70 साल के व्यक्ति में मोटापा और कब्ज के साथ हाई ब्लड प्रेशर और सांस फूलने का इलाज कैसे करें? - #56435
मेरी उम्र 70 वर्ष की है, मेरा वजन करीब 100 किलो ग्राम है, मेरा ब्लडप्रेशर बढा हुआ है, सीढी चढने या कुछ दूर पैदल चलने मे सांस फूलने लगती है, पसीना बहुत होता है, थकान कमजोरी ज्यादा महसूस होती है, कब्ज की शिकायत पुरानी है, पेट की चर्बी बहुत बढी है, पेट साफ का प्रेशर दिन मे 12 बजे के बाद ही बनता है, अक्सर दिन मे एक टाइम ही फ्रेस होता हूं कभी कभार रात मे फ्रेश होता हुं। मेदोहर गुग्गलू ले सकता हूं तो मात्राऔर तरीका क्या होगा। उचित मार्गदर्शन करे।
डॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
आपके द्वारा बताए गए लक्षण—उच्च रक्तचाप (High BP), मोटापा (लगभग 100 किग्रा), सीढ़ी चढ़ने पर सांस फूलना, अत्यधिक पसीना, थकान, कमजोरी, पुरानी कब्ज और पेट की बढ़ी हुई चर्बी—आयुर्वेद की दृष्टि से मुख्यतः कफ-मेद वृद्धि, अग्निमांद्य तथा वात अवरोध की ओर संकेत करते हैं। आपकी आयु 70 वर्ष है, आयुर्वेदिक दृष्टिकोण आपकी समस्या का मूल कारण केवल वजन बढ़ना नहीं है, बल्कि मेद धातु की अधिकता, पाचन शक्ति की कमजोरी तथा शरीर में स्रोतसों (शारीरिक मार्गों) का अवरोध भी हो सकता है। इससे BP बढ़ना, सांस फूलना, आलस्य, पसीना अधिक आना और कब्ज जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। क्या मेदोहर गुग्गुलु ले सकते हैं? हाँ, सामान्यतः मेदोहर गुग्गुलु मोटापा, बढ़ी हुई चर्बी और कफ-मेद विकारों में उपयोगी मानी जाती है। सामान्य मात्रा: 2 गोली दिन में 2 बार भोजन के बाद गुनगुने पानी के साथ अवधि: 2–3 महीने कब्ज के लिए कब्ज आपकी कई समस्याओं को बढ़ा सकती है। रात्रि में सोते समय: 1–2 चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें। या आवश्यकता अनुसार हल्की मात्रा में पंचसकार लिया जा सकता है। आहार संबंधी सुझाव क्या खाएं? गुनगुना पानी दिनभर थोड़ा-थोड़ा पीएं। हरी सब्जियां, सलाद, लौकी, तोरी, परवल, करेला आदि। मूंग दाल, जौ, पुराना गेहूं, ओट्स। सुबह खाली पेट गुनगुना पानी। क्या कम करें? मिठाई, चीनी, मैदा, तली हुई चीजें। अधिक चावल, आलू, नमकीन, कोल्ड ड्रिंक। रात में भारी भोजन। दिनचर्या सुबह और शाम 20–30 मिनट अपनी क्षमता अनुसार टहलें। भोजन के तुरंत बाद न सोएं। पर्याप्त नींद लें। तनाव कम रखने का प्रयास करें।
••प्रणाम। आपके द्वारा बताए गए सभी लक्षण—जैसे वजन का अधिक होना (100 किलोग्राम), पेट पर चर्बी का बढ़ना, सांस फूलना, अत्यधिक पसीना, थकान, कमजोरी और पुरानी कब्ज—आयुर्वेद के दृष्टिकोण से ‘स्थौल्य रोग’ (Obesity) और ‘मेदोवृद्धि’ (शरीर में अत्यधिक फैट का संचय) की ओर संकेत करते हैं। ••आपकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए यहाँ मेदोहर गुग्गुलु और अन्य आवश्यक औषधियों के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन दिया जा रहा है: 1. मेदोहर गुग्गुलु (Medohar Guggulu) का सेवन: मात्रा और तरीका ••जी हाँ, आप मेदोहर गुग्गुलु का सेवन कर सकते हैं। यह शरीर के अतिरिक्त मेद (फैट) को पिघलाने, चयापचय (Metabolism) को सुधारने और बढ़े हुए वजन को नियंत्रित