आपके लक्षणों को संतुलित करने के लिए कुछ बेहद प्रभावी आयुर्वेदिक उपाय और जड़ी-बूटियाँ निम्नलिखित हैं: 1. प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियाँ (Herbal Remedies) •शतावरी (Shatavari): यह महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए अमृत मानी जाती है। यह हार्मोनल संतुलन को सुधारती है और गर्भाशय को शक्ति देती है। कैसे लें: 1 छोटा चम्मच शतावरी चूर्ण दिन में दो बार गुनगुने दूध या पानी के साथ लें। •अशोक (Ashoka): यह गर्भाशय के विकारों और अनियमित पीरियड्स (Artava Dushti) को ठीक करने की सबसे उत्तम औषधि है। कैसे लें: अशोकारिष्ट (Ashokarishta) सिरप के रूप में आसानी से मिलता है। 2-2 चम्मच (15-20 ml) सिरप में बराबर मात्रा में गुनगुना पानी मिलाकर दोपहर और रात के भोजन के बाद लें। •चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati): यह पेल्विक अंगों (pelvic organs) को ताकत देती है और वात दोष का अनुलोमन करती है। कैसे लें: 1-1 गोली सुबह-शाम हल्के गुनगुने पानी के साथ लें। 2. आहार में बदलाव (Dietary Recommendations) वात-पित्त शामक भोजन: अपने आहार में गाय का शुद्ध घी, दूध, और ताजे फलों को शामिल करें। घी शरीर में रूखेपन (dryness) को कम करता है और हार्मोन्स को सपोर्ट करता है। ••इनसे परहेज करें: बहुत अधिक तीखा, खट्टा, नमकीन, डिब्बाबंद (processed) भोजन और कैफीन (चाय/कॉफी) का सेवन कम करें, क्योंकि ये पित्त और वात को बढ़ाकर पीरियड्स को और अनियमित कर सकते हैं। लोह तत्व (Iron) युक्त भोजन: फ्लो कम होने और कमजोरी से बचने के लिए अनार, खजूर, मुनक्का और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन बढ़ाएं। •••तनाव प्रबंधन: हार्मोनल बदलाव के कारण इस उम्र में मूड स्विंग्स या तनाव होना आम है। इसके लिए रोज 15-20 मिनट प्राणायाम (अनुलोम-विलोम) और ध्यान (Meditation) करें।
अगर मेरी उम्र 46 साल है और मेरे पीरियड्स अनियमित हैं और शायद मैं ओव्यूलेट नहीं कर रही हूँ, तो मुझे क्या करना चाहिए? - #55808
हेलो नमस्कार, सर 46 में चल रही हुं, पीरियड 18,19,11 दिन में ही आ जाता है,फ्लो से भी नहीं आता, ओवल्यूशन भी शायद नहीं होता
How long have you been experiencing irregular periods?:
- Less than 3 monthsHow would you describe the flow during your periods?:
- Very lightHave you noticed any associated symptoms with your menstrual cycle?:
- No associated symptomsHave you had any changes in your weight recently?:
- No changesAre you experiencing any other health issues?:
- Hormonal imbalancesHow is your overall stress level?:
- Moderate stressHave you consulted any healthcare provider regarding this issue before?:
- Yes, and I am currently under treatmentडॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
46 वर्ष की उम्र में बार-बार पीरियड आना और कम फ्लो होना अक्सर perimenopause हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकता है। फिर भी Hb, thyroid, ultrasound और gynecologist जांच कराना जरूरी है। Ashokarishta 20 ml बराबर पानी मिलाकर दिन में 2 बार भोजन बाद Shatavari Churna 1 चम्मच सुबह-रात दूध के साथ Praval Pishti 125 mg दिन में 2 बार शहद के साथ साथ में: तनाव, देर रात जागना, बहुत तीखा-खट्टा भोजन कम करें तिल, अनार, चुकंदर, हरी सब्जियां लें योग और हल्का व्यायाम करें
46 वर्ष की आयु में पीरियड्स का 18–20 दिन में आना, बहुत कम फ्लो होना और ओव्यूलेशन का कम होना अक्सर शरीर में हार्मोनल बदलाव एवं मेनोपॉज़ की शुरुआत (Perimenopause phase) का संकेत हो सकता है। आयुर्वेद में इसे मुख्यतः वात-पित्त असंतुलन और धातु क्षीणता से जोड़ा जाता है। घबराने की आवश्यकता नहीं है, सही दिनचर्या और उपचार से काफी सुधार संभव है। रोज सुबह गुनगुना पानी लें। अधिक चाय, कॉफी, मिर्च-मसाले, खट्टा एवं जंक फूड कम करें। तिल, अलसी, देसी घी, दूध, अनार, चुकंदर और हरी सब्जियाँ लाभकारी रहती हैं। तनाव कम रखें, पर्याप्त नींद लें और हल्का योग/प्राणायाम करें। शरीर में कमजोरी या हार्मोनल असंतुलन होने पर अशोक, शतावरी, लोध्र आदि युक्त आयुर्वेदिक दवा दी जाती हैं। चूंकि आप पहले से उपचार ले रही हैं, इसलिए अपना इलाज नियमित रखें। यदि बार-बार जल्दी पीरियड्स आएं, अत्यधिक कमजोरी हो, या ब्लीडिंग पैटर्न और बदलने लगे तो एक बार हार्मोन प्रोफाइल एवं अल्ट्रासाउंड की जांच कराना भी उचित रहेगा। सही देखभाल से इस अवस्था को अच्छी तरह संतुलित किया जा सकता है।
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