टीबी के इलाज के बाद अगर मेरे 3 साल के बच्चे के RBC, WBC और प्लेटलेट काउंट कम हैं तो मुझे क्या करना चाहिए? - #56385
3 साल से बुखार था, फिर टीबी डायग्नोस हुई। 7 महीने का इलाज लिया, उसके बाद से आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, प्लेटलेट काउंट नहीं बढ़ रहे हैं। हर 45 दिन में ब्लड ट्रांसफ्यूजन होता है।
डॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
Aapke bataye anusar 3 saal tak bukhar raha, phir TB diagnose hui aur 7 mahine treatment liya. Ab RBC, WBC aur platelets sab kam rehte hain aur lagbhag har 45 din mein blood transfusion ki zarurat padti hai. Yeh gambhir sthiti hai aur sirf kamzori ya poshan ki kami se samjha nahi ja sakta. ----Iske sambhavit karan ho sakte hain: -Bone marrow ki kamjori ya damage (aplastic anemia, marrow suppression) -TB ya uske ilaaj ke baad bone marrow par prabhav -Vitamin B12/Folate deficiency -Autoimmune rog -Blood disorders jaise Myelodysplastic syndrome ya anya hematological conditions —rx Rog avastha: Raktakshaya, Ojakshaya, Dhatukshaya ----rx 1) Punarnava Mandur – 2 tab BD after meals 2) Dhatri Loha – 1 tab BD after meals 3) Draksharishta – 15 ml + equal water BD after meals 4) Giloy Satva – 250 mg BD —Aahar: Anar, chukandar, munakka, khajoor Moong dal, ghee, doodh (agar pach jaye) Protein-yukt aahar ---- consult with haematologist first
••यह एक काफी गंभीर और जटिल स्थिति (complex case) है। एक आयुर्वेदिक चिकित्सक (Ayurvedacharya) के दृष्टिकोण से, मैं आपकी इस स्थिति को पूरी तरह समझ पा रहा हूँ। लंबे समय तक बुखार (3 साल का जीर्ण ज्वर), ट्यूबरकुलोसिस (TB) का इन्फेक्शन और फिर 7 महीने तक चली उसकी हैवी एंटीबायोटिक्स (AKT) दवाओं के कारण शरीर की मज्जा धातु (Bone Marrow) और अग्नि (Metabolism/Digestive fire) बहुत ज्यादा कमजोर हो चुकी है। आयुर्वेद में इस स्थिति को ‘धातु क्षय’ (विशेषकर रस, रक्त और मज्जा धातु का क्षय) और ‘विषाक्तता’ (Post-medication toxicity) के रूप में देखा जाता है। ••यहाँ कुछ बेहद महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक और व्यावहारिक सुझाव दिए जा रहे हैं, जो आपके बोन मैरो को धीरे-धीरे रीजेनरेट करने और रक्त कोशिकाओं (Blood Cells) को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं: 1. रक्त और मज्जा धातु वर्धक औषधियां (Blood & Bone Marrow Revitalizers) बोन मैरो को स्टिम्युलेट करने और खून बनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए आयुर्वेद में कुछ विशेष दवाओं का उपयोग किया जाता है: ••पुनर्नवा मंडूर (Punarnava Mandur) या ताप्यादि लौह (Tapyadi Lauha): यह हीमोग्लोबिन और RBC काउंट को बढ़ाने के लिए बेहतरीन क्लासिकल दवाएं हैं। गिलॉय सत्व (Giloy Satva) और पपीते के पत्ते का रस: यह WBC और प्लेटलेट काउंट को बूस्ट करने में मदद करता है। ••सुवर्ण बसंत मालती रस (Suwarna Basant Malkati Ras): यह एक अत्यंत प्रभावकारी ‘रसायन’ औषधि है जो जीर्ण ज्वर (पुरानी बीमारी) के बाद आई कमजोरी, इम्यून डेफिशिएंसी और धातु क्षय को ठीक करती है। यह बोन मैरो को एक्टिव करने में बहुत मददगार साबित हो सकती है। अश्वगंधा और शतावरी चूर्ण: यह शरीर के ओज (Immunity) को बढ़ाता है और टिश्यूज को पोषण देता है। 2. ‘अग्नि’ और लीवर को मजबूत करना (Deepana & Pachana) जब तक आपका लीवर और पाचन तंत्र (जठराग्नि) सही नहीं होगा, आप जो भी खाएंगे या दवा लेंगे, उससे सही तरीके से ‘रक्त धातु’ का निर्माण नहीं हो पाएगा। ••रोहितकारिष्ट (Rohitakararishta) या कुमार्यासव (Kumaryasava): यह स्प्लीन (Spleen/प्लीहा) और लीवर को एक्टिव करता है। स्प्लीन को आयुर्वेद में रक्त का मूल स्थान माना गया है। ••द्राक्षासव (Drakshasava): यह खून की कमी (Anemia) को दूर करने और भूख बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा टॉनिक है। 3. आहार में जरूरी बदलाव (Dietary Recommendations) ••अनार और बीटरूट (चुकंदर) का रस: रोज सुबह ताजा अनार का जूस या चुकंदर-गाजर का रस लें। इसमें थोड़ा सा आंवला भी मिला सकते हैं (विटामिन C आयरन के एब्जॉर्प्शन को बढ़ाता है)। ••काली किशमिश (Munakka): 10-12 मुनक्के रात को पानी में भिगो दें और सुबह उन्हें चबाकर खाएं और वह पानी भी पी लें। ••खजूर (Dates) और अंजीर: यह प्राकृतिक रूप से आयरन और अन्य माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होते हैं। पचने में हल्की डाइट: मूंग दाल की खिचड़ी, लौकी, तोरई, कद्दू जैसी हल्की सब्जियां खाएं ताकि पाचन तंत्र पर ज्यादा लोड न पड़े।
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