क्या मैं अपने 4 महीने की प्रेग्नेंसी के दौरान, जब मेरे SGPT और SGOT लेवल्स हाई हैं, लिवर अमृत सिरप का इस्तेमाल कर सकती हूँ? - #55658
4 महीने की गर्भवती स्त्री, SGPT 165, SGOT 157, बाकी सभी रिपोर्ट नॉर्मल है, Bile Acid bhi 10 है जो की एकदम समान्य है, क्या लीवर अमृत सिरप का उपयोग कर सकते??
How did you find out about your liver enzyme levels?:
- Routine check-upHave you experienced any symptoms related to liver function?:
- No symptomsHave you had any previous liver issues or treatments?:
- No previous issuesWhat is your current diet like?:
- High in fatty foodsHow is your overall health and energy level during pregnancy?:
- Moderate with frequent tirednessAre you taking any other medications or supplements?:
- Prenatal vitaminsHave you discussed your liver enzyme levels with your obstetrician?:
- I was advised to monitor itडॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
गर्भावस्था के चौथे महीने (Second Trimester) में SGPT (165) और SGOT (157) का इस स्तर पर बढ़ना यह संकेत देता है कि लीवर पर थोड़ा दबाव या सूजन (hepatic inflammation) है। राहत की बात यह है कि आपका सिम्पटम्स और अन्य रिपोर्ट्स नॉर्मल हैं, और Bile Acid (10 µmol/L) पूरी तरह सामान्य है, जो गर्भावस्था में होने वाली एक जटिलता ‘इंट्राहेपेटिक कोलेस्टेसिस’ (ICP) के खतरे को फिलहाल खारिज करता है। अभी बिना डॉक्टर की प्रत्यक्ष देखरेख के ‘लीवर अमृत’ या किसी भी पेटेंट आयुर्वेदिक सिरप का स्व-सेवन (Self-medication) बिल्कुल न करें। इसके पीछे के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: 1. सुरक्षा सर्वोपरि है (Safety First) बाजार में मिलने वाले ‘लीवर अमृत’ जैसे सिरप कई जड़ी-बूटियों (जैसे कुटकी, कालमेघ, पुनर्नवा, भृंगराज आदि) का मिश्रण होते हैं। हालांकि ये जड़ी-बूटियां लीवर के लिए बेहतरीन हैं, लेकिन गर्भावस्था के दौरान इनमें से कुछ तीक्ष्ण (strong) या गर्भाशय को उत्तेजित करने वाली हो सकती हैं। साथ ही, कई सिरप में प्रिजर्वेटिव्स और अल्कोहल की सूक्ष्म मात्रा (Asava/Arishta बेस में) हो सकती है, जो गर्भस्थ शिशु के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जाती। 2. गर्भावस्था में लीवर बढ़ने (Elevated Enzymes) के आयुर्वेद और आधुनिक कारण गर्भावस्था में शरीर में हार्मोनल बदलाव (विशेषकर प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन का बढ़ना) होते हैं, जिसे आयुर्वेद में ‘गर्भज लक्षण’ और पित्त दोष का असंतुलन माना जाता है। इस समय लीवर को सुरक्षित और अत्यंत सौम्य (mild) चिकित्सा की आवश्यकता होती है। आपके लिए सुरक्षित और सही कदम (Recommended Action Plan) स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से मिलें: सबसे पहले अपनी गायनेकोलॉजिस्ट को यह रिपोर्ट दिखाएं। वे अक्सर गर्भावस्था में सुरक्षित मानी जाने वाली दवाएं जैसे Ursodeoxycholic Acid (UDCA) या आवश्यक सप्लीमेंट्स दे सकती हैं। सुरक्षित घरेलू व आहार संबंधी उपाय (Diet & Lifestyle Tips) जब तक आप डॉक्टर से नहीं मिल पाते, तब तक लीवर के बढ़े हुए एंजाइम्स को नियंत्रित करने के लिए आप ये पूरी तरह सुरक्षित उपाय अपना सकते हैं: आमलकी (आंवला): आंवला पित्त को शांत करता है और लीवर के लिए एक बेहतरीन रसायन है। आप ताजे आंवले का रस (गुनगुने पानी में) या मुरब्बा (अच्छे से धोकर ताकि अतिरिक्त चीनी निकल जाए) ले सकती हैं। मुनक्का और सौंफ का पानी: रात में 5-6 मुनक्का और 1 चम्मच सौंफ को पानी में भिगो दें। सुबह इसे छानकर पीने से लीवर की गर्मी शांत होती है। आहार में बदलाव: पूरी तरह से सात्विक, हल्का और सुपाच्य भोजन लें। ज्यादा तेल, घी, मिर्च-मसाले, और बाहर के खाने से पूरी तरह परहेज करें। लौकी, तोरई, कद्दू और टिंडा जैसी हरी सब्जियां ज्यादा खाएं। हाइड्रेशन: दिनभर में पर्याप्त मात्रा में गुनगुना या सामान्य पानी पीती रहें ताकि शरीर के टॉक्सिंस बाहर निकलते रहें।
During pregnancy not recommended
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