पाचन की समस्या बचपन से (2017 से समस्या में वृद्धि) - #314
सुबह मल त्याग का वेग नही होता फिर भी शौच के लिए जाने पर बहुत ही कम मात्रा में बिना बंधा हुआ मल (सेमि लिक्विड) होता है। पेट भारी रहता है ।भोजन के ही समय ऊपरी दोनों गलफड़ों में कई दाने निकल जाते हैं । मात्र भोजन के बाद ही ढकार आता है बाकी समय ढकार के स्थान पर भोजन ही मुह में आ जाता है.. पूरे पूरे दिन गैस नही निकलता ।पूरे शरीर में जलन जैसा होता है । शरीर गर्म रहता है।वजन बहुत कम हो गया है ।मैं 26 साल का हु
इस स्थिति के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाए गए उपचार

डॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
Hello, Aapke lakshan Dekhkar Lagta Hai ki Aap ko apachan ki Bimari Hui Hai aur pitta ki vriddhi Hui Hai. Aapka vajan kitna hai? Koi tests kiye hai kya? Aap ye davai start kar sakte hai - Tab Laghu Sootshekar 1-1-1 after food, Tab Sanjivani vati 1-1-1 after food.
आपकी स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि आपके पाचन तंत्र में गड़बड़ी हो रही है, जो आयुर्वेद में अग्निमांद्य (पाचन अग्नि की कमजोरी) और आम दोष (अवशिष्ट विषाक्त पदार्थ) के कारण हो सकता है। सुबह मल त्याग में समस्या, पेट की भारीपन, भोजन के बाद दाने निकलना, और भोजन का मुंह में आना सभी पाचन संबंधी विकारों की ओर संकेत करते हैं। शरीर में जलन और गर्मी, साथ ही गैस न निकलना, पित्त दोष के असंतुलन का संकेत हैं, जिससे अम्लपित्त जैसी समस्या भी हो सकती है।
आपके लिए कुछ सुझाव:
त्रिफला चूर्ण रात को सोने से पहले गर्म पानी के साथ लें, इससे पेट की सफाई होगी और पाचन सुधरेगा। अविपत्तिकर चूर्ण या कामदुधा रस जैसे पित्त शांत करने वाले दवाओं का सेवन करें, जिससे जलन कम हो और पाचन सुधरे। भोजन हल्का, सुपाच्य और पित्त को संतुलित करने वाला होना चाहिए। मसालेदार, तला-भुना और अम्लीय भोजन से बचें। आम पाचन के लिए पंचकर्म विधि, विशेषकर विरेचन का विचार करें। यह आपके शरीर से आम दोष को निकालने में सहायक हो सकता है। दिन में भोजन के बाद जीरा, सौंफ, और धनिया का काढ़ा बनाकर पिएं, यह पाचन को मजबूत करेगा और गैस की समस्या से राहत दिलाएगा। दिन में 2-3 बार गर्म पानी पिएं, जिससे आम दोष का शमन हो और शरीर की गर्मी नियंत्रित हो सके।
आपकी स्थिति सुनकर लगता है कि आपके पाचन तंत्र में समस्या है, जो बचपन से वजन कमी और तेज पाचन अग्नि के संकेत दे रहा है। आपकी स्थिति में वात और पित्त दोष का असंतुलन दिखाई दे रहा है, जिसे आहार और जीवनशैली में बदलावों से नियंत्रित किया जा सकता है।
पहले तो आपको अपने आहार में कुछ बदलाव करने चाहिए। आपको भारी और गरिष्ठ भोजन से बचना चाहिए। हल्की और सुपाच्य चीजें खाएं, जैसे खिचड़ी, दलिया, और सादी सब्जियाँ। भोजन करने के समय का पालन करना भी आवश्यक है। दिन में तीन नियमित भोजन करें, और बीच-बीच में स्नैक्स या बहुत ज्यादा मात्रा में मत खाइए।
पानी का सेवन भी ध्यान से करें। भोजन के तुरंत पहले या बाद में ज्यादा पानी न पिएं, बल्कि जरूरी हो तो थोड़ा गर्म पानी पी सकते हैं। इससे आपको डकारों की समस्या में राहत मिल सकती है।
आपके शरीर के तापमान और जलन की समस्या पित्त दोष का संकेत देती है। नारियल का पानी और छाछ का नियमित सेवन इससे आराम दे सकता है। ध्यान दें कि छाछ को लंच के समय लेना ज्यादा लाभकारी होगा।
अभ्यंग या शरीर की मालिश तिल के तेल से करें, हफ्ते में दो बार। इससे वात दोष शांत होगा और शरीर की जलन भी कम होगी। इसके साथ ही, प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योग या प्राणायाम करें, जो पाचन प्रणाली को सशक्त बनाएगी।
अगर समस्या बनी रहती है, तो तत्काल डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, और आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेकर पंचकर्म थेरेपी की तरफ ध्यान दे सकते हैं। ये उपचार आपके पाचन के बुनियादी कारणों को दूर करने में मदद कर सकते हैं। आप जल्द स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करें!

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