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पुरानी कब्ज और भूख न लगने पर क्या करें?
Gastrointestinal Disorders
प्रश्न #56253
20 दिनों पहले
65

पुरानी कब्ज और भूख न लगने पर क्या करें? - #56253

Client_15432f
$3

मुझे हमेशा कब्ज की समस्या बनी रहती है कब रहने की वजह से भूख भी नहीं लगती है लेकिन जब पेट साफ हो जाता है तो भूख भी लगता है मुझे क्या करना चाहिए मैंने जांच सभी कराया है लेकिन कोई उसने परेशानी नहीं है अभी मैं और पिता का सेवन कर रहा हूं और साथ में आज जो है दही और गुण भी खा लिया क्या इसे कोई समस्या बढ़ सकती है और अंग्रेजी दवा का लूज सिरप भी उसे किया हूं

How long have you been experiencing constipation?:

- More than 6 months

How often do you have bowel movements?:

- Every few days

How would you describe the consistency of your stools?:

- Soft and easy to pass

Have you noticed any specific foods that trigger or worsen your constipation?:

- Dairy products

How is your overall energy level during the day?:

- Moderate energy

Are you experiencing any other symptoms, such as abdominal pain or bloating?:

- No other symptoms

How much water do you drink daily?:

- More than 3 liters
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डॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं

यदि सभी जांच सामान्य हैं, तो आपकी भूख कम लगना कब्ज से संबंधित हो सकता है। दही और गुड़ साथ में लेने से कुछ लोगों में गैस, भारीपन या पाचन संबंधी असुविधा बढ़ सकती है, इसलिए नियमित रूप से यह संयोजन लेने से बचें। Take Triphala Churna 5 ग्राम रात को गुनगुने पानी के साथ। Abhayarishta 20 ml बराबर पानी मिलाकर, रात के भोजन के बाद। Hingvastak Churna 2–3 ग्राम भोजन के बाद, दिन में 2 बार। साथ में: सुबह खाली पेट 2–3 गिलास गुनगुना पानी पिएं। फल, सलाद, हरी सब्जियां और पर्याप्त पानी लें। रोज़ 30 मिनट टहलें।


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हमेशा कब्ज (Constipation) रहना और उसकी वजह से भूख न लगना एक बहुत ही आम समस्या है। आयुर्वेद के अनुसार, जब पेट साफ नहीं होता, तो शरीर में ‘आम’ (toxins या बिना पचा हुआ भोजन) जमा होने लगता है। यह ‘आम’ हमारी भूख दबा देता है। जैसे ही आपका पेट साफ होता है, शरीर का रास्ता खुलता है, पाचक अग्नि (Digestive Fire) फिर से जलने लगती है और आपको भूख का अहसास होने लगता है। आपकी सभी रिपोर्ट नॉर्मल आई हैं, जो कि एक बहुत अच्छी बात है। इसका सीधा मतलब है कि आपकी परेशानी किसी गंभीर बीमारी की वजह से नहीं, बल्कि पेट की कार्यप्रणाली (Functioning) और वात दोष के असंतुलन के कारण है। आपने जो पपीता खाने की बात कही है, वह बहुत ही बढ़िया आदत है। पपीता प्राकृतिक रूप से पेट साफ करने में मदद करता है। रही बात दही और गुड़ की, तो आयुर्वेद के अनुसार दही की तासीर भारी (Abhishyandi) होती है, जो पेट में भारीपन या मल को रोकने का काम कर सकती है, खासकर अगर इसे रात में या बिना सोचे-समझे खाया जाए। हालांकि गुड़ के साथ खाने से इसका थोड़ा सा असर सुधरता है, लेकिन जब तक आपको पुरानी कब्ज है, तब तक रोजाना भारी मात्रा में दही खाने से बचें। इसकी जगह आप दोपहर के खाने में ताजा छाछ (Buttermilk) में भुना जीरा और काला नमक डालकर पिएं, यह आपकी भूख और पेट दोनों के लिए अमृत जैसा काम करेगी। रही बात अंग्रेजी दवा लूज सिरप (Lactulose solution)की, तो यह आपातकालीन स्थिति (Emergency) में मल को नरम करने के लिए तो ठीक है, लेकिन लंबे समय तक इसकी आदत डालना सही नहीं है। इससे आपके आंतों की स्वाभाविक रूप से काम करने की ताकत कमजोर हो सकती है। आयुर्वेद में इसका बहुत ही सुरक्षित और जड़ से काम करने वाला इलाज है। आपको रात को सोते समय 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण (Triphala Churn) हल्के गुनगुने पानी के साथ लेना चाहिए। त्रिफला आंतों को बिना कमजोर किए उन्हें ताकत देता है और सुबह पेट खुलकर साफ करता है। इसके अलावा, रात को सोते समय एक गिलास गुनगुने दूध में 1 से 2 चम्मच शुद्ध देसी गाय का घी मिलाकर पिएं। यह आपकी आंतों के रूखेपन (Vata dryness) को खत्म करेगा, जिससे मल बिना किसी तकलीफ के बाहर निकल जाएगा। भविष्य में इस समस्या से पूरी तरह बचने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में कुछ छोटे बदलाव करने होंगे। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएं और ठंडे पानी या फ्रिज की चीजों से बिल्कुल दूरी बना लें। अपने भोजन में फाइबर (Fiber) बढ़ाएं, जैसे कि दलिया, ओट्स और हरी सब्जियां, लेकिन ध्यान रहे कि सब्जियां अच्छी तरह पकी हुई और हल्की तेल-घी में बनी हों (कच्चा सलाद वात बढ़ाता है, इसलिए उससे बचें)। सुबह या शाम को कम से कम 20-30 मिनट पैदल चलने या हल्की एक्सरसाइज की आदत डालें, क्योंकि शारीरिक सक्रियता बढ़ने से हमारी आंतों की गतिशीलता भी बढ़ती है और कब्ज हमेशा के लिए दूर रहती है।


