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मेरे दांतों में संक्रमण को कैसे नियंत्रित करें और कैविटी को कैसे मैनेज करें?
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Dental Disorders
प्रश्न #49659
20 दिनों पहले
439

मेरे दांतों में संक्रमण को कैसे नियंत्रित करें और कैविटी को कैसे मैनेज करें? - #49659

Client_7d0f40

मुझे अपने दांतों में लगभग 7 में कैविटी लगी हुई है और 7 में दो की आरसीटी हो रखी है और वो काफी हद तक सड़ चुके हैं। और उनका जड़ ही बचा है और थोड़ा बहुत हिस्सा ऊपर का क्राउन है। लेकिन इनमें दर्द नहीं है, तो संक्रमण से बचने के लिए क्या कर सकता हूँ और जो कुछ संक्रमण है उसे कैसे कंट्रोल और कम करूँ?

How long have you been experiencing dental issues?:

- Less than 1 month

Do you have any other symptoms related to your dental health?:

- Swelling or redness

What is your current oral hygiene routine?:

- Brush once a day
पेड
प्रश्न बंद है

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डॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं

Hi Apki condition ke anusaar aap ye medicine le sakte hain Irimedadi oil ko subah daanto mein lagaye Shaam ko laung ka tail ko lagaye Shaam ko triphala kwath ko muh mein bharkar jitni der tak rakh skte hai rakhe

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दर्द न होना इसका मतलब नहीं है कि अंदर संक्रमण नहीं है जिन दांतों में कैविटी है और जिन दांतों में आरसीटी के बाद सिर्फ जड़ बची है वहां बैक्टीरिया धीरे धीरे बढ़ते रहते हैं सूजन और लालिमा इसका संकेत हो सकती है इसलिए अभी से रोकथाम पर ध्यान देना जरूरी है और सफाई को गंभीरता से लेना चाहिए ताकि स्थिति आगे न बढ़े दिन में दो बार नरम ब्रश से दांत साफ करें और हर भोजन के बाद सादे पानी से अच्छी तरह कुल्ला करें रात को सोने से पहले गुनगुने पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर कुल्ला करना फायदेमंद रहता है इससे मुंह में जमे कीटाणु कम होते हैं और मसूड़ों की सूजन कंट्रोल में रहती है आयुर्वेदिक रूप से त्रिफला चूर्ण आधा चम्मच रात को गुनगुने पानी के साथ लेना उपयोगी रहता है इससे शरीर की अंदरूनी सफाई होती है और मुंह के संक्रमण पर भी असर पड़ता है सुबह त्रिफला क्वाथ से कुल्ला किया जा सकता है लगभग पचास मिलीलीटर क्वाथ लेकर दो से तीन मिनट मुंह में घुमाएं और थूक दें अगर मसूड़ों में सूजन या हल्की जलन है तो खदिरादि वटी एक गोली दिन में दो बार चूसकर लेना लाभदायक रहता है इससे मुंह के बैक्टीरिया कंट्रोल होते हैं और मसूड़े मजबूत होते हैं इसके साथ ही नीम या बबूल आधारित दंतमंजन का नियमित उपयोग करें ये सभी उपाय संक्रमण को शांत रखने में मदद करते हैं लेकिन जिन दांतों की सिर्फ जड़ बची है उनमें आगे चलकर फोड़ा या हड्डी का इन्फेक्शन बन सकता है इसलिए डेंटल एक्स रे कराकर दंत चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है आयुर्वेदिक दवाएं सहायक हैं लेकिन खराब दांत का स्थायी समाधान समय पर सही दंत उपचार से ही होता है

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संक्रमण रोकने और नियंत्रित करने के उपाय ✅ घरेलू और आयुर्वेदिक देखभाल - त्रिफला चूर्ण: 1–2 ग्राम गुनगुने पानी के साथ, दिन में 1–2 बार (संक्रमण और सूजन कम करने में सहायक)। - निम्बा (नीम) चूर्ण या क्वाथ: 5–10 ml दिन में 1–2 बार, रक्तशुद्धि और संक्रमण नियंत्रण के लिए। - तुलसी और लौंग का पानी: गुनगुना करके कुल्ला करें, यह एंटीसेप्टिक प्रभाव देता है। - अर्जुन छाल क्वाथ: 10 ml दिन में 1 बार, मसूड़ों को मज़बूत करने में सहायक। 🪥 मौखिक स्वच्छता - दिन में दो बार ब्रश करें, नरम ब्रश का प्रयोग करें। - माउथवॉश (गुनगुना पानी + नमक या त्रिफला क्वाथ) से कुल्ला करें। - मीठे और चिपचिपे खाद्य पदार्थ कम करें। - भोजन के बाद कुल्ला करना आदत बनाएँ

