बच्चों के लगातार रोते हुए सांस रोकने की आदत थोड़ी चिंताजनक हो सकती है, लेकिन ये अक्सर कुछ समय में खुद ही ठीक हो जाता है। हो सकता है बच्चा ध्यान आकर्षित करने के लिए ऐसा कर रहा हो, या उसे किसी प्रकार की बेचैनी महसूस हो रही हो। पर, ये जानना जरुरी है कि ये हर बच्चे में अलग भी हो सकता है, कुछ बच्चे ज्यादा संवेदनशील होते हैं और तनाव या ध्यान की कमी की वजह से ऐसा कर सकते हैं।
आयुर्वेद में, बालक का प्रकृति (दोष) इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावित कर सकता है। अगर बच्चा वाता प्रकृति में बढ़ा हुआ है, जैसे शारीरिक और मानसिक रूप से संवेदनशील है, तो ये उसका प्रतिक्रिया हो सकता है। जब बच्चा रोए और सांस रोके तो उसे तुरंत सुरक्षित और आरामदायक वातावरण देने की कोशिश करें।
आप कुछ आयुर्वेदिक उपाय आजमा सकते हैं:
1. बच्चा को दिन में हल्का और सुपाच्य भोजन दें, जैसे खिचड़ी या दलिया। इससे उसका पाचन सही रहेगा।
2. नारियल तेल या बादाम के तेल से पेट और पैरों की हलकी मालिश करें, इससे उसका मन शांत रहेगा।
3. उसके सोने का समय नियमित रखें और उसके कमरे का माहौल शांत और अंधेरे में सोने के अनुकूल बनाएं।
लेकिन ध्यान रहे, अगर बच्चा लगातार ज्यादा वक्त तक सांस रोकता है या उसकी चेतना में कोई बदलाव दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। ये कभी-कभी गंभीर भी हो सकता है। सुनिश्चित करें कि दिन भर में बच्चा सुरक्षित और प्रसन्नचित रहे।