What to do for persistent joint and back pain after excessive masturbation during teenage years? - #56431
सर मैं बचपन में 13 14 साल की उम्र से 20 से 21 साल की उम्र तक बहुत ज्यादा हस्तमैथुन किया था जिसके कारण मुझे वर्तमान में लगभग 8 से 10 वर्षों से लगातार अभी तक यह समस्याएं आ रही है 1.कमर में बहुत ज्यादा दर्द होता है, 10 मिनट से ज्यादा खडा रह नहीं पाता हूँ। रीढ की हड्डी में दर्द है, सोते समय दाये बायें करवट बदलने पर रीढ की हड्डी से कट कट की आवाज आती है। 2.घुटने में बहुत दर्द होता है, कट कट की आवाज आती है, बैठ जाता हूँ तो घुटने में दर्द के कारण खडा नहीं हुआ जाता है, नाही चला जाता है, सीढ़ी चढने में दर्द होता है। 3. कंधे में असहनीय दर्द होता है रात को नीद नही आती हैं, और कट कट की आवाज के साथ में सारी कंधे की हड्डी में आपस में घर्षण हो रहा है। 4. गर्दन में बहुत दर्द होता है, गर्दन दाये बायें घुमाने पर कट कट की आवाज आती है, आगे पीछे गर्दन झुकाने पर दर्द होता है, 5. कोहनी में कट कट की आवाज के साथ दर्द होता है, शरीर के सभी जोडों में दर्द होता है, हड्डी में भी दर्द होता है। 6. हाथ पैरों की मसल्स में दर्द, सिर दर्द में आखं की ऊपर भोहों में दर्द, 7. पेट खराब रहता है, यादाश्त कमजोर, चीजें और दोस्तों के नाम भूल जाता हूँ,।सीढ़ी चढ़ने में दर्द होता है घुटनों में और उतरते समय घुटनों में दर्द होता है उतरा नहीं जाता और सुबह जगने समय उठने बैठने से चलने में दिक्कत होती है पर मुड़ता नहीं है घुटने के यहां से और सुबह बाथरूम में बैठता हूं तो लेट्रिन करने के लिए तब घुटने से खड़ा नहीं हो सकता और खड़ा होने के बाद ऐसा लगता है घुटने बहुत ढीला ढीला है और उसमें आपस में हड्डी टकरा रही है और काम करने के बाद में बैठ जाता हूं तो उसके बाद उठने पर घुटने में बहुत दर्द होता है घुटने के यहां से पर मुड़ता नहीं है
How long have you been experiencing these joint and back pains?:
- More than 10 yearsHow would you describe the intensity of your pain?:
- Very severe — unbearableDo you notice any specific activities that worsen your pain?:
- Sitting for long periodsHave you experienced any other symptoms along with the pain?:
- FatigueHow is your digestion and appetite?:
- Chronic digestive problemsWhat is your sleep quality like?:
- Interrupted — wakes up frequentlyHave you tried any treatments or therapies for your condition before?:
- Consulted a doctor or specialistDoctors' responses
आपके द्वारा बताए गए लक्षण—कमर, गर्दन, कंधे, घुटने, कोहनी सहित लगभग सभी जोड़ों में दर्द, कट-कट की आवाज, मांसपेशियों में दर्द, थकान, खराब पाचन, कमजोर नींद और स्मरण शक्ति की कमी—आयुर्वेद की दृष्टि से मुख्यतः वात दोष की अत्यधिक वृद्धि (वात प्रकोप) तथा अस्थि एवं मज्जा धातु क्षीणता की ओर संकेत करते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल हस्तमैथुन को इन सभी समस्याओं का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। लंबे समय से चल रही समस्या में वात वृद्धि, कमजोर पाचन (अग्निमांद्य), पोषण की कमी, गलत दिनचर्या, तनाव तथा अन्य शारीरिक कारण भी शामिल हो सकते हैं। आयुर्वेदिक उपचार 1. वात शमन एवं जोड़ों के लिए योगराज गुग्गुलु – 2 गोली दिन में 2 बार भोजन के बाद गुनगुने पानी से। महायोगराज गुग्गुलु – यदि दर्द बहुत अधिक हो तो वैद्य की सलाह से। अश्वगंधा चूर्ण 3–5 ग्राम सुबह-शाम गुनगुने दूध के साथ। लाक्षादि गुग्गुलु 2 गोली दिन में 2 बार भोजन के बाद। 2. पाचन सुधारने के लिए त्रिफला चूर्ण 1 चम्मच रात को गुनगुने पानी के साथ। भोजन में अदरक, जीरा, अजवाइन का उचित प्रयोग करें। 3. बाह्य उपचार प्रतिदिन कमर, घुटनों, गर्दन और कंधों पर महानारायण तेल या धन्वंतरम तेल से 10–15 मिनट मालिश करें। मालिश के बाद हल्का गर्म सेक करें। आहार (Diet) गुनगुना पानी पिएं। दूध, घी, मूंग दाल, तिल, बादाम, खजूर का सेवन करें। ताजा एवं सुपाच्य भोजन लें। ठंडी चीजें, फ्रिज का पानी, फास्ट फूड, अधिक चाय-कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, देर रात जागना और बार-बार उपवास से बचें। दिनचर्या नियमित 7–8 घंटे की नींद लें। हल्का योग करें: मकरासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन (दर्द सहन होने पर)। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या खड़े रहने से बचें।
