पतंजलि की जिन औषधियों का उपयोग सामान्यतः यौन दुर्बलता, कामेच्छा की कमी और शारीरिक कमजोरी में किया जाता है, उनमें Divya Youvanamrit Vati और Divya Ashwashila Capsule प्रमुख हैं। सामान