गर्दन और पीठ में नस दबने से कमजोरी और खड़े होने में असमर्थता के लिए क्या करें? - #56690
गर्दन और कमर का नस दबने और काफी कमजोरी के कारण किसी व्यक्ति का हाथ पैर काम करने के अलावा अगर वो खड़ा नहीं होपा रहा है तो कौन-सा दवा देना चाहिए
डॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
गर्दन (सर्वाइकल) और कमर (लम्बर) की नस दबने के कारण हाथ-पैरों में कमजोरी है और रोगी खड़ा भी नहीं हो पा रहा है, तो यह गंभीर स्थिति हो सकती है। ऐसे में केवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय शीघ्र किसी न्यूरोलॉजिस्ट या ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से जांच कराना आवश्यक है, क्योंकि अत्यधिक नस दबने पर तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता पड़ सकती है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से यह स्थिति मुख्यतः वात विकार एवं मज्जा धातु क्षय से संबंधित मानी जाती है। उपचार का उद्देश्य वात शमन, नसों का पोषण और शक्ति बढ़ाना होता है। आयुर्वेदिक उपचार 1. आंतरिक औषधि योगराज गुग्गुलु – वातजन्य दर्द एवं नसों के दबाव में सहायक। महायोगराज गुग्गुलु – पुरानी नस एवं जोड़ों की समस्याओं में उपयोगी। अश्वगंधा चूर्ण/कैप्सूल – कमजोरी, मांसपेशियों और नसों की शक्ति बढ़ाने हेतु। बला-अश्वगंधादि अवलेह या च्यवनप्राश – बल एवं ओज बढ़ाने के लिए। दशमूलारिष्ट – वात विकार और सूजन में लाभकारी। 2. बाह्य उपचार महानारायण तेल या क्षीरबला तेल से गर्दन, कमर और पैरों की हल्की मालिश। मालिश के बाद नाड़ी स्वेदन (भाप) करने से जकड़न और दर्द में राहत मिल सकती है। पंचकर्म में कटि बस्ती, ग्रीवा बस्ती, बस्ती कर्म और पत्र पिंड स्वेद अच्छे परिणाम दे सकते हैं, लेकिन इन्हें विशेषज्ञ की देखरेख में ही कराना चाहिए। 3. आहार गर्म, ताजा और सुपाच्य भोजन लें। दूध, घी, मूंग दाल, खजूर, अंजीर, बादाम और तिल का सेवन करें। अत्यधिक ठंडी, सूखी, पैकेट वाली और जंक फूड वस्तुओं से बचें। पर्याप्त पानी पिएं और कब्ज न होने दें, क्योंकि कब्ज वात को बढ़ाती है। 4. जीवनशैली भारी वजन उठाने, झटकेदार गतिविधियों और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें। पर्याप्त आराम लें। जब तक शक्ति न लौटे, बिना सहारे चलने या खड़े होने का प्रयास न करें।
••सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम (Immediate Emergency Advice) जब नस दबने के कारण हाथ-पैर काम करना बंद कर दें और व्यक्ति खड़ा न हो पाए, तो इसे चिकित्सा की भाषा में Neurological Deficit (तंत्रिका तंत्र की अक्षमता) कहते हैं। तत्काल MRI कराएं: बिना समय गंवाए मरीज के Cervical (गर्दन) और Lumbar (कमर) Spine का MRI करवाएं ताकि यह पता चल सके कि नस किस स्तर पर और कितनी गंभीर रूप से दबी हुई है। ••न्यूरोसर्जन / ऑर्थोपेडिक सर्जन को दिखाएं: यदि नस पर दबाव (Compression) बहुत ज्यादा है और रीढ़ की हड्डी के अंदर का सिग्नल ब्लॉक हो रहा है, तो कई बार तुरंत सर्जिकल डीकंप्रेशन की जरूरत होती है ताकि मरीज हमेशा के लिए पैरालिसिस (अपंगता) का शिकार न हो। 