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नमस्ते मैं आपकी हालत समझ सकता हूँ जब आपके कई दाँतों में कैविटी है और आपको इन्फेक्शन होने की चिंता है। भले ही अभी दर्द न हो, लेकिन अभी कदम उठाने से चीजें गंभीर होने से बच सकती हैं और और सड़न रुक सकती है। आपकी चिंता –मरीज: वयस्क –मुख्य दाँतों की समस्या: –लगभग 7 दाँतों में छेद –2 दाँतों का रूट कैनाल हुआ था, लेकिन अब वे लगभग खराब हो चुके हैं –सिर्फ़ जड़ें और ऊपरी हिस्से के कुछ टुकड़े बचे हैं –कुछ सूजन और लालिमा –अभी ज़्यादा दर्द नहीं है –दिन में सिर्फ़ एक बार ब्रश करते हैं यह छिपे हुए इन्फेक्शन के लिए एक समस्या हो सकती है, भले ही दर्द न हो। आयुर्वेदिक समझ जब रूट कैनाल के बाद दाँत टूटते हैं: –कीटाणु दरारों से अंदर चले जाते हैं –वे रूट कैनाल में बढ़ते हैं –इन्फेक्शन धीरे-धीरे जबड़े की हड्डी में चला जाता है –आपका शरीर कुछ समय तक इससे लड़ता है इसलिए दर्द नहीं होता लेकिन यह अचानक खराब हो सकता है, जैसे सूजन, बुखार, पस, या यहाँ तक कि दिल और किडनी की समस्याएँ तो, दर्द न होने का मतलब यह नहीं है कि सब ठीक है। इलाज का लक्ष्य –इन्फेक्शन खत्म करना –मसूड़ों और हड्डियों को मजबूत बनाना –और सड़न रोकना आप तुरंत क्या कर सकते हैं (महत्वपूर्ण) 1. नीम, त्रिफला और लौंग से गरारे करें (दिन में दो बार) मिलाएँ: –½ चम्मच त्रिफला पाउडर –½ चम्मच नीम पाउडर –1 कुचली हुई लौंग इसे 1 कप पानी में उबालें, छान लें और गुनगुना होने पर गरारे करें यह कीटाणुओं को मारता है, पस को हटाता है, और आपको फोड़ा होने से बचाता है। 2. गंधक रसायन खाने के बाद दिन में दो बार 1 टैबलेट (30 दिनों के लिए) यह दाँतों की समस्याओं के लिए एक ठोस आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक है। 3. कैशोर गुग्गुलु खाने के बाद दिन में दो बार 1 टैबलेट यह गहरे इन्फेक्शन को खत्म करता है, आपकी जबड़े की हड्डी की रक्षा करता है, और सूजन को कम करता है। 4. लौंग का तेल रुई पर 1 बूंद डालें इसे टूटे हुए दांतों और मसूड़ों पर लगाएं दिन में 2-3 बार हर दिन अपने मुंह की देखभाल कैसे करें (इसे बदलना होगा) दिन में दो बार ब्रश करें इस्तेमाल करें: –नरम ब्रश –हर्बल टूथपेस्ट या नीम का पेस्ट खाने के बाद: गुनगुने पानी से कुल्ला करें रात में: तिल या नारियल के तेल से ऑयल पुलिंग करें (5 मिनट) इन चीज़ों से दूर रहें –चीनी –मीठी चीज़ें –कोल्ड ड्रिंक्स –बिस्कुट –टूटे हुए दांतों से चबाना ये कीटाणुओं को बढ़ाते हैं। जानने योग्य महत्वपूर्ण बात आयुर्वेद कर सकता है: –इन्फेक्शन को कंट्रोल –इसे फैलने से रोकना –गंदगी को दूर करना –हड्डी की रक्षा करना लेकिन… कैविटी, जड़ों और दांतों के इनेमल के लिए आपको अभी भी डेंटिस्ट की ज़रूरत होगी (उन्हें निकलवाएं या कैप लगवाएं) वरना इन्फेक्शन बार-बार वापस आता रहेगा। सही देखभाल से, हम गंभीर समस्याओं को रोक सकते हैं। शुभकामनाएं डॉ. स्नेहल विधाते

