जब आप पहले से एलोपैथिक दवाएं ले रहे हैं, अचानक उन्हें बंद करना लाभकारी नहीं हो सकता। आपको धीरे-धीरे transition करनी चाहिए। पहले, Punarnavadi Mandur और Haridrakhand को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और एलोपैथिक दवाओं को धीरे-धीरे कम करके कुछ हफ्तों में समाप्त करें। आपको डॉक्टर की सलाह भी आवश्यक है।
Punarnavadi Mandur विशेष रूप से जलधारण और एनीमिया के लिए दी जाती है। यह रक्त को सुधारने और शरीर से अतिरिक्त पानी को निकालने में मदद करता है। Dashmoolarisht respiratory strength के लिए बहुत फायदेमंद है। यह बलगम को हटाने और फेफड़ों की ताकत बढ़ाने में सहायक है।
Haridrakhand आपकी एलर्जी और नासिका संबंधी समस्याओं के लिए उपयोगी है। इसमें हल्दी के तत्व होते हैं जो एंटी-इलर्जिक माने जाते हैं और सूजन कम करते हैं।
साँस की समस्या फेफड़े की कमजोरी और वात-कफ विकार दोनों से संबंधित हो सकती है। डायट के लिए, हल्की और पचने में आसान चीजें जैसे गरम पानी, शहद के साथ अदरक, लहसुन और त्रिकुटा (सौंठ, मिर्च, काली मिर्च) का सेवन करें। किसी भी ठंडे और भारी भोजन से बचें।
आवश्यक परीक्षण जैसे HRCT और PFT आपकी फेफड़ों की स्थिति को बेहतर समझने में मदद कर सकते हैं। यदि आपकी समस्याएं बढ़ती हैं, तो ये टेस्ट करवाना सही रहेगा। आपके लिए डॉक्टर से परामर्श करना भी आवश्यक है ताकि आप अपने वर्तमान स्थिति के अनुसार सही दिशा में जा सकें।
आयुर्वेदिक उपाय और चिकित्सा धीरे-धीरे सहायक होते हैं, इसलिए धैर्य रखें और निरंतर प्रयास करें। यह भी याद रखें की हर किसी का शरीर अलग होता है और प्रतिक्रिया देने का तरीका भी। ध्यानपूर्वक डॉक्टर और उनके सलाह का पालन करें।