••आयुर्वेद के दृष्टिकोण से यह स्पष्ट रूप से प्रकुपित व्यान वायु और अस्थि-मज्जा गतः वात (Generalized Severe Vata Vyadhi) का मामला है। ••अति-हस्तमैथुन या अति-शुक्र क्षय से शरीर में ‘धातु क्षय’ (विशेषकर रस, रक्त, मंसा, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र) होता है। जब धातुएं क्षीण होती हैं, तो स्रोतों (Channels) में रिक्तता (Empty spaces) आ जाती है, जिससे वात दोष अत्यंत कुपित होकर अस्थि और संधियों (Joints) में आश्रय ले लेता है। हड्डियों और जोड़ों से ‘कट-कट’ (Crepitus) की आवाज आना ‘सन्धिगत वात’ में ‘स्फुटन’ और सन्धिशून्यता (लूब्रिकेशन/श्लेषक कफ की कमी) को दर्शाता है। ••चिकित्सा सूत्र (Line of Treatment) यहाँ हमारा मुख्य उद्देश्य वात शमन, अस्थि-मज्जा पोषण, अग्निदीपन और धातु पुष्टि होना चाहिए। क. आभ्यन्तर औषधि चिकित्सा (Oral Medications) वात शमन एवं अस्थि पोषक योग: ••लाक्षादि गुग्गुल या त्रयोदशांग गुग्गुल: 2-2 गोली सुबह-शाम गुनगुने जल या रास्नादि क्वाथ के साथ (अस्थि धातु को बल देने और शूल कम करने के लिए)। ••अश्वगंधा चूर्ण + शतावरी चूर्ण + बाबची/अर्जुन चूर्ण: समान मात्रा में मिलाकर, 3-5 ग्राम सुबह-शाम क्षीरपाक (Milk decoction) के रूप में लें। (यह धातु क्षय जन्य वात में परम हितकर है)। ••महारास्नादि काढ़ा या दशमूलक्वाथ: 20 ml बराबर मात्रा में गुनगुना पानी मिलाकर भोजन के बाद। मज्जा एवं वातवाहिनी नाड़ी बल के लिए (For Neuro-muscular strength & Memory): ••महावातविध्वंसन रस या एकांगवीर रस: 1-1 रत्ती (125 mg) सुबह-शाम शहद या मलाई के साथ। ••सारस्वतारिष्ट या शंखपुष्पी सीरप: 20 ml भोजन के बाद (स्मृतिभ्रंश और सिरदर्द/भोहों के दर्द के लिए)। कोठ शुद्धि एवं अग्निदीपन (For Digestion & Gut Health): चूंकि आपका पेट खराब रहता है, बिना अग्नि दीपन के घृत या भारी औषधियां ‘आम’ बनाएंगी। ••हिंग्वाष्टक चूर्ण या अग्नितुंडी वटी का प्रयोग भोजन के प्रथम ग्रास के साथ करें। ••रात को सोते समय गन्धर्वहस्त्यादि एरण्ड तेल (10-15 ml) गुनगुने दूध के साथ लें, जिससे अनुलोमन हो और मलबन्ध दूर हो। 2. बाह्य एवं पंचकर्म चिकित्सा (External & Panchakarma Therapies) धातु क्षय जन्य वात में केवल ओरल मेडिसिन काफी नहीं होगी, यहाँ ‘स्नेहन’ और ‘बृंहण’ की अत्यंत आवश्यकता है। अभ्यंग (Massage): पूरे शरीर पर, विशेषकर रीढ़ की हड्डी, घुटनों और कंधों पर महानारायण तेल, प्रसारिणी तेल या क्षरबला तेल को हल्का गुनगुना करके अनुलोम गति में अभ्यंग करें। स्थानान्तरिक बाह्य चिकित्सा: ••घुटनों के लिए: जानु बस्ति (Janu Basti) विद महानारायण तैल। ••गर्दन और पीठ के लिए: ग्रीवा बस्ति (Greeva Basti) और कटि बस्ति (Kati Basti)। ••बस्ति चिकित्सा (Gold Standard for Vata): आपके इस क्रॉनिक केस में ‘यापन बस्ति’ (जैसे मुस्तादि यापन बस्ति) या अनुवासन और आस्थापन का ‘कर्म/काल बस्ति’ क्रम (विशेषकर तिक्त क्षीर बस्ति - जो अस्थि क्षय में श्रेष्ठ है) किसी अच्छे पंचकर्म केंद्र में रहकर करवाना चमत्कारिक परिणाम दे सकता है। 3. आहार एवं विहार (Diet & Lifestyle) ••पथ्य (क्या खाएं): •स्निग्ध, मधुर, अम्ल और लवण रसात्मक आहार। •भोजन में गौ-घृत (Desi Cow Ghee) की मात्रा बढ़ाएं। यह वात शामक और मज्जा वर्धक है। •दूध में हल्दी और शिलाजीत (पिण्ड रूप) मिलाकर लें। •बादाम, अखरोट और कद्दू के बीज (Pumpkin seeds) को भिगोकर चबाएं। ••अपथ्य (क्या न करें): •रूखा, सूखा, बासी, तीखा (कटु, तिक्त, कषाय) भोजन बिल्कुल बंद कर दें। •शीतल जल, ठंडी हवा के संपर्क और रात को देर तक जागने (रात्रि जागरण से वात बढ़ता है) से बचें। ••वर्तमान में किसी भी प्रकार का भारी व्यायाम (Heavy weight lifting) न करें, केवल सूक्ष्म व्यायाम और प्राणायाम (अनुलोम-विलोम) करें।
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