आयुर्वेद के अनुसार बार-बार पेशाब आना (Frequent Urination) और स्टैमिना में कमी दोनों के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल “डाययूरेटिक (मूत्रवर्धक)” पाउडर लेना उचित नहीं है, क्योंकि डाययूरेटिक द्रव्य पेशाब को और बढ़ा सकते हैं। यदि आपका मुख्य लक्षण बार-बार पेशाब आना है, तो पहले उसके कारण को समझना आवश्यक है। 6 महीने से अधिक समय से यह समस्या होने पर एक बार ब्लड शुगर और यूरिन जांच भी करा लेना उचित रहेगा। आयुर्वेदिक चूर्ण (स्टैमिना एवं मूत्राशय बल के लिए) निम्न द्रव्यों को समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनवाया जा सकता है: अश्वगंधा चूर्ण – 100 ग्राम गोक्षुर चूर्ण – 100 ग्राम शतावरी चूर्ण – 100 ग्राम सफेद मूसली चूर्ण – 100 ग्राम सेवन विधि 3–5 ग्राम (लगभग 1 चम्मच) चूर्ण सुबह और रात भोजन के बाद गुनगुने दूध या पानी के साथ अपेक्षित लाभ शरीर की शक्ति एवं स्टैमिना बढ़ाने में सहायक कमजोरी एवं थकान में लाभकारी मूत्राशय को बल प्रदान करने में सहायक सामान्य शारीरिक ऊर्जा बनाए रखने में मददगार आहार-विहार चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स का अधिक सेवन न करें। रात में सोने से 2 घंटे पहले अधिक पानी न पिएं। पर्याप्त नींद लें। नियमित हल्का व्यायाम और प्राणायाम करें।
••हाँ, आप स्टैमिना (बल्य/वाजीकरण) और डाइयुरेटिक (मूत्रल) औषधियों को मिलाकर एक मिश्रण या पाउडर तैयार कर सकते हैं। आयुर्वेद में कई ऐसी औषधियाँ हैं जो एक साथ दोनों कार्य करती हैं—यानी वे शरीर को ताकत भी देती हैं और साथ ही साथ मूत्रल (diuretic) होने के कारण किडनी और यूरिनरी ट्रैक्ट को साफ रखने में मदद करती हैं। ••गोक्षुर (Gokhru) यह इस फॉर्मूले का किंग है। यह एक बेहतरीन मूत्रल (Diuretic) भी है और साथ ही नेचुरल टेस्टोस्टेरोन बूस्टर व बल्य (Stamina Builder) भी है।( 50 ग्राम) ••अश्वगंधा (Ashwagandha) परम बल्य, रसायन और स्टैमिना बढ़ाने वाली औषधि। यह मांसपेशियों को ताकत देती है और कोर्टिसोल (स्ट्रेस) को कम करती है।( 50 ग्राम) ••शतावरी (Shatavari) यह शरीर में धातुओं का पोषण करती है, बल देती है और इसमें मृदु मूत्रल (Mild Diuretic) गुण भी होते हैं जो यूरिनरी ब्लैडर को सूथ (soothe) करते हैं।( 50 ग्राम) ••सफेद मूसली (Safed Musli) फिजिकल स्टैमिना, थकावट दूर करने और वाजीकरण के लिए अत्यंत प्रभावी। (50 ग्राम) ••पुनर्नवा (Punarnava) यह आयुर्वेद का सबसे बेहतरीन शोथहर और मूत्रल (Diuretic) है। यह किडनी को डिटॉक्स करता है और शरीर से वॉटर रिटेंशन (सूजन) को कम करता है। (30 ग्राम) ••इलायची (Chhoti Elaichi) यह मिश्रण को सुपाच्य (Digestible) बनाती है, मुख शुद्धि करती है और यह भी एक सौम्य मूत्रल है। (10 ग्राम) ••बनाने की विधि ऊपर बताई गई सभी औषधियों को अच्छी तरह साफ करके सुखा लें (यदि आप साबुत ला रहे हैं)। इन्हें अलग-अलग कूटकर बारीक कपड़छन चूर्ण (Fine Powder) बना लें या अच्छी ब्रांड के रेडीमेड चूर्ण मिक्स कर लें। सभी को एक साथ मिलाकर एक एयर-टाइट कांच के जार (Air-tight Glass Container) में सुरक्षित रख लें। सेवन विधि (Dosage) मात्रा: 3 से 5 ग्राम (लगभग 1 छोटा चम्मच)। दिन में कितनी बार: दिन में दो बार (सुबह खाली पेट या वर्कआउट के बाद, और रात को सोने से पहले)। अनुपान (किसके साथ लें): यदि मुख्य उद्देश्य स्टैमिना और बल है, तो इसे गुनगुने दूध (Cow’s Milk) के साथ लें। यदि मुख्य उद्देश्य डाइयुरेटिक और डिटॉक्स है, तो इसे गुनगुने पानी के साथ लें। 💡 क्लिनिकल नोट (An Ayurvedic Doctor’s Advice) अग्नि का ध्यान रखें: अश्वगंधा, शतावरी और मूसली स्वभाव से गुरु (Heavy to digest) होती हैं। इसलिए यदि मरीज की मंदाग्नि (कमजोर पाचन) है, तो इसमें 10-15 ग्राम सोंठ (Shunti) या मरिच (Kali Mirch) मिलाना बेहतर रहता है ताकि आम-उत्पत्ति न हो। ड्रैगन/क्रोनिक किडनी डिसीज (CKD): यदि किसी को गंभीर किडनी रोग या हाई ब्लड प्रेशर के कारण तेज एलोपैथिक डाइयुरेटिक्स चल रहे हैं, तो पुनर्नवा और गोक्षुर की मात्रा को उनके लैब पैरामीटर्स (Serum Creatinine/Potassium) देखकर ही कस्टमाइज करें।