इरेक्टाइल डिस्फंक्शन और कामेच्छा की कमी के लिए आयुर्वेद में कई उपाय हैं जो आपकी स्थिति में मदद कर सकते हैं। सबसे पहली चीज है कि अपने आहार पर ध्यान देना। पित्त और वात दोष को संतुलित करने के लिए आहार में दूध, मक्खन, घी, नट्स जैसे बादाम, अखरोट शामिल करें। ये शक्तिवर्द्धक होते हैं और सेक्सुअल स्टैमिना में सुधार करते हैं।
आंवला और अश्वगंधा के सेवन से भी लाभ मिल सकता है। आंवला का रोजाना सेवन आपकी कामेच्छा को सुधारने में मदद करता है, वहीं अश्वगंधा तनाव को कम कर ऊर्जा और स्टैमिना बढ़ाता है। ये दोनों ही सुबह गाय के दूध के साथ लेने से अच्छा परिणाम देते हैं।
प्राणायाम और योग भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन में मदद कर सकते हैं। भस्त्रिका, कपालभाति और अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम अभ्यास आपके नाड़ियों को सशक्त बनाने और रक्त संचार में सुधार करते हैं। योग आसनों में सबसे लाभदायक है शावासन और भुजंगासन, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।
सर्वोत्तम परिणाम पाने के लिए, आप पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत विरेचन और बस्ती प्रक्रिया का विकल्प भी चुन सकते हैं, जो शरीर को शुद्ध करने और दोषों को संतुलित करने में मदद करता है। इसके अलावा, चिकित्सक द्वारा सुझाए गए आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन करें।
शराब, तंबाकू और अत्यधिक मसालेदार भोजन से बचें, क्योंकि यह आपकी स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं। नियमित रूप से व्यायाम करें और एक संतुलित जीवन शैली का पालन करें। अगर समस्या बनी रहती है, तो किसी अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक से व्यक्तिगत परामर्श लेना श्रेष्ठ होगा।



