मैं 18 साल का हूँ और मेरी हाइट 5 फीट 2 इंच है। इसे 5 फीट 5 इंच कैसे बढ़ा सकता हूँ? - #55006
Meri age 18 saal hi or meri hight5foot 2 cm hu main kiya karu ki meri hight 5fut 5cm hi jaye koi upaye batae taki merihight bad jaye
How long have you been concerned about your height?:
- 6 months to 1 yearHave you noticed any changes in your height recently?:
- I'm not sureWhat is your current diet like?:
- Low in nutrientsDo you engage in regular physical activity or exercise?:
- Yes, daily exerciseHow many hours of sleep do you get each night?:
- 7-9 hoursDo you have any family members who are particularly tall?:
- Yes, one parent is tallHave you tried any specific remedies or treatments to increase your height?:
- No, this is my first attemptडॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
आयुर्वेद के अनुसार लंबाई (height) मुख्य रूप से अस्थि धातु, पोषण, अग्नि और निद्रा पर निर्भर करती है। 18 वर्ष के बाद अधिकांश लोगों में अस्थि वृद्धि लगभग रुक जाती है, इसलिए प्राकृतिक रूप से लंबाई बढ़ना सीमित हो जाता है। फिर भी शरीर की पूरी क्षमता पाने के लिए: –संतुलित आहार (दूध, घी, प्रोटीन युक्त भोजन) –नियमित व्यायाम और योग (ताड़ासन, भुजंगासन) –पर्याप्त नींद –वात दोष संतुलन
Milk 2 times daily with 1 tsp ghee Protein rich diet (dal, paneer, eggs if taken) Sesame (til), almonds, ragi, green vegetables Junk food avoid —Tadasana, Bhujangasana, hanging exercises daily — Ashwagandhadi lehyam 1 tsf twice daily with milk after meal — cap Shatavari 1 tab twice daily after meal - for 1 month
नमस्ते, आयुर्वेद में, विकास और बढ़ोतरी सभी सात धातुओं—विशेष रूप से अस्थि धातु (हड्डियों के ऊतक) और मांस धातु (मांसपेशियों के ऊतक)—के उचित पोषण पर निर्भर करती है। यदि पाचन शक्ति कमज़ोर हो, तो भोजन से मिलने वाले पोषक तत्व इन धातुओं में ठीक से परिवर्तित नहीं हो पाते। इससे शारीरिक विकास धीमा हो जाता है, भले ही आहार संतुलित क्यों न लगे। कम कद के सामान्य आयुर्वेदिक कारण: - धीमी पाचन क्रिया -> पोषक तत्वों का ठीक से अवशोषण न होना। - वात दोष का असंतुलन -> हड्डियों का कमजोर विकास और हार्मोनल अनियमितता। - कफ दोष का असंतुलन -> धीमी चयापचय (metabolism) और ग्रोथ हार्मोन का कम काम करना। - आनुवंशिक और हार्मोनल प्रभाव -> ये व्यक्ति के अधिकतम कद की संभावना को प्रभावित करते हैं; लेकिन आयुर्वेद का लक्ष्य शरीर की प्रणाली को संतुलित करके उसकी प्राकृतिक क्षमता को बढ़ाना है। उपचार के लक्ष्य: - पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण के लिए पाचन अग्नि को बढ़ाना। - हड्डियों के ऊतकों को पोषण देना और उन्हें मजबूत बनाना। - हार्मोनल प्रणाली को स्वाभाविक रूप से संतुलित करना। - गहरी और अच्छी नींद को बढ़ावा देना, क्योंकि ग्रोथ हार्मोन गहरी नींद के दौरान ही सबसे अच्छा काम करता है। - निरंतर विकास और स्वास्थ्य के लिए समग्र जीवन शक्ति को सहारा देना। आंतरिक दवाएँ: 1) अश्वगंधा + शतावरी चूर्ण = 1-1 चम्मच, दिन में दो बार गर्म दूध के साथ, 3 महीने तक लें। इससे हड्डियाँ और मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, हार्मोन का संतुलन बना रहता है, और अच्छी नींद आती है। यह विशेष रूप से किशोर लड़कियों में प्रजनन और अंतःस्रावी (endocrine) स्वास्थ्य को सहारा देता है। 2) आमलकी रसायन = सुबह के समय 1 चम्मच रोज़ लें। यह विटामिन C और कैल्शियम से भरपूर होता है, तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता और ऊतकों की मरम्मत को बढ़ाता है। 