आपकी स्थिति को देखते हुए, chronic pancreatitis के लिए सुरक्षा और उचित उपचार महत्वपूर्ण हैं। सबसे पहले, यह सलाह देना उचित है कि आप एक गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजिस्ट से परामर्श लें क्योंकि chronic pancreatitis और अत्यधिक वजन घटाव गंभीर हो सकते हैं, जिन्हें पेशेवर चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है।
आयुर्वेद में, अग्नाश्य की समस्या मुख्य रूप से वायु और पित्त दोष के असंतुलन से जुड़ी होती है। यहाँ कुछ सुझाव हैं जो आपके स्थिति में सहायक हो सकते हैं:
1. आहार में परिवर्तन: आपके खाने में तेल और घी की मात्रा को कम करें। हल्के और सुपाच्य आहार करें जैसे खिचड़ी और मूंग दाल। मिर्च और मसालेदार खाने से बचें जो पित्त को बढ़ा सकते हैं।
2. जड़ी-बूटियों का उपयोग: कुटकी (Picrorhiza kurroa) और पुनर्नवा (Boerhavia diffusa) का सेवन करें, ये जड़ी-बूटियाँ अग्निशामक के साथ यकृत को भी सहारा दे सकती हैं। सुबह खाली पेट 1 चमच पुनर्नवा के काढ़े का सेवन करें।
3. त्रिफला: दिन में दो बार त्रिफला चूर्ण का सेवन करें यह पाचन में सहायता कर सकता है और आँतों की सफाई में मदद कर सकता है।
4. योग और प्राणायाम: नियमित रूप से प्राणायाम करें जो वायु दोष को संतुलित कर सकता है। वज्रासन और पवनमुक्तासन जैसे आसन भी फायदेमंद हो सकते हैं।
5. तरल पदार्थ: हाइड्रेटेड रहें और तरल पदार्थों का सेवन बाध्य करें, जैसे नारियल पानी और बेल का शरबत।
आपको जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाने की भी आवश्यकता होगी। यह सुनिश्चित करें कि आप डॉक्टर की निगरानी में रहकर ही किसी भी घरेलू उपचार का अनुसरण करें। किसी भी नए उपचार को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर को अवश्य सूचित करें।


