••Aamvata (जिसकी तुलना आधुनिक चिकित्सा में Rheumatoid Arthritis से की जा सकती है) में चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य जोड़ों में जमे ‘Aama’ (toxic metabolic bi-product) को पचाना, उसे पिघलाना और शरीर से बाहर निकालना होता है। चूंकि आम (Aama) स्वभाव से आमावस्था (अपक्व) में होता है, इसलिए शुरुआत में सीधे शोधन या भारी दवाइयां देने के बजाय ‘Aam-Pachan’ (आम का पाचन) और ‘Agni-Deepan’ (पाचन अग्नि को बढ़ाना) सबसे जरूरी है। ••एक आयुर्वेदिक चिकित्सक के दृष्टिकोण से, जोड़ों में जमे आम को पिघलाकर निकालने की संपूर्ण प्रक्रिया और प्रमुख औषधियां नीचे दी गई हैं: 1. जोड़ों में जमे ‘आम’ को पिघलाकर निकालने की प्रक्रिया आयुर्वेद के अनुसार, आम को पिघलाकर कोष्ठ (gut) में लाने और फिर शरीर से बाहर निकालने के लिए एक निश्चित अनुक्रम (sequence) का पालन किया जाता है: रूक्षण (Dry Fomentation): आमवात में शुरुआत में कभी भी स्निग्ध (oil) मालिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि तेल से आम और अधिक प्रकुपित होता है। इसके लिए बालुका स्वेद (Sand fomentation) या पोटली स्वेद (Dry herbal pouch) से जोड़ों की सिकाई की जाती है। गर्मी से जोड़ों में जमा हुआ गाढ़ा आम पिघलना शुरू होता है। दीपन और पाचन (Kindling Agni & Digesting Toxins): ऐसी औषधियों का सेवन कराया जाता है जो जठराग्नि को बढ़ाएं और पिघले हुए आम का पाचन करें। विरेचन (Therapeutic Purgation): जब आम पिघलकर कोष्ठ (पेट/आंतों) में आ जाता है, तो उसे विरेचन (निशोथ या एरंड तेल द्वारा) के माध्यम से दस्त के रास्ते शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। आमवात में Eranda Taila (Castor oil) को सर्वोत्तम माना गया है क्योंकि यह वात का शमन करता है और आम को बाहर निकालता है। 2. मुख्य आयुर्वेदिक औषधियां (Ayurvedic Formulations) आमवात की चिकित्सा में कटु (pungent), तिक्त (bitter) रस और उष्ण वीर्य (hot potency) वाली औषधियों का उपयोग किया जाता है। कषाय और चूर्ण (Decoctions & Powders) Rasnasaptak Kwath / Rasnadi Kwath: यह जोड़ों के दर्द, जकड़न (stiffness) और सूजन को कम करने के लिए सबसे प्रभावी काढ़ा है। Shunthi Churna (Dry Ginger): सोंठ को आयुर्वेद में ‘विश्वभेषज’ कहा गया है। यह बेहतरीन आम-पाचक और अग्नि-दीपक है। इसे गुनगुने पानी या एरंड तेल के साथ लिया जा सकता है। Aamvatari Churna: इसमें पिप्पली, हरड़, बहेड़ा, आंवला और शुद्ध गंधक जैसी जड़ी-बूटियां होती हैं जो विशेष रूप से आम का पाचन करती हैं। रस-औषधियां (Herbo-mineral Formulations) Aamvatari Ras: यह आमवात की मुख्य रस औषधि है जो आम को नष्ट करती है और वात दोष को शांत करती है। Simhanad Guggulu: इसमें त्रिफला, शुद्ध गंधक और एरंड तेल का संयोजन होता है। यह जोड़ों की जकड़न को दूर करने और जमे हुए टॉक्सिंस को पिघलाने में स्वर्ण-मानक (gold standard) माना जाता है। Yogaraj Guggulu / Mahayogaraj Guggulu: जब आम का पाचन हो जाए और केवल वात के कारण दर्द बचा हो, तब इसका उपयोग जोड़ों की ताकत बढ़ाने के लिए किया जाता है।