3) बाला चूर्ण = दिन में एक बार दूध के साथ आधा चम्मच लें। यह मांसपेशियों की कसावट (muscle tone) और हड्डियों की मजबूती को बेहतर बनाता है। बाहरी उपचार: 1) तेल की मालिश = ‘बाला अश्वगंधादि तैल’ का उपयोग करें। 10-15 मिनट तक गर्म तेल से रोज़ मालिश करें, और उसके बाद गर्म पानी से स्नान करें। इससे रक्त संचार, मांसपेशियों की कसावट और जोड़ों का लचीलापन बेहतर होता है; साथ ही मन को शांति मिलती है और अच्छी नींद आती है। - धूप का सेवन = सुबह 7 से 9 बजे के बीच, 15-20 मिनट तक सुबह की ताज़ी धूप में बैठें। इससे शरीर में प्राकृतिक रूप से विटामिन D बनने में मदद मिलती है। आहार: - डेयरी उत्पाद = ताज़ा दूध, घी, पनीर, दही (केवल दिन के समय सेवन करें)। - अनाज = रागी, गेहूँ, चावल। - प्रोटीन के स्रोत = मूंग दाल, मसूर दाल, अंकुरित अनाज (sprouts), भीगे हुए बादाम। - बीज = कद्दू के बीज, तिल, अलसी (flax seeds)। - फल = आँवला, केला, पपीता, अंजीर, खजूर। - सब्जियाँ = हरी पत्तेदार सब्जियाँ, सहजन (drumstick), गाजर, चुकंदर। - कैल्शियम के प्राकृतिक स्रोत = रागी, तिल, बादाम, और गाय का दूध। इन चीज़ों से बचें: - जंक फूड, तला-भुना भोजन, कार्बोनेटेड (गैस वाले) पेय, और पैकेट बंद स्नैक्स। - अत्यधिक चीनी, कैफीन, कोला, चाय, या भोजन को छोड़ना (skip करना)। - देर रात भोजन करना या सोने-जागने का अनियमित समय। योग और व्यायाम: नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर को सक्रिय और उत्तेजित करती है। - पिट्यूटरी ग्रंथि को उत्तेजित करता है और शरीर की मुद्रा (posture), लचीलेपन और मांसपेशियों की टोन को बेहतर बनाने में मदद करता है। - ताड़ासन = रीढ़ और हड्डियों में खिंचाव लाता है। - भुजंगासन = पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। - चक्रासन = छाती और रीढ़ को खोलता है। - वृक्षासन = संतुलन और शरीर की मुद्रा को बेहतर बनाता है। - सूर्य नमस्कार = मेटाबॉलिज्म और विकास के लिए रोज़ाना 6-12 चक्र करें। प्राणायाम - अनुलोम-विलोम = हार्मोन को संतुलित करता है और मन को शांत करता है। - भ्रामरी = पिट्यूटरी ग्रंथि के कार्य को बेहतर बनाता है और आराम देता है। - गहरी पेट की साँस (Deep abdominal breathing)। घरेलू उपाय 1) अश्वगंधा दूध का पेय - 1 चम्मच पाउडर + 1 कप गर्म दूध + 1/2 चम्मच घी + एक चुटकी इलायची मिलाएं = विकास को बढ़ावा देता है, मन को शांत करता है, और अच्छी नींद लाने में मदद करता है। 2) तिल और बादाम का मिश्रण - भुने हुए तिल और बादाम का पाउडर बनाकर एक जार में रख लें। रोज़ाना 1 चम्मच पाउडर गर्म दूध के साथ लें = यह कैल्शियम और प्रोटीन का एक प्राकृतिक सप्लीमेंट है। 3) आंवला कैंडी - पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाती है। जीवनशैली संबंधी सुझाव - नींद = 8-9 घंटे, आदर्श रूप से रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक। - तनाव = सोने से पहले स्क्रीन (मोबाइल/टीवी) देखने से बचें; उपचार, ध्यान और संगीत को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। - हाइड्रेशन = रोज़ाना 8-10 गिलास गर्म पानी पिएं, ठंडा पानी नहीं। - दिनचर्या = भोजन और सोने का समय निश्चित रखने से हार्मोन और मेटाबॉलिज्म स्थिर रहते हैं। कद (ऊंचाई) 50-60% तक आनुवंशिकी (genetics) पर निर्भर करता है, लेकिन 40-50% तक पोषण, हार्मोन और जीवनशैली पर निर्भर करता है, जिसमें आयुर्वेद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन सुझावों का पालन करें; आशा है कि यह जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी। धन्यवाद।
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