आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से इरेक्टाइल डिसफंक्शन और प्रीमेच्योर इजैकुलेशन का इलाज कैसे करें और उनकी खुराक क्या होनी चाहिए? - #55787
मुझे इरेक्टाइल डिस्फंक्शन और शीघ्रपतन की पिछले 6 महीने से प्रॉब्लम है। मैं कुछ आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां जिसमे कीड़ा जड़ी, सालम पंजा, ईरानी अकरकरा, अश्वगंधा, सफेद मूसली ,काली मूसली विदारीकंद ,गोखरू, हरी इलायची, कोच बीज ,रूमी मस्ती, शतावर, धागा मिश्री मुलेठी आदि लेना चाहता हूं परंतु मुझे इनकी मात्रा नहीं पता कितनी कितनी मात्रा लेनी है । कृपया मेरा मार्गदर्शन कर उचित सुझाव दें । इन जड़ी बूटियां के अलावा भी कोई अन्य आयुर्वेदिक औषधि आप लेने का सुझाव दें तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी । 🙏सादर धन्यवाद🙏
डॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ED) और शीघ्रपतन आयुर्वेद अनुसार मुख्यतः वात दोष वृद्धि, धातु क्षीणता, मानसिक तनाव, अधिक चिंता, अनियमित दिनचर्या व नसों की कमजोरी से जुड़ी समस्या मानी जाती है। आपने जिन जड़ी-बूटियों का उल्लेख किया है, वे अधिकांशतः वाजीकरण (Virility enhancing) और बल्य औषधियाँ हैं, लेकिन इन्हें सही मात्रा और संतुलन में लेना बहुत जरूरी होता है। आयुर्वेदिक मिश्रण नीचे दी गई मात्रा मिलाकर चूर्ण तैयार किया जा सकता है: • अश्वगंधा – 100 ग्राम • सफेद मूसली – 50 ग्राम • काली मूसली – 30 ग्राम • कौंच बीज शुद्ध – 50 ग्राम • विदारीकंद – 50 ग्राम • गोखरू – 40 ग्राम • शतावरी – 40 ग्राम • मुलेठी – 20 ग्राम • ईरानी अकरकरा – 10 ग्राम • छोटी इलायची बीज – 10 ग्राम • सालम पंजा – 20 ग्राम इन सभी का बारीक चूर्ण बनाकर अच्छी तरह मिला लें। सेवन विधि • सुबह और रात 1-1 चम्मच (लगभग 5 ग्राम) गुनगुने दूध के साथ भोजन के बाद लें। • साथ में 1 चम्मच शुद्ध देसी घी या मिश्री मिलाने से बल और वीर्य पुष्टिकरण में लाभ मिलता है। अतिरिक्त आयुर्वेदिक औषधियाँ • अश्वगंधारिष्ट – 15 ml बराबर पानी मिलाकर दिन में 2 बार भोजन बाद। • चंद्रप्रभा वटी – 2 गोली सुबह-शाम। • कमजोरी अधिक हो तो शुद्ध शिलाजीत की छोटी मात्रा भी लाभकारी रहती है। क्या सावधानी रखें रात में देर तक जागना बंद करें। शराब, धूम्रपान, अश्लील सामग्री और अधिक हस्तमैथुन से बचें। रोज 20 मिनट व्यायाम, प्राणायाम और केगल एक्सरसाइज करें। पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण बहुत जरूरी है। महत्वपूर्ण • कीड़ा जड़ी, रूमी मस्ती जैसी औषधियाँ हर व्यक्ति को सूट नहीं करतीं, इसलिए ज्यादा मात्रा में न लें। • यदि BP, डायबिटीज, थायरॉइड या हार्मोन की समस्या हो तो पहले जांच करवाना बेहतर रहता है। • नियमित 2–3 महीने उपचार, सही आहार और संयम रखने से erection strength, timing और stamina में धीरे-धीरे अच्छा सुधार देखने को मिलता है।
●ठीक है, मैं आपको कुछ दवा दे रहा हूँ, इसे 4 से 5 महीने तक नियमित रूप से लें। ● अश्वगंधा - वीर्यवर्धक, टेस्टोस्टेरोन का स्तर और मांसपेशियों की शक्ति बढ़ाता है। ● कौंच - उत्कृष्ट वाजीकरण पदार्थ, शुक्राणु वर्धक। इसमें एल-डोपा होता है जो डोपामाइन का स्तर बढ़ाकर शुक्राणु उत्पादन में मदद करता है। ● गोक्सुर - मूत्र संबंधी विकारों को दूर करता है, धातुओं को शुद्ध करता है और स्तंभन शक्ति प्रदान करता है। इसमें प्रोटोडायोसिन होता है जो यौन इच्छा और शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार करता है। ● सफेद मुसली - शुक्राणु की शक्ति और वीर्य की चिकनाई बढ़ाती है। इसमें प्राकृतिक स्टेरॉयड और सैपोनिन होते हैं, जो प्रजनन क्षमता और शारीरिक क्षमता को बढ़ाते हैं। ● विदारिकंद - शुक्राणु वर्धक, प्रजनन क्षमता में सहायक। इसमें फाइटोएस्ट्रोजेनिक तत्व होते हैं जो प्रजनन अंगों को पोषण देते हैं। ● सभी जड़ी-बूटियों को अच्छी तरह से साफ और सुखा लें। बारीक छलनी से छान लें। बराबर मात्रा में लें और अच्छी तरह मिला लें। खुजली पैदा करने वाले तत्वों को नष्ट करने के लिए कौंच के बीजों को धीमी आंच पर भून लें। सभी जड़ी-बूटियों को अलग-अलग पीसकर बारीक पाउडर बना लें (60-80 मेश)। इसे एक वायुरोधी कांच/टिन के डिब्बे में रखें। यह पाउडर प्रतिदिन 3-5 ग्राम की मात्रा में उपयोग के लिए तैयार रहेगा। ● सेवन विधि: 1 छोटा चम्मच (लगभग 3-5 ग्राम)। सेवन विधि: गुनगुने दूध में मिश्री मिलाकर। समय: सोने से पहले। अवधि: कम से कम 3 महीने तक नियमित सेवन। ● दिन में दो बार बादाम या अश्वगंधा से मालिश करें।
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