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आपकी समस्या पुरानी कब्ज (Chronic Constipation) के कारण पाचन अग्नि कमजोर होने और आम (अधपचा भोजन) बनने से जुड़ी प्रतीत होती है। इसी वजह से भूख कम लगती है और पेट साफ होने पर भूख स्वतः बढ़ जाती है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण कब्ज को केवल मल की समस्या नहीं माना जाता, बल्कि यह पाचन तंत्र के असंतुलन का संकेत है। जब मल नियमित रूप से नहीं निकलता, तो गैस, भारीपन और भूख की कमी जैसी समस्याएं बनी रह सकती हैं। क्या करें? सुबह उठकर 1–2 गिलास गुनगुना पानी पिएं। भोजन समय पर करें और नाश्ता न छोड़ें। भोजन में पपीता, अमरूद, अंजीर, भीगी हुई किशमिश, हरी सब्जियां और सलाद शामिल करें। रोज 30–40 मिनट तेज चाल से टहलें। रात को समय पर सोएं और तनाव कम रखें। आयुर्वेदिक औषधियां त्रिफला चूर्ण 3–5 ग्राम रात को गुनगुने पानी के साथ। अभयारिष्ट 15–20 ml बराबर पानी मिलाकर भोजन के बाद दिन में 2 बार। भूख बढ़ाने और पाचन सुधारने के लिए हिंग्वाष्टक चूर्ण 1–2 ग्राम पहले ग्रास के साथ लिया जा सकता है। दही और गुड़ के बारे में दही और गुड़ एक साथ लेने से सभी लोगों में समस्या नहीं होती, लेकिन जिनकी पाचन शक्ति कमजोर हो या कब्ज की प्रवृत्ति हो, उनमें यह कभी-कभी गैस, भारीपन या पाचन संबंधी असुविधा बढ़ा सकता है। इसलिए इसका नियमित सेवन साथ में करने से बचें।