🌿 तीव्र वात-शमन और नस की ताकत के लिए आयुर्वेदिक औषधियां (Ayurvedic Treatment) यदि डॉक्टर ने तुरंत सर्जरी की आवश्यकता नहीं बताई है और रूढ़िवादी (Conservative) इलाज की सलाह दी है, या आधुनिक इलाज के साथ-साथ आप आयुर्वेद अपनाना चाहते हैं, तो एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में निम्नलिखित औषधियों का उपयोग किया जाता है: 1. रस औषधियां (नस और तंत्रिका तंत्र को तुरंत ताकत देने के लिए) ••एकांगवीर रस (Ekangveer Ras): 1-1 गोली सुबह-शाम। (यह नसों की कमजोरी और लकवे जैसी स्थिति में सर्वोत्तम है)। ••बृहत् वात चिंतामणि रस (Brihat Vata Chintamani Ras): 1 गोली (स्वर्ण युक्त) सुबह और 1 गोली शाम को। ••नोट: यह दवा थोड़ी महंगी होती है लेकिन नस दबने, पैरालिसिस और नसों की अत्यधिक कमजोरी में यह ‘अमृत’ के समान काम करती है। महावातविध्वंसन रस (Mahavat Vidhwansan Ras): 1-1 गोली दिन में दो बार। 2. गुग्गुलु कल्प (सूजन और दर्द कम करने के लिए) ••त्रयोदशांग गुग्गुलु (Trayodashang Guggulu) या महायोगराज गुग्गुलु (Mahayogaraj Guggulu): 2-2 गोली सुबह-शाम हल्के गुनगुने पानी या रास्नादि क्वाथ के साथ। यह रीढ़ की हड्डी और नसों की सूजन को कम करता है। 3. कमजोरी दूर करने और मज्जा पोषण के लिए (For Weakness & Rejuvenation) ••अश्वगंधा चूर्ण / कैप्सूल (Ashwagandha): 1 कैप्सूल या 3 ग्राम चूर्ण दूध के साथ। यह मांसपेशियों और नसों को ताकत देता है। ••महारास्नादि काढ़ा (Maharasnadi Kwath): 20 ml काढ़ा बराबर मात्रा में गुनगुने पानी के साथ भोजन के बाद लें। 💆♂️ पंचकर्म चिकित्सा (सबसे प्रभावी इलाज) इस स्थिति में केवल मुंह से खाई जाने वाली दवाएं काफी नहीं होंगी। मरीज को पंचकर्म (Panchakarma) केंद्र में ले जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित थेरेपी रीढ़ की हड्डी के गैप को ठीक करने और नस को खोलने में मदद करती हैं: ••ग्रीवा बस्ती और कटि बस्ती (Greeva & Kati Basti): गर्दन और कमर पर उड़द के आटे का घेरा बनाकर उसमें औषधीय तेल (जैसे महानारायण तेल या सहचरादि तेल) भरा जाता है। ••शालिषष्टिक पिंड स्वेद (Shali Shashtika Pinda Sweda): विशेष प्रकार के औषधीय चावल और दूध के पोटली से सिकाई की जाती है, जो मांसपेशियों और नसों की कमजोरी (Muscle Wasting) को दूर करती है। मात्रा वस्ती (Anuvasana Basti): गुदा मार्ग से तेल की वस्ती (Enema) दी जाती है, जो शरीर के बढ़े हुए वात दोष को जड़ से खत्म करती है। 🛑 क्या न करें (Strict Warnings): ••मालिश न करें: घर पर मरीज की रीढ़ की हड्डी पर जोर से मालिश (Massage) या दबाव बिल्कुल न डालें। इससे नस और ज्यादा दब सकती है और स्थिति बदतर हो सकती है। मरीज को झटका न लगने दें: बैठते, उठते या लेटाते समय रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखें और किसी भी तरह के झटके से बचाएं।
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