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-Oral hygiene को मजबूत करें अभी आप दिन में 1 बार ब्रश कर रहे हैं — इसे बदलना बहुत ज़रूरी है: दिन में 2 बार ब्रश करें सुबह और रात को सोने से पहले Soft bristle brush Fluoride toothpaste ब्रश करते समय टूटे/सड़े दाँतों के आसपास बहुत हल्के हाथ से, लेकिन रोज़ साफ़ करें (गंदगी रुकी तो इन्फेक्शन बढ़ेगा) अगर संभव हो तो interdental brush या floss (हल्के से) -Provisional Diagnosis (Ayurveda): 👉 Danta Shoola (early stage) 👉 Krimi-janya Danta Roga 👉 Pitta-Kapha dushti 🧾 Rx 1️⃣ Gandusha / Kavala Triphala Kwath विधि: 1 चम्मच Triphala powder + 1 गिलास पानी, उबालकर आधा करें गुनगुना करके दिन में 2 बार (सुबह, शाम) ⏳ 15 दिन 2️⃣ Internal Medicines Cap. Gandhak Rasayan 1 capsule BD after meals ⏳ 15 दिन 👉 (Infection control, krimighna) OR (अगर capsule न मिले): Gandhak Rasayan vati 250 mg BD after food Triphala Guggulu 2 tablet BD after meals ⏳ 15 दिन 👉 (Inflammation + hidden infection) 3️⃣ Local Application Irimedadi Taila दाँतों व मसूड़ों पर हल्के से मालिश दिन में 2 बार 3–5 मिनट बाद थूक दें ⏳ 15 दिन 4️⃣ Optional (अगर सूजन ज़्यादा हो) Dashmool Kwath 20 ml + 20 ml गुनगुना पानी BD after meals ⏳ 7 दिन 🍽️ Pathya – Apathya Pathya (करें): ✔ गुनगुना पानी ✔ Soft भोजन ✔ खाने के बाद कुल्ला ✔ दिन में 2 बार दाँत साफ़ Apathya (न करें): ✘ बहुत मीठा ✘ ठंडा-गरम बार-बार ✘ सुपारी / तंबाकू ✘ टूटी साइड से चबाना ⚠️ Important Advice यह उपचार infection को शांत रखेगा, लेकिन root stumps / badly broken teeth का स्थायी समाधान extraction या dental procedure ही है Dental X-ray (IOPA/OPG) आवश्यक

Agr allopathic use Krna chahte ho - Mouthwash Alcohol-free chlorhexidine mouthwash दिन में 1 बार, 5–7 दिन से ज़्यादा नहीं ब्रश के 30 मिनट बाद इस्तेमाल करें ⚠️ लगातार लंबे समय तक न करें (दाँत काले पड़ सकते हैं) 🚫 इन चीज़ों से बचें बहुत मीठा चिपचिपा खाना उस साइड से चबाना जहाँ दाँत टूटे हैं सिगरेट / तंबाकू (अगर लेते हों)

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-Oralhygiene को मजबूत करें अभी आप दिन में 1 बार ब्रश कर रहे हैं — इसे बदलना बहुत ज़रूरी है: दिन में 2 बार ब्रश करें सुबह और रात को सोने से पहले Soft bristle brush Fluoride toothpaste ब्रश करते समय टूटे/सड़े दाँतों के आसपास बहुत हल्के हाथ से, लेकिन रोज़ साफ़ करें (गंदगी रुकी तो इन्फेक्शन बढ़ेगा) अगर संभव हो तो interdental brush या floss (हल्के से) -Provisional Diagnosis (Ayurveda): 👉 Danta Shoola (early stage) 👉 Krimi-janya Danta Roga 👉 Pitta-Kapha dushti 🧾 Rx 1️⃣ Gandusha / Kavala Triphala Kwath विधि: 1 चम्मच Triphala powder + 1 गिलास पानी, उबालकर आधा करें गुनगुना करके दिन में 2 बार (सुबह, शाम) ⏳ 15 दिन 2️⃣ Internal Medicines Cap. Gandhak Rasayan 1 capsule BD after meals ⏳ 15 दिन 👉 (Infection control, krimighna) OR (अगर capsule न मिले): Gandhak Rasayan vati 250 mg BD after food Triphala Guggulu 2 tablet BD after meals ⏳ 15 दिन 👉 (Inflammation + hidden infection) 3️⃣ Local Application Irimedadi Taila दाँतों व मसूड़ों पर हल्के से मालिश दिन में 2 बार 3–5 मिनट बाद थूक दें ⏳ 15 दिन 4️⃣ Optional (अगर सूजन ज़्यादा हो) Dashmool Kwath 20 ml + 20 ml गुनगुना पानी BD after meals ⏳ 7 दिन 🍽️ Pathya – Apathya Pathya (करें): ✔ गुनगुना पानी ✔ Soft भोजन ✔ खाने के बाद कुल्ला ✔ दिन में 2 बार दाँत साफ़ Apathya (न करें): ✘ बहुत मीठा ✘ ठंडा-गरम बार-बार ✘ सुपारी / तंबाकू ✘ टूटी साइड से चबाना ⚠️ Important Advice यह उपचार infection को शांत रखेगा, लेकिन root stumps / badly broken teeth का स्थायी समाधान extraction या dental procedure ही है Dental X-ray (IOPA/OPG) आवश्यक

