टीबी के इलाज के बाद एलर्जी और सांस की समस्याओं का प्रबंधन कैसे करें? - #42965
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How long have you been experiencing your current allergy symptoms?:
- More than 6 monthsWhat triggers your allergy symptoms the most?:
- DustHow would you rate the severity of your breathing difficulties?:
- Severe, constantइस स्थिति के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाए गए उपचार


डॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
बहुत महत्वपूर्ण सवाल पूछे अपने। पहले आ जाते हैं आपके मुख्य प्रश्न पर — एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दवाओं के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाये।
1) अचानक अपनी एलोपैथिक दवाओं को बंद करना सही नहीं है। ये दवाएँ आपकी स्थिति को स्थिर रखने में मदद कर रहीं हैं। एक उचित चिकित्सक की देखरेख में धीरे-धीरे बदलाव करना बेहतर रहेगा।
2) अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेकर धीरे-धीरे एलोपैथिक दवाओं की खुराक कम करें, जैसे कि हफ्ते में एक बार रात में न लें, फिर बढ़ायें। ये चरणबद्ध बंद करने का दुर्लभ तरीका हो सकता है।
3) Punarnavadi Mandur संभवतः आपके केस में जल संचय (water retention) और एनर्जी बढ़ाने में मदद करेगा। ये दवा रक्त को शुद्ध करने में भी सहयोग करती है।
4) Dashmoolarisht आपके फेफड़ों की शक्ति बढ़ाने में फायदेमंद होगा। ये कफ को संतुलित करता है और श्वसन तंत्र को मजबूती देता है।
5) Haridrakhand आपके ऐलर्जी लक्षणों पर असर करेगा क्योंकि यह सूजन कम करती है और इम्युनिटी को बढ़ावा देती है।
6) आपकी सांस फूलने की समस्या, फेफड़ों की कमजोरी से जुड़ी हो सकती है लेकिन वात और कफ का प्रभाव भी संभव। फेफड़ों को मजबूत और वात-कफ को संतुलित करना लक्ष्य हो सकता है।
7) 7-दिन का आयुर्वेदिक प्लान: - सुबह गर्म पानी में शहद और नींबू का सेवन करें। - नाश्ते में ओट्स या मूंग दाल का चीला खायें। - दिन में एक बार Tulsi, अदरक और शहद की चाय लें। - भोजन में हल्की सब्जियाँ, जैसे लौकी, टिंडा पर जोर दें। - सोते समय हल्दी वाला दूध पियें।
8) अगर आपकी स्थिति में सुधार नही आ रहा है, तो HRCT या PFT जैसे अतिरिक्त टेस्ट फेफड़ों की जाँच के लिए उपयोगी हो सकते हैं। हमेशा एक डॉक्टर से चर्चा करे ताकि ट्रीटमेंट सही दिशा में जाएगा।
इस प्लान को अच्छी तरह से पालन करें और अपने डॉक्टर के साथ रेगुलर चेकअप जारी रखें।
जब आप पहले से एलोपैथिक दवाएं ले रहे हैं, अचानक उन्हें बंद करना लाभकारी नहीं हो सकता। आपको धीरे-धीरे transition करनी चाहिए। पहले, Punarnavadi Mandur और Haridrakhand को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और एलोपैथिक दवाओं को धीरे-धीरे कम करके कुछ हफ्तों में समाप्त करें। आपको डॉक्टर की सलाह भी आवश्यक है।
Punarnavadi Mandur विशेष रूप से जलधारण और एनीमिया के लिए दी जाती है। यह रक्त को सुधारने और शरीर से अतिरिक्त पानी को निकालने में मदद करता है। Dashmoolarisht respiratory strength के लिए बहुत फायदेमंद है। यह बलगम को हटाने और फेफड़ों की ताकत बढ़ाने में सहायक है।
Haridrakhand आपकी एलर्जी और नासिका संबंधी समस्याओं के लिए उपयोगी है। इसमें हल्दी के तत्व होते हैं जो एंटी-इलर्जिक माने जाते हैं और सूजन कम करते हैं।
साँस की समस्या फेफड़े की कमजोरी और वात-कफ विकार दोनों से संबंधित हो सकती है। डायट के लिए, हल्की और पचने में आसान चीजें जैसे गरम पानी, शहद के साथ अदरक, लहसुन और त्रिकुटा (सौंठ, मिर्च, काली मिर्च) का सेवन करें। किसी भी ठंडे और भारी भोजन से बचें।
आवश्यक परीक्षण जैसे HRCT और PFT आपकी फेफड़ों की स्थिति को बेहतर समझने में मदद कर सकते हैं। यदि आपकी समस्याएं बढ़ती हैं, तो ये टेस्ट करवाना सही रहेगा। आपके लिए डॉक्टर से परामर्श करना भी आवश्यक है ताकि आप अपने वर्तमान स्थिति के अनुसार सही दिशा में जा सकें।
आयुर्वेदिक उपाय और चिकित्सा धीरे-धीरे सहायक होते हैं, इसलिए धैर्य रखें और निरंतर प्रयास करें। यह भी याद रखें की हर किसी का शरीर अलग होता है और प्रतिक्रिया देने का तरीका भी। ध्यानपूर्वक डॉक्टर और उनके सलाह का पालन करें।

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