Prandhara या किसी अन्य हर्बल अर्क का उपयोग करते समय हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए, विशेषकर जब आपके पेट में मरोड़ और पानी जैसा दस्त हो। सिद्ध-आयुर्वेद के दृष्टिकोण से देखें तो, ये लक्षण आमतौर पर वात और पित्त के असंतुलन को दर्शाते हैं जो आपकी पाचन अग्नि पर असर डाल सकते हैं।
Prandhara, आमतौर पर, सर्दी-खांसी, सिरदर्द जैसी समस्याओं में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसका सीधा उपयोग पेट की गड़बड़ियों के लिए नहीं होता। ऐसे में मुख्य ध्यान पाचन अग्नि को सुधारने और आंतों को शांत करने पर होना चाहिए। ब्याल कमेंट का उपयोग करें और अपनी द्रविति बनाएँ रखें। आप आंतिक साफ करने के लिए हल्का गुनगुना पानी पी सकते हैं और हलका भोजन जैसे मूंग की दाल का पानी का सूप लें। रात के भोजन में खिचड़ी जैसी हल्की चीजे लें।
यदि आपकी स्थिति गंभीर हो, बार-बार उल्टी हो रही हो या आपके शरीर में पानी की कमी हो रही हो तो तुरंत चिकित्सा सलाह लें। सिद्ध अव्यवस्था के उपचार के लिए रसोयन औषधियों का ध्यान दें जैसे चंद्रकलारस, जोकि वात और पित्त को संतुलित कर सकते हैं। अपने उपचार को चिकित्सीय परामर्श के तहत ही करें। अगर लक्षण बने रहते हैं, तो आपके चिकित्सक से संपर्क करना अनिवार्य हो।