करने में बहुत प्रभावी है। •मात्रा: 1-1 गोली (tablet) दिन में दो बार। •समय: सुबह और शाम को भोजन करने के आधे घंटे बाद। •अनुपान (किसके साथ लें): इसे हमेशा हल्के गुनगुने पानी के साथ ही लें। ••विशेष सावधानी: गुग्गुलु युक्त दवाएं थोड़ी उष्ण (गर्म) प्रकृति की होती हैं और ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इसकी शुरुआत शुरुआत में कम मात्रा (1-1 गोली) से ही करें और अपने ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करते रहें। 2. पुरानी कब्ज और पेट साफ न होने का समाधान आयुर्वेद में माना जाता है कि जब तक पेट साफ नहीं होगा (कोष्ठ शुद्ध नहीं होगा), तब तक वजन कम करना और कमजोरी दूर करना संभव नहीं है। दिन में 12 बजे के बाद प्रेशर बनना अपान वायु और वात दोष के असंतुलन को दर्शाता है। ••त्रिफला चूर्ण (Triphala Churn): रात को सोते समय 1 चम्मच (लगभग 3-5 ग्राम) त्रिफला चूर्ण एक गिलास गुनगुने पानी के साथ लें। यह आपकी आंतों को ताकत देगा, पुरानी कब्ज को दूर करेगा और सुबह पेट समय पर साफ होने लगेगा। ••यदि कब्ज बहुत ज्यादा पुरानी और कड़क है, तो त्रिफला के स्थान पर ‘एरण्ड भृष्ट हरीतकी’ (Gandharva Haritaki) की 1 से 2 गोली रात को गुनगुने पानी से ली जा सकती है। 3. सांस फूलना, पसीना और कमजोरी के लिए 100 किलो वजन होने के कारण हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सांस फूलती है और थकान होती है। ••अर्जुनारिष्ट (Arjunarishta): यह एक बेहतरीन कार्डियो-प्रोटेक्टिव (हृदय को बल देने वाली) औषधि है, जो बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को संतुलित करने और सांस फूलने की समस्या में राहत देने में मदद करेगी। ••मात्रा: 15-20 ml (लगभग 3-4 चम्मच) अर्जुनारिष्ट में उतनी ही मात्रा में (15-20 ml) गुनगुना पानी मिलाकर दोपहर और रात के भोजन के बाद लें। 4. आहार और जीवनशैली में जरूरी बदलाव दवाइयों से भी ज्यादा जरूरी आपके लिए सही खान-पान और दिनचर्या का पालन करना है: ••गुनगुना पानी: दिनभर में जब भी प्यास लगे, केवल और केवल हल्का गुनगुना पानी ही पिएं। यह शरीर के ‘आम’ (टॉक्सिन्स) और चर्बी को पचाने में मदद करता है। ••हल्का और सुपाच्य भोजन: भोजन में पुरानी कनक (गेहूं), जौ (Barley), मूंग की दाल, लौकी, तोरई, कद्दू और परवल जैसी हरी सब्जियों को शामिल करें। रात का भोजन हमेशा हल्का रखें (जैसे मूंग की दाल की खिचड़ी या दलिया) और शाम 7-8 बजे तक अवश्य कर लें। ••इनसे पूरी तरह परहेज करें: मैदा, तली-भुनी चीजें, अत्यधिक घी-तेल, मिठाई, आलू, चावल, फास्ट फूड और फ्रिज का ठंडा पानी पूरी तरह बंद कर दें। भोजन के तुरंत बाद लेटने या सोने की आदत (दिवास्वप्न) से बचें। ••हल्का व्यायाम: चूंकि आपका वजन अधिक है और सांस फूलती है, इसलिए कोई भारी व्यायाम न करें। सुबह और शाम को केवल 15-20 मिनट बहुत धीमी गति से पैदल चलें (Vajrasana या हल्के टहलें)। इसके साथ ही सुबह बैठकर 10-15 मिनट ‘अनुलोम-विलोम’ प्राणायाम जरूर करें, इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और ब्लड प्रेशर सामान्य रहने लगेगा।
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