एलोपैथिक दवा बंद करने के बाद कूल्हों पर फंगल इन्फेक्शन का इलाज कैसे करें? - #56808
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How long have you been experiencing the fungal infection?:
- More than 3 monthsHave you noticed any other symptoms associated with the infection?:
- ItchingWhat treatments have you tried for the fungal infection so far?:
- Only allopathic medicationHow is your overall health since the ankle fracture?:
- Good, no other issuesWhat is your diet like currently?:
- Balanced and nutritiousDo you have any known allergies or sensitivities?:
- Other allergiesHow would you describe your stress levels recently?:
- Low, feeling relaxedडॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
Hips par purane fungal daad (ringworm) jaisa infection ho to sirf Ayurvedic dava se hamesha poori tarah theek ho yeh zaroori nahi hai. Agar infection kai mahino se hai, to dermatologist ko dikhana uchit rahega. Take Gandhak Rasayan 2 tablets, din mein 2 baar bhojan ke baad. Khadirarishta 15 ml + 15 ml pani, din mein 2 baar bhojan ke baad. Nimbadi Taila ya Neem oil prabhavit jagah par din mein 2 baar lagayein. Savdhani: Jagah ko saaf aur sukha rakhein. Tight kapde aur adhik pasina se bachen. Tauliya, kapde alag rakhein.
••नमस्ते महेश जी, हिप्स (nitamba) पर लंबे समय से होने वाला फंगल इन्फेक्शन (जिसे आयुर्वेद में दद्रु कुष्ठ या साधारण भाषा में दाद कहा जाता है) एक कष्टदायक समस्या है। चूंकि यह काफी समय से है और एलोपैथिक दवाएं बंद होने के बाद दोबारा उभर सकता है, इसलिए इसे जड़ से खत्म करने के लिए आयुर्वेद में रक्त शोधक (Blood Purifiers) और कफ-पित्त नाशक चिकित्सा की जाती है। ••टखने के फ्रैक्चर (Ankle Fracture) को ध्यान में रखते हुए, यहां ऐसी सुरक्षित आयुर्वेदिक औषधियां बताई जा रही हैं जो आपके फ्रैक्चर की हीलिंग में भी बाधा नहीं डालेंगी और दाद को अंदर से ठीक करेंगी। ••मुख्य आंतरिक औषधियां (Oral Medicines) यह दवाएं शरीर से टॉक्सिन्स (आम दोष) को बाहर निकाल कर खून को साफ करती हैं: ••गंधक रसायन (Gandhak Rasayan): •मात्रा: 1-1 गोली (250 mg) दिन में दो बार। ••कैसे लें: हल्के गुनगुने पानी या शहद के साथ, खाना खाने के 30 मिनट बाद। यह त्वचा रोगों और फंगल इन्फेक्शन के लिए आयुर्वेद की सबसे मुख्य एंटी-माइक्रोबियल औषधि है। ••महामंजिष्ठादि काढ़ा (Mahamanjisthadi Kwath): •मात्रा: 15 से 20 ml काढ़ा। ••कैसे लें: इसमें बराबर मात्रा में (15-20 ml) गुनगुना पानी मिलाएं। दिन में दो बार, खाना खाने के बाद लें। यह एक बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर है जो त्वचा की खुजली और कालेपन को दूर करता है। ••आरोग्यवर्धिनी वटी (Arogyavardhini Vati): •मात्रा: 1-1 गोली दिन में दो बार। •कैसे लें: गुनगुने पानी के साथ। यह लीवर को डिटॉक्सिफाई करती है और पुरानी से पुरानी त्वचा की समस्याओं में दी जाती है। स्थानीय उपयोग के लिए (Local Application) जहां पर दाद है, वहां लगाने के लिए नीचे दी गई औषधियों का उपयोग करें: ••मरिच्यादि तेल (Marichyadi Taila): ••कैसे लगाएं: प्रभावित स्थान को अच्छे से साफ और सूखा करके, दिन में दो बार हल्के हाथ से इस तेल को लगाएं। यह खुजली और इन्फेक्शन को तुरंत दबाता है। ••टंकण भस्म और नारियल तेल: यदि खुजली बहुत ज्यादा हो, तो थोड़े से शुद्ध नारियल तेल में चुटकी भर टंकण भस्म (Tankan Bhasma) मिलाकर दाद वाली जगह पर लगाएं। ••खान-पान और परहेज (Pathya-Apathya) दाद जैसी फंगल समस्याओं में दवाओं से ज्यादा परहेज का महत्व होता है: ••क्या न खाएं: मीठा, मैदा, अत्यधिक नमक, खट्टी चीजें (दही, अचार, नींबू), उड़द की दाल, और ज्यादा मिर्च-मसालेदार भोजन पूरी तरह बंद कर दें। ••साफ-सफाई: प्रभावित हिस्से को सूखा रखें (पसीना न जमने दें)। हमेशा सूती (Cotton) और ढीले अंडरगारमेंट्स पहनें। कपड़ों को गर्म पानी में धोएं और धूप में अच्छे से सुखाएं।
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