाइज़ कर सकते हैं: 1. लगातार पेट दर्द का समाधान (पाचन व अपान वायु शुद्धि) बच्ची को लगातार होने वाला पेट दर्द मंदाग्नि (Poor Digestion) और कृमि (Worms) या गैस (Vata) के कारण हो सकता है। आयुर्वेद में माना जाता है कि अगर आंतों (Gut) का स्वास्थ्य ठीक न हो, तो हॉर्मोनल असंतुलन तेजी से बढ़ता है। दीपन-पाचन: भोजन से 15 मिनट पहले बच्ची को गुनगुने पानी के साथ अष्टचूर्ण या हिंग्वाष्टक चूर्ण (बहुत कम मात्रा में, लगभग 500 mg) दें। कृमि चिकित्सा: चूंकि पेट दर्द लगातार है, इसलिए कृमिकुठार रस (1-1 गोली सुबह-शाम) या विडंगारिष्ट (5-10 ml बराबर पानी के साथ) 7 से 14 दिनों के लिए देना उचित रहेगा। सदाबहार उपाय: पेट पर हल्के गुनगुने एरण्ड तेल (Castor oil) या तिल के तेल की मालिश करके नाभी पूरण (नाभि में तेल लगाना) करने से अपान वायु का अनुलोमन होता है और दर्द में तुरंत आराम मिलता है। 2. अर्ली प्यूबर्टी (समय से पहले मासिक धर्म) को रोकना आजकल भोजन में पेस्टिसाइड्स और प्लास्टिक (Xenoestrogens) के कारण बच्चों के शरीर में ‘पित्त’ और ‘रक्त’ धातु समय से पहले प्रकुपित हो जाते हैं, जिससे हॉर्मोन्स जल्दी एक्टिव होते हैं। शीत और सौम्य चिकित्सा: शरीर में बढ़े हुए ‘तीक्ष्ण’ और ‘उष्ण’ गुणों को शांत करने के लिए शतावरी चूर्ण (1-2 ग्राम) को दूध के साथ दें। शतावरी हॉर्मोनल एक्सिस को प्राकृतिक रूप से बैलेंस करती है। प्रवाल पिष्टी या मुक्ता पिष्टी: (125 mg) शहद या मलाई के साथ देने से बढ़ा हुआ पित्त शांत रहता है, जिससे हाइपोथैलेमस-पिट्यूटरी-गोनाडल (HPG) एक्सिस समय से पहले ट्रिगर नहीं होता। दवाइयों से ज्यादा परहेज जरूरी: बच्ची को पैकेज्ड फूड, बाहर का जंक फूड, सोया प्रोडक्ट्स (Soyabean), और ब्रॉयलर चिकन (यदि नॉन-वेज खाते हों तो) से पूरी तरह दूर रखें, क्योंकि ये एस्ट्रोजन लेवल को तेजी से बढ़ाते हैं। 3. हाइट (ऊंचाई) बढ़ाने के उपाय (अस्थि व धातु पोषण) 8 से 12 साल की उम्र हड्डियों के विकास (Bone Elongation) के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है। प्यूबर्टी आने से पहले अगर उसकी अस्थि धातु को सही पोषण मिल जाए, तो हाइट अच्छी खींचेगी। अश्वगंधा और लाक्षादि गुग्गुल: अश्वगंधा चूर्ण (1 ग्राम) रात को दूध के साथ देने से ‘मज्जा’ और ‘अस्थि’ धातु का पोषण होता है और ग्रोथ हॉर्मोन स्टिमुलेट होता है। इसके साथ लाक्षादि गुग्गुल (1-1 गोली) हड्डियों को मजबूती देने और लंबाई बढ़ाने में सहायक है। दूध और घी: बच्ची के आहार में ए2 गाय का घी (A2 Cow Ghee) शामिल करें। यह धातुओं का तर्पण करता है।
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