What to do for protein in urine and slight semen discharge during bowel movements? - #55964
Mere यूरिन में प्रोटीन जाता है और लैट्रिन के व़क्त हल्का जोर देने मात्र से वीर्य स्राव होता है थोड़ा सा और पस भी है सीमेन में इलाज बता सकते हैं
How long have you been experiencing protein in your urine?:
- More than 6 monthsHow would you describe the amount of protein in your urine?:
- Not sureHave you noticed any other symptoms accompanying these issues?:
- No other symptomsHow often do you experience semen discharge during bowel movements?:
- Every timeDo you have any history of urinary or reproductive health issues?:
- Previous infectionsHow is your overall digestive health?:
- Chronic digestive issuesHave you made any recent changes to your diet or lifestyle?:
- No changesDoctors' responses
आपकी समस्या में बार-बार वीर्य स्राव, सीमेन में पस, पुराने इन्फेक्शन का इतिहास, पाचन खराब रहना और यूरिन में प्रोटीन आना — ये सब मिलकर मूत्रवह एवं शुक्रवह स्रोतस की कमजोरी और संक्रमण की ओर संकेत करते हैं। पहले एक बार यूरिन रूटीन, Urine Protein/Albumin, Semen analysis और KFT कराना ज़रूरी है ताकि किडनी या संक्रमण की गंभीरता पता चल सके। –rx 1) Chandraprabha Vati – 2 गोली दिन में 2 बार, भोजन के बाद गुनगुने पानी से। 2) Gokshuradi Guggulu – 2 गोली दिन में 2 बार, भोजन के बाद। 3) Shilapravang Special – 1 गोली सुबह-शाम दूध या गुनगुने पानी से। 4) Triphala Churna – 1 चम्मच रात को सोते समय गुनगुने पानी से, कब्ज और पाचन सुधार हेतु। 5) Varunadi Kwath – 20 ml + 20 ml पानी मिलाकर सुबह-शाम खाली पेट। ----परहेज एवं सलाह कब्ज बिल्कुल न होने दें, जोर लगाने से वीर्य स्राव बढ़ता है। मसालेदार, ज्यादा खट्टा, शराब, तंबाकू, हस्तमैथुन और देर रात जागना बंद करें। —पर्याप्त पानी पिएं, हल्का सुपाच्य भोजन लें। 6–8 घंटे नींद लें और मानसिक तनाव कम रखें। अगर पेशाब में जलन, बुखार, कमर दर्द, सूजन या ज्यादा झागदार यूरिन हो तो तुरंत किसी यूरोलॉजिस्ट/फिजिशियन को दिखाएँ।
एक आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में मैं आपको निम्नलिखित संपूर्ण चिकित्सा परामर्श दे रहा हूँ: 1. मुख्य आयुर्वेदिक औषधियां (Medicines) ये औषधियां यूरिनरी ट्रैक्ट के इन्फेक्शन (पस) को खत्म करेंगी, प्रोटीन के रिसाव को रोकेंगी और प्रजनन अंगों को शक्ति प्रदान करेंगी: ••चन्द्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati): 2-2 गोली सुबह और शाम को गुनगुने पानी या दूध के साथ लें। (यह यूरिन में प्रोटीन और पस को रोकने की सबसे मुख्य औषधि है)। ••गोक्षुरादि गुग्गुल (Gokshuradi Guggulu): 2-2 गोली दोपहर और रात को भोजन के बाद हल्के गुनगुने पानी से लें। (यह किडनी और यूरिनरी सिस्टम की सूजन व इन्फेक्शन दूर करती है)। ••गिलोय सत्त्व (Giloy Satva) + प्रवाल पिष्टी (Praval Pishti): 10 ग्राम गिलोय सत्त्व और 5 ग्राम प्रवाल पिष्टी को आपस में मिला लें। इसकी 30 पुड़िया बना लें। सुबह और शाम खाली पेट एक-एक पुड़िया शहद या मलाई के साथ लें। (यह सीमेन के पस और शरीर की आंतरिक गर्मी को शांत करेगी)। ••चंदनआसव (Chandanasava): 20 ml दवा में 20 ml पानी मिलाकर दोपहर और रात के भोजन के आधे घंटे बाद लें। (यह पित्तशामक है और वीर्य के स्वतः स्राव को रोकती है)। 2. पथ्य-अपथ्य: आहार और खान-पान (Diet) दवाइयों के साथ खान-पान में बदलाव करना 50% बीमारी को वैसे ही ठीक कर देता है: क्या खाएं (Do’s): ••ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थ: लौकी, तोरई, कद्दू, खीरा, और तरबूज का सेवन करें। •अनाज: पुराना गेहूं, जौ (Barley) का दलिया या जौ का पानी पिएं। जौ यूरिन में प्रोटीन जाने की समस्या में रामबाण है। •पेय पदार्थ: दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं। नारियल पानी, मिश्री मिला हुआ गाय का दूध, और आंवले का रस बेहद फायदेमंद हैं। ••क्या न खाएं (Don’ts): •तीखा और गर्म मसाला: लाल मिर्च, गरम मसाला, चाट-पकौड़ी, और अत्यधिक नमक का त्याग करें। ये शरीर में पित्त बढ़ाकर पस और वीर्य स्राव को तेज करते हैं। •खट्टी और तली चीजें: अचार, इमली, सिरका, और समोसे-कचौड़ी जैसी तली-भुनी चीजों से बिल्कुल दूर रहें। उत्तेजक पदार्थ: चाय, कॉफी, शराब और धूम्रपान का सेवन पूरी तरह बंद कर दें। 3. जीवनशैली और विहार (Lifestyle & Habits) ••कब्ज (Constipation) न होने दें: चूंकि आपको लैट्रिन के वक्त जोर लगाने पर वीर्य निकलता है, इसलिए पेट साफ रहना सबसे जरूरी है। इसके लिए रात को सोते समय 1 चम्मच ईसबगोल की भूसी या त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें ताकि सुबह बिना जोर लगाए पेट साफ हो। ••ब्रह्मचर्य और मानसिक शांति: कुछ समय के लिए हस्तमैथुन या उत्तेजक विचारों/वीडियोस से पूरी तरह दूरी बना लें। मन में कामुक विचार आने से भी अपान वायु विकृत होती है और वीर्य पतला होकर रिसने लगता है। ••शीतलता: रात को सोते समय अपने हाथ-पैर धोकर सोएं। नाभि और तलवों पर गाय का घी या चंदन का तेल लगाएं।
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