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••नमस्ते। आपकी परेशानी मैं समझ सकता हूँ। जब पेट साफ नहीं होता, तो शरीर का पाचन तंत्र (अग्नि) मंद हो जाता है, जिससे भूख न लगना स्वाभाविक है। आयुर्वेद में इसे ‘अग्निमांद्य’ और ‘विबंध’ (कब्ज) कहा जाता है। अच्छी बात यह है कि आपकी सारी रिपोर्ट्स नॉर्मल हैं, जिसका मतलब है कि कोई गंभीर बीमारी नहीं है—यह केवल आपके पाचन तंत्र के असंतुलन के कारण है। •पपीता खाना कैसा है? पपीते का सेवन आपके लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें ‘पपैन’ नामक एंजाइम होता है जो पाचन को सुधारता है और आंतों को साफ करता है। इसे नियमित रूप से खाते रहें (सुबह या शाम के नाश्ते में)। 2. दही और गुड़ खाने से क्या नुकसान होगा? आज आपने दही और गुड़ खाया है, तो घबराएं नहीं, इससे कोई बड़ी समस्या नहीं होगी। लेकिन भविष्य के लिए ध्यान रखें: दही का सेवन रोजाना न करें: आयुर्वेद के अनुसार दही स्वभाव से ‘अभिष्यंदी’ (भारी और आंतों में रुकावट पैदा करने वाली) होती है। कब्ज के मरीजों को दही का सेवन कम करना चाहिए, खासकर रात के समय। •विकल्प: दही की जगह मट्ठे (छाछ) में भुना हुआ जीरा, काला नमक और थोड़ी सी हींग मिलाकर दोपहर के भोजन के बाद लें। यह कब्ज के लिए अमृत समान है। 3. एलोपैथिक लूज सिरप (Loose Syrup) का इस्तेमाल लैक्टुलोज (Loose) सिरप अस्थायी राहत के लिए ठीक है, लेकिन इसकी आदत नहीं डालनी चाहिए। लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने से आंतें सुस्त हो जाती हैं और उनके स्वाभाविक रूप से मल साफ करने की क्षमता कम होने लगती है। हमें आंतों को मजबूत बनाना है, उन पर निर्भर नहीं होना है। कब्ज और भूख बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक उपचार आप अपनी जीवनशैली और आहार में ये आसान आयुर्वेदिक उपाय शामिल कर सकते हैं: 1. रात का अचूक उपाय (त्रिफला या ईसबगोल) ••त्रिफला चूर्ण: रात को सोने से पहले 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें। यह आंतों को बिना नुकसान पहुँचाए सुबह पेट साफ करता है। ••ईसबगोल की भूसी: अगर त्रिफला से राहत न मिले, तो रात को 1-2 चम्मच ईसबगोल की भूसी गुनगुने दूध या पानी के साथ लें। 2. मुनक्का और अंजीर (आंतों की खुश्की दूर करने के लिए) रात को 5-6 मुनक्के और 2 सूखे अंजीर पानी में भिगो दें। सुबह उठकर मुनक्के के बीज निकाल लें और इन्हें चबाकर खाएं, साथ ही वह पानी भी पी लें। यह आंतों को ताकत देता है। 3. ‘अग्नि’ (भूख) बढ़ाने के उपाय ••अदरक और नींबू: भोजन करने से 15 मिनट पहले अदरक के एक छोटे टुकड़े पर सेंधा नमक और नींबू का रस लगाकर चबाएं। इससे भूख खुलकर लगेगी और खाना अच्छे से पचेगा। ••गुनगुना पानी: दिनभर में जब भी पानी पीएं, हल्का गुनगुना पानी ही पीएं। ठंडा या फ्रिज का पानी आपके पाचन को और कमजोर करेगा। जीवनशैली में जरूरी बदलाव ••सब्जियों और फाइबर का उपयोग: तोरई, लौकी, कद्दू, और हरी पत्तेदार सब्जियां ज्यादा खाएं। भोजन में देसी घी का प्रयोग जरूर करें, यह आंतों में चिकनाई लाता है। मैदा और डिब्बाबंद खाने से दूरी: समोसे, पिज्जा, बिस्कुट, नमकीन और मैदा से बनी चीजों का पूरी तरह त्याग कर दें। ••वॉक (सैर): सुबह या शाम को कम से कम 20-30 मिनट पैदल जरूर चलें। इससे आंतों की हलचल (Peristalsis) बढ़ती है।


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1 दिन पहले
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1 दिन पहले
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