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आपके दांतों में काफी ज्यादा कैविटी और दो दांतों की RCT के बाद सिर्फ जड़ और थोड़ा क्राउन बचा है। अभी दर्द नहीं है, इसका मतलब यह नहीं कि संक्रमण नहीं है। ऐसे दांतों में अंदर साइलेंट इन्फेक्शन रह सकता है, जो आगे चलकर सूजन, पस, या हड्डी को नुकसान कर सकता है। आयुर्वेद से संक्रमण को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह खराब दांत अक्सर निकालना ही सुरक्षित रहता है (यह बात ध्यान रखें)। संक्रमण कंट्रोल करने के आयुर्वेदिक उपाय गण्डूष / ऑयल पुलिंग रोज सुबह खाली पेट तिल का तेल या नारियल तेल – 1 बड़ा चम्मच 5-10 मिनट मुंह में घुमाएं थूक दें, निगलना नहीं बैक्टीरिया कम करता है मसूड़ों को मजबूत करता है त्रिफला काढ़ा कुल्ला दिन में 2 बार 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण 1 गिलास पानी में उबालें गुनगुना होने पर कुल्ला करें संक्रमण और सड़न कम करता है मसूड़ों की सूजन कम करता है लवंग तेल (Clove oil) प्रभावित दांत पर रुई में 1 बूंद लगाकर दिन में 1-2 बार रखें एंटीसेप्टिक संक्रमण बढ़ने से रोकता है आंतरिक दवाएं (साधारण और सुरक्षित विकल्प) खदिरादि वटी 2 गोली दिन में 3 बार चूसें त्रिफला गुग्गुल 1-1 गोली दिन में 2 बार भोजन के बाद संक्रमण कम करता है मसूड़े और हड्डी को मजबूत करता है खान-पान सावधानी ज्यादा मीठा, ठंडा, चिपचिपा खाना बंद करें सॉफ्ट ड्रिंक, ज्यादा चाय-कॉफी कम करें नीम दातुन गुनगुना पानी कैल्शियम युक्त भोजन

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आपकी बात समझना जरूरी है क्योंकि दांत में दर्द न होना यह साबित नहीं करता कि अंदर संक्रमण नहीं है खासकर जब दांत काफी हद तक सड़ चुके हों और केवल जड़ या थोड़ा सा हिस्सा ही बचा हो ऐसे दांत अक्सर बिना दर्द के अंदर से इंफेक्शन फैलाते रहते हैं और आगे चलकर मसूड़ों हड्डी साइनस और शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित कर सकते हैं संक्रमण से बचाव के लिए सबसे पहले मुंह की सफाई को मजबूत करना बहुत जरूरी है दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना शुरू करें और रात को सोने से पहले ब्रश करना कभी न छोड़ें हर भोजन के बाद गुनगुने पानी से कुल्ला करें ताकि खाना दांतों में फंसा न रहे मसूड़ों में सूजन और खून की सप्लाई बेहतर रखने के लिए हल्के हाथ से मसूड़ों की मालिश भी करें आयुर्वेद की दृष्टि से रोज सुबह या रात को तिल के तेल या नारियल तेल से पांच से सात मिनट तक ऑयल पुलिंग करें और फिर थूक दें इससे मुंह के बैक्टीरिया कम होते हैं और मसूड़ों की सूजन में राहत मिलती है सप्ताह में एक दो बार त्रिफला चूर्ण या नीम की छाल के काढ़े से कुल्ला करना भी संक्रमण को कंट्रोल करने में मदद करता है अगर मसूड़ों में लालिमा या सूजन है तो लवंग का तेल बहुत हल्की मात्रा में रुई से सिर्फ मसूड़ों पर लगाया जा सकता है लेकिन जड़ के अंदर कुछ भी डालने से बचें क्योंकि इससे नुकसान हो सकता है बहुत ठंडा बहुत गर्म मीठा या चिपचिपा भोजन इन दांतों से चबाने से बचें क्योंकि इससे छुपा हुआ संक्रमण अचानक सक्रिय हो सकता है