जोड़ों में आमवात के लिए आम को कैसे घोलें और कौन सी आयुर्वेदिक दवाएं लेनी चाहिए? - #56609
Aamvaat की बीमारी में, जोड़ों में जमा आम को कैसे पिघला कर निकाला जा सकता है, और कौन सी आयुर्वेदिक औषधियां लेनी चाहिए।
डॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
आमवात में केवल दर्द दबाना पर्याप्त नहीं होता। आयुर्वेद के अनुसार पहले आम-पाचन (Ama Pachana), फिर वात शमन और आवश्यकता अनुसार पंचकर्म किया जाता है। आमवात में लंघन (हल्का आहार), दीपान-पाचन, रूक्ष स्वेदन और बाद में बस्ति प्रमुख उपचार बताए गए हैं। आहार (Diet) क्या खाएं मूंग दाल की खिचड़ी पुराना चावल, जौ, बाजरा लहसुन, अदरक, सोंठ गुनगुना पानी दिनभर लौकी, तोरी, परवल, सहजन क्या न खाएं दही (विशेषकर रात में) ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक राजमा, छोले, भारी दालें तला-भुना, मैदा, मिठाइयाँ दिन में सोना और भोजन के तुरंत बाद आराम घरेलू उपाय सुबह खाली पेट 1–2 ग्राम सोंठ चूर्ण गुनगुने पानी के साथ। भोजन से 15 मिनट पहले अदरक के छोटे टुकड़े पर थोड़ा सेंधा नमक। आयुर्वेदिक औषधिय 1. सिंहनाद गुग्गुल 2 गोली, दिन में 2–3 बार भोजन के बाद गुनगुने पानी से। 2. आमवातारि रस 1–2 गोली, दिन में 2 बार भोजन के बाद। 3. महायोगराज गुग्गुल 2 गोली, दिन में 2 बार भोजन के बाद। 4. रास्ना सप्तक काढ़ा / महा रास्नादि क्वाथ 15–20 ml काढ़ा + बराबर गुनगुना पानी, दिन में 2 बार भोजन के बाद। इन औषधियों का चयन रोग की अवस्था, आयु, रक्तचाप, मधुमेह, गर्भावस्था, तथा अन्य रोगों के अनुसार बदल सकता है, इसलिए किसी योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख में लेना बेहतर रहता है। जोड़ों में जमे “आम” को हटाने के लिए रोज़ गुनगुना पानी। हल्का उपवास या केवल खिचड़ी/मूंग सूप 1–2 दिन (यदि शरीर अनुमति दे)। लंघन और दीपान-पाचन आम कम करने के मुख्य उपाय माने गए हैं। सूजन और भारीपन में रूक्ष स्वेदन (सूखी सिकाई), जैसे गरम रेत की पोटली, उपयोगी मानी जाती है।
आमवात (Ama-Vata) में लक्ष्य आम का पाचन, अग्नि सुधारना और जोड़ों की सूजन व दर्द कम करना होता है। आयुर्वेदिक उपचार Simhanad Guggulu 2 गोली दिन में 2 बार भोजन के बाद। Mahayograj Guggulu 1–2 गोली दिन में 2 बार। Rasnasaptak Kwath 20 ml बराबर पानी मिलाकर दिन में 2 बार। Ajmodadi Churna 3 g दिन में 2 बार गुनगुने पानी के साथ। बाह्य उपचार सूखी सिकाई (Dry fomentation). दर्द वाले जोड़ों पर हल्का गर्म सेक। आहार गुनगुना पानी पिएं। मूंग दाल, लहसुन, अदरक, हल्दी का सेवन करें। दही, ठंडे पेय, तले हुए पदार्थ, राजमा, छोले और भारी भोजन से परहेज करें।
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