भीड़भाड़ वाली जगहों पर कान में घंटी बजने और सुनने में कमी का इलाज क्या है? - #56761
कान मे सुनाई नहीं दे रहा है आवाज़ गूंजती है भीड़ में कुछ पता नहीं चलता इसका इलाज हो सकता है नाक को बंद करने से हवा मुंह में भरने से कान से छोड़ने पर आवाज़ गुंजनी शुरू हो जाती है
डॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
Please consult the ayurvedic ent specialist for better examination and treatment
••आपके द्वारा बताए गए लक्षण—कम सुनाई देना (Hearing loss), आवाज़ का गूंजना (Autophony/Tinnitus) और भीड़ में शब्दों का स्पष्ट समझ न आना (Speech discrimination issue)—आयुर्वेद में मुख्य रूप से ‘बाधिर्य’ और ‘कर्णनाद/कर्णक्ष्वेड’ के अंतर्गत आते हैं। ••इसके साथ ही, नाक बंद करके मुंह से हवा भरने पर (जिसे मॉडर्न मेडिकल साइंस में Valsalva Maneuver कहा जाता है) कान में दबाव बदलना और आवाज़ का गूंजना यह संकेत देता है कि Eustachian Tube (कंठ-कर्ण नलिका) की कार्यप्रणाली प्रभावित है। इसमें वात दोष के साथ-साथ कफ का अनुबंध (Obstruction/Srotorodha) होने की पूरी संभावना है। ••आयुर्वेद में इसका बिल्कुल उपचार संभव है। चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य वात का शमन करना, स्रोतों के अवरोध (Blockage) को हटाना और कर्ण-तंत्रिका (Auditory Nerve) को शक्ति देना होता है। आपकी सहायता के लिए एक प्रामाणिक आयुर्वेदिक चिकित्सा सूत्र नीचे दिया गया है: 1. स्थानीय एवं पंचकर्म चिकित्सा (Local & Panchakarma Therapies) चूंकि इसमें स्रोतों का अवरोध और वात का प्रकोप दोनों शामिल हैं, इसलिए स्थानीय चिकित्सा सबसे प्रभावी साबित होती है: ••कर्णपूरण (Ear Drops): ••बिल्वादि तैल (Bilva Taila) या अपामार्ग क्षार तैल (Apamarga Kshara Taila): यदि कफ का अवरोध अधिक महसूस हो, तो क्षार तैल उत्तम है। इसकी 2-3 बूंदें गुनगुनी करके कान में डालें (यह सुनिश्चित कर लें कि कान के पर्दे में कोई छेद न हो)। ••क्षीरबला तैल (Kshirabala Taila 101 Avarti): यदि नसों की कमजोरी (Sensonineural involvement) लग रही हो, तो यह तैल कर्णपूरण और नस्य के लिए श्रेष्ठ है। ••नस्य कर्म (Nasal Administration): नाक और कान का सीधा संबंध है। अणु तैल (Anu Taila) या षडबिन्दु तैल (Shadbindu Taila) की 2-2 बूंदें नियमित रूप से दोनों नासापुटों में लें। यह Eustachian tube के ब्लॉक को खोलने में मदद करेगा। ••प्रधमन नस्य / कवल-गंडूष: कफ के शमन के लिए गुनगुने पानी में सैंधव लवण और हल्दी मिलाकर गंडूष (कुल्ला) धारण करें। 2. आभ्यन्तर औषधि चिकित्सा (Oral Medications) वात शामक, कफ नाशक और रसायन औषधियों का संमिश्रण इसमें अत्यंत लाभकारी है: •••वटक/गुग्गुलुसारिवाद्यासव (Sarivadyasava) 15-20 ml समान मात्रा में जल के साथभोजन के बाद (दोनों समय) ••रस औषधिलक्ष्मीविलास रस (नारदीय) या समीरपन्नग रस 1-1 गोलीयदि कफजन्य अवरोध अधिक हो घृत/रसायनसारस्वत चूर्ण (Saraswata Churna) या अश्वगंधा चूर्ण 3 ग्रामगुनगुने दूध या शहद के साथ विशिष्ट योगमहावातविध्वंसन रस + एकांगवीर रस (125 mg प्रत्येक)वात शामक और तंत्रिका तंत्र को बल देने हेतु ••विशेष नोट: Valsalva maneuver (नाक बंद करके हवा छोड़ना) को बहुत अधिक बलपूर्वक न करें, क्योंकि इससे मध्य कर्ण (Middle Ear) के नाजुक पर्दों और अस्थियों (Ossicles) पर विपरीत दबाव पड़ सकता है। निदान की पुष्टि: चिकित्सा शुरू करने से पहले एक बार Pure Tone Audiometry (PTA) और Tympanometry अवश्य करवा लेनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि समस्या Conductive (अवरोध जन्य) है या Sensorineural (तंत्रिका जन्य)। ••पथ्यापथ्य: कफ और वात को बढ़ाने वाले आहार जैसे ठंडा पानी, दही, आइसक्रीम, और फर्मेंटेड फूड से परहेज रखें। गुनगुने जल का सेवन करें।
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