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Hi, If multiple teeth have deep cavities and some RCT-treated teeth are badly decayed with only roots remaining, infection can still be present even if there is no pain. Ayurveda can help control infection, reduce inflammation, and support gum strength. 1) Kalak Churna - 1/4 tsp - twice a day after food with water. Also can be used for Kawal and gandush 2) Gum Care Tooth Powder Use twice daily for brushing instead of regular toothpaste. 3) Amrita Dentone Tooth Powder Useful for maintaining oral hygiene, reducing plaque, and supporting gum health 4) Oil Pulling (Gandusha / Kavala therapy) Daily oil pulling with sesame oil or medicated oil helps reduce bacteria, inflammation, and bad breath. Take 1 tablespoon oil, swish for 5–10 minutes in morning before brushing and spit out. Tongue scraping daily to remove toxins. Warm water gargle or Triphala decoction. Neem or herbal tooth cleaning practices for gum strengthening. Diet & lifestyle precautions - Avoid excessive sugar, sticky sweets, cold drinks, and frequent snacking. Avoid chewing from affected side. Maintain good digestion (Agni) — oral health is closely linked with digestive health. Drink warm water and maintain regular oral hygiene. Even without pain, root-only teeth may harbor hidden infection. Please consult a dental surgeon to assess whether restoration or extraction is required. Ayurveda helps control infection and support healing but cannot rebuild lost tooth structure.

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गिलोय-नीम-तुलसी जूस अच्छी शुरुआत है (एंटीवायरल + इम्यूनिटी), लेकिन नसों के दर्द के लिए मजबूत शांत करने वाली दवा चाहिए। ✓तुरंत राहत के लिए प्लान (आज से शुरू) दवाइयाँ हरिद्राखंड – 5–10 gm रात को गुनगुने पानी से (सबसे मजबूत एंटी-हर्पेटिक और जलन/खुजली कम करने वाली) कैशोर गुग्गुलु – 2 गोली दिन में 2 बार खाने के बाद (पित्त और नसों की सूजन कम करता है) जटामांसी चूर्ण – 1–2 gm रात को गुनगुने पानी या दूध से (नसों को शांत करने में बहुत अच्छा, जलन कम) अश्वगंधा लेह्यम – 5 gm रात को गुनगुने दूध से (नसों का दर्द और थकान कम – कम डोज सुरक्षित) ✓लोकल केयर (दिन में 2 बार – जरूरी) जट्यादि घृत या नीम तेल + नारियल तेल – प्रभावित जगह पर हल्का लगाएं गुनगुने पानी से धोने के बाद (जलन कम और घाव जल्दी ठीक) गुनगुना नमक पानी सेंक – 10 मिनट दिन में 2 बार (नसों की जलन कम) ✓डाइट खाएं: मूंग खिचड़ी + घी, अनार, नारियल पानी, उबली लौकी पूरी तरह बंद: मसालेदार/खट्टा, लहसुन-प्याज, फर्मेंटेड, तला-भुना, शराब, नॉन-वेज ✓रोजाना गुनगुना पानी दिनभर पिएं (2.5–3 लीटर) अनुलोम-विलोम 10 मिनट (नसों को शांत करता है और एंग्जाइटी कम) नींद 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सख्त ✓जरूरी अगर जलन बढ़े, फफोले वापस आएं, बुखार आए या दर्द असहनीय हो जाए → तुरंत डर्मेटोलॉजिस्ट/इन्फेक्शस स्पेशलिस्ट से मिलें (सेकेंडरी इन्फेक्शन हो सकता है)। डॉ. गुरसिमरन जीत सिंह MD पंचकर्म

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Stage of cavity formation Stage 1: Once plaque forms, the tooth’s hard outer surface wears off. Stage 2: After attacking the outer surface, the acid and bacteria make their way to the next layer of the tooth, a softer substance called dentin. Stage 3: Bacteria and plaque continue to dama the tooth. At an advanced stage, the decay starts reach the pulp and root of the tooth.Ayurvedic treatment for tooth cavities: Take a holistic approach According to Ayurveda, ahara-vihar (diet and lifestyle) are important to leading a physically healthy lifestyle and dental health is no exception. The prevention and management of tooth cavities involve a combination of ayurvedic medicine (aushadhi), diet changes (ahar) and lifestyle changes (vihar). Diet (ahar) recommendations: Reduce intake of sugary foods and drinks. Rinse mouth after eating something sweet. • Eat foods that are rich sources of calcium. • Eat plenty of raw vegetables and fruits. Fibrous fruits and vegetables help clean your teeth and increase salivation, which can neutralise the acids left behind in your mouth.Lifestyle (vihar) recommendations) • Maintain good oral hygiene. Besides brushing your teeth twice a day, floss your teeth regularly Gargle with salt water to prevent tooth decay its progression to tooth abscess Avoid smoking and drinking since they contribute to dental problems.Oil Pulling - Oil Pulling makes a place in both prevention as well as remedies as it can help in cases of before and after for tooth prevention and tooth decay. • Garlic, clove, salt or turmeric - When it comes to home remedies, the list is endless. Garlic has this anti- inflammatory properties, clove helps to eliminate pain, and salt and turmeric works as antiseptic to disinfect the area. • Cinnamon oil, Lemon oil, Tea tree oil - Each with anti-inflammatory and anti- bacterial properties helps in alleviating pain and discomfort from the tooth area and helps in preventing gum decay. • Fluoride Toothpaste - By hardening the enamel and promoting layers of enamel, fluoride toothpaste helps in creating a wall which is resistant to acid and bacterias.Treatments for Tooth Decay and Cavities It is equally important to know the Tooth Decay and cavity treatments because when Preventions and Remedies don’t work, the final take is Treatment. • Fluoride Treatment - Fluoride plays a big role when it comes to oral hygiene, may it for prevention, remedies, or treatments. At the early stage of tooth decay, the doctors can suggest Fluoride treatment in form of toothpaste or mouthwash or treatments at clinic. • Filling - The most common treatment is filling the area of hole where cavity is caused. Dentists can drill out the decayed material and fill the hole, either in form of silver amalgam, composite resin, ceramic filling or gold. • Root Canal - If decay are not caught in early stage, and the decay reaches the tooth nerve, root canal is the option

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This will help you prevent further development of cavities and other infections. Existing cavities cannot be cured. 1.Use Arimeda Taila - Oil pulling in early morning empty stomach for 10-15 minutes, daily 2.Do Anu taila nasya - 2 drops in each nostril, earling morning in empty stomach (do it before 8am) for 14 days. Maintain a proper hygiene by cleansing the mouth after any food. Hope your Ca levels and Vit. D is in normal range and not suffering from any other systemic infection.

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HELLO, WHAT’S GOING ON INSIDE? 1) CAVITIES(dental caries) -they are tiny holes in your teeth caused by bacteria -bacteria feed on sugars and produce acid-> acid dissolves tooth enamel-> cavities form -if untreated, the decay can reach the inner pulp(nerve) -> pain, infection->root canal or extraction may be needed. 2) SENSITIVITY -can be due to exposed dentin, old filling leakage, or nerve inflammation -if the pulp(nerve) mildly inflamed but not infected, it may still respond to healing. In Ayurveda, dental diseases come under -Danta roga(tooth diseases) and dantamoola roga(gum root diseases) -usually caused by kapha-vata imbalance, accumulation of Ama(toxins), and weak rasa dhatu(body fluids/nutrition) MAIN PATHOLOGY -poor digestion-> ama accumulation->settles in mouth/gums-> bacteria thrive->dental decay -vata imbalance-> dryness, pain, sensitivity -kapha imbalance-> mucus, plaque, swelling -rasa dhatu deficiency-> weak immunity, poor remineralisation TREATMENT GOALS -Stop decay=oral hygiene, herbal powders, dietary detox -heal sensitivity= oil pulling, nerve calming medications -avoid root canal= prevent pulp infection with internal support -rebuild immunity= rasayana herbs, better nutrition INTERNAL TREATMENT 1) TRIPHALA GUGGULU= 1 tab after meals twice daily for 3 months = help reduce gum swelling , clear infection 2) AROGYAVARDHINI VATI= 1 tab after meals twice daily for 3 months =supports fatty liver healing, clears skin and oral toxins 3) GANDHAK RASAYANA= 1 tab twice daily after meals for 2 months =prevents pus/infection promotes healing 4) KHADIRADI VATI= 1 tab to chew slowly after meals for 4 weeks =antiseptic and healing for gums/throat 5) TRIKATU CHURNA= 1 pinch with honey before meals for 1 month =strengthens digestive fire to prevent further decay EXTERNAL TREATMENT(mouth, teeth, gums) 1) OIL PULLING(Gandusha)= 1 tbsp sesame oil swish for 5-10 min, spit daily morning =reduces bacteria, heals gums, desensitises teeth 2)CLOVE OIL= apply 1 drop on cotton to painful/sensitive tooth twice daily =pain relief. anti bacteria 3)DASHANA SAMSKARA CHURNA= use as a tooth powder, brush gently twice daily =Strengthens teeth, removes plaque 4) TRIPHALA DECOCTION= boil 1 tsp triphala in 1 cup water->use as mouthwash twice daily =anti-inflammatory, detox for gums 5)ARIMEDADI TAILA= medicated oil for gum massage or swishing once daily =strengthens teeth, heals bleeding gums FOODS TO INCLUDE -warm, soft, easy to digest foods -homemade khichdi, vegetables soups -cow ghee 1 tsp daily - cooked vegetables- Bottle gourd, pumpkin, spinach, carrots - turmeric, cumin, ajwain, coriander -herbal teas(ginger, tulsi, triphala) - soaked almonds (2-3), sesame seeds AVOID -sugar, sweets, cold drinks -bakery, chips, packages food -sour foods- vinegar, pickle, curd at night -very spicy food -late night eating -smoking, alcohol YOGA ASANAS -Mandukasana= good for liver -Paschimottanasana= detox, improves digestion -Bhujangasana= improves blood flow to oral region -Ustrasana= enhances prana flow to head/neck PRANAYAM -Anulom vilom= Balances Vata, improves nerve healing -Bhramari= relieves head, jaw tension -Kapalbhati= improves liver function, reduces ama(toxin) Practice yoga early morning on an empty stomach or 2-3 hours after food HOME REMEDIES 1) salt+mustard oil gum massage= strengthens gums 2) Neem bark brushing= anti-bacterial 3) Black sesame seeds= chew 1/2 tsp daily to strengthen teeth 4) Apply turmeric paste+ clove powder= on painful area 5) MULETHI= rub on teeth or use powder 6) Boil guava leaves or mango leaves- use as mouth rinse YES, IT IS POSSIBLE TO -heal sensitivity and early cavities with ayurvedic and natural care -support your liver and digestion to prevent further damage -overcome dental anxiety through gentle, natural methods But this requires -consistency in your oral and internal care -cleaning eating and avoiding triggers(sugar, cold drinks, stress) FOR YOUR MOTHER CASE KINDLY VISIT DENTIST DO FOLLOW HOPE THIS MIGHT BE HELPFUL THANK YOU DR. MAITRI ACHARYA

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नमस्ते, अंदर क्या हो रहा है? 1) कैविटीज़ (दांतों की सड़न) -ये आपके दांतों में बैक्टीरिया की वजह से होने वाले छोटे-छोटे छेद होते हैं -बैक्टीरिया चीनी खाते हैं और एसिड बनाते हैं -> एसिड दांतों के इनेमल को घोल देता है -> कैविटीज़ बन जाती हैं -अगर इलाज न किया जाए, तो सड़न अंदरूनी पल्प (नस) तक पहुँच सकती है -> दर्द, इन्फेक्शन -> रूट कैनाल या दांत निकालना पड़ सकता है। 2) सेंसिटिविटी -यह खुले डेंटिन, पुरानी फिलिंग में लीकेज, या नस में सूजन के कारण हो सकती है -अगर पल्प (नस) में हल्की सूजन है लेकिन इन्फेक्शन नहीं है, तो यह ठीक हो सकता है। आयुर्वेद में, दांतों की बीमारियां इसके अंतर्गत आती हैं -दंत रोग (दांतों की बीमारियां) और दंतमूल रोग (मसूड़ों की जड़ों की बीमारियां) -आमतौर पर कफ-वात असंतुलन, अमा (टॉक्सिन्स) के जमाव, और कमजोर रस धातु (शारीरिक तरल पदार्थ/पोषण) के कारण होता है मुख्य पैथोलॉजी -खराब पाचन -> अमा का जमाव -> मुंह/मसूड़ों में जम जाता है -> बैक्टीरिया पनपते हैं -> दांतों का सड़ना -वात असंतुलन -> सूखापन, दर्द, संवेदनशीलता -कफ असंतुलन -> बलगम, प्लाक, सूजन -रस धातु की कमी -> कमजोर इम्यूनिटी, खराब रीमिनरलाइजेशन इलाज के लक्ष्य -सड़न रोकना = मुंह की सफाई, हर्बल पाउडर, आहार डिटॉक्स -संवेदनशीलता ठीक करना = ऑयल पुलिंग, नसों को शांत करने वाली दवाएं -रूट कैनाल से बचना = आंतरिक सहायता से पल्प इन्फेक्शन को रोकना -इम्यूनिटी को फिर से बनाना = रसायन जड़ी-बूटियां, बेहतर पोषण आंतरिक उपचार 1) त्रिफला गुग्गुलु = 1 गोली भोजन के बाद दिन में दो बार 3 महीने के लिए = मसूड़ों की सूजन कम करने, इन्फेक्शन साफ ​​करने में मदद करता है 2) आरोग्यवर्धिनी वटी = 1 गोली भोजन के बाद दिन में दो बार 3 महीने के लिए = फैटी लिवर को ठीक करने में मदद करता है, त्वचा और मुंह के टॉक्सिन्स को साफ करता है 3) गंधक रसायन = 1 गोली दिन में दो बार भोजन के बाद 2 महीने के लिए = मवाद/इन्फेक्शन को रोकता है, उपचार को बढ़ावा देता है 4) खदिरादि वटी = 1 गोली भोजन के बाद धीरे-धीरे चबाएं 4 सप्ताह के लिए = मसूड़ों/गले के लिए एंटीसेप्टिक और उपचारक 5) त्रिकटु चूर्ण = 1 चुटकी शहद के साथ भोजन से पहले 1 महीने के लिए = आगे सड़न को रोकने के लिए पाचन अग्नि को मजबूत करता है बाहरी उपचार (मुंह, दांत, मसूड़े) 1) ऑयल पुलिंग (गंडूषा) = 1 बड़ा चम्मच तिल का तेल 5-10 मिनट तक मुंह में घुमाएं, रोजाना सुबह थूक दें = बैक्टीरिया कम करता है, मसूड़ों को ठीक करता है, दांतों की संवेदनशीलता कम करता है 2) लौंग का तेल = दर्द वाले/संवेदनशील दांत पर रुई पर 1 बूंद लगाकर दिन में दो बार लगाएं = दर्द से राहत। एंटी बैक्टीरिया 3) दशना संस्कार चूर्ण = टूथ पाउडर के रूप में इस्तेमाल करें, दिन में दो बार धीरे-धीरे ब्रश करें =दांतों को मजबूत बनाता है, प्लाक हटाता है 4) त्रिफला काढ़ा = 1 कप पानी में 1 चम्मच त्रिफला उबालें -> दिन में दो बार माउथवॉश के रूप में इस्तेमाल करें =सूजन-रोधी, मसूड़ों के लिए डिटॉक्स 5) अरिमेदादि तेल = मसूड़ों की मालिश या कुल्ला करने के लिए औषधीय तेल, दिन में एक बार =दांतों को मजबूत बनाता है, खून बहने वाले मसूड़ों को ठीक करता है शामिल करने वाले खाद्य पदार्थ -गर्म, नरम, आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ -घर की बनी खिचड़ी, सब्जियों का सूप -गाय का घी 1 चम्मच रोज़ -पकी हुई सब्जियां- लौकी, कद्दू, पालक, गाजर -हल्दी, जीरा, अजवाइन, धनिया -हर्बल चाय (अदरक, तुलसी, त्रिफला) -भिगोए हुए बादाम (2-3), तिल के बीज बचने वाली चीजें -चीनी, मिठाइयां, कोल्ड ड्रिंक्स -बेकरी, चिप्स, पैकेट वाला खाना -खट्टी चीजें- सिरका, अचार, रात में दही -बहुत ज़्यादा मसालेदार खाना -देर रात खाना -धूम्रपान, शराब योग आसन -मंडूकासन = लीवर के लिए अच्छा है -पश्चिमोत्तानासन = डिटॉक्स, पाचन में सुधार करता है -भुजंगासन = मुंह के क्षेत्र में रक्त प्रवाह में सुधार करता है -उष्ट्रासन = सिर/गर्दन में प्राण प्रवाह बढ़ाता है प्राणायाम -अनुलोम विलोम = वात को संतुलित करता है, तंत्रिका उपचार में सुधार करता है -भ्रामरी = सिर, जबड़े के तनाव से राहत देता है -कपालभाति = लीवर के कार्य में सुधार करता है, अमा (विष) को कम करता है सुबह खाली पेट या खाने के 2-3 घंटे बाद योग का अभ्यास करें घरेलू उपचार 1) नमक + सरसों के तेल से मसूड़ों की मालिश = मसूड़ों को मजबूत बनाता है 2) नीम की छाल से ब्रश करना = एंटी-बैक्टीरियल 3) काले तिल = दांतों को मजबूत बनाने के लिए रोज़ 1/2 चम्मच चबाएं 4) हल्दी का पेस्ट + लौंग का पाउडर लगाएं = दर्द वाली जगह पर 5) मुलेठी = दांतों पर रगड़ें या पाउडर का इस्तेमाल करें 6) अमरूद के पत्ते या आम के पत्ते उबालें - माउथ रिंस के रूप में इस्तेमाल करें हाँ, यह संभव है -आयुर्वेदिक और प्राकृतिक देखभाल से संवेदनशीलता और शुरुआती कैविटी को ठीक करना -आगे के नुकसान को रोकने के लिए अपने लीवर और पाचन को सहारा देना -कोमल, प्राकृतिक तरीकों से दांतों की चिंता को दूर करना लेकिन इसके लिए आवश्यकता है -आपकी निरंतरता ओरल और इंटरनल केयर -खाने की सफाई और ट्रिगर्स से बचना (चीनी, कोल्ड ड्रिंक्स, स्ट्रेस) ज़रूर फॉलो करें उम्मीद है यह मददगार होगा धन्यवाद डॉ. मैत्री आचार्य

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Gabriella
3 घंटे पहले
Super helpful response! Starting a new exercise routine this week and feeling hopeful with the advice given. Thanks a ton!
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Akash
4 घंटे पहले
Very very thanks mam 🙏 thanks for valuable advice me and right suggestions 😀
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Henry
4 घंटे पहले
Thanks for the practical advice! The tips on lifestyle changes and ayurvedic treatments really helped clear things up for me. 😊
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Jaxon
11 घंटे पहले
Thanks! Your response was simple and straight to the point. Really needed that reassurance about using those remedies. Feeling more at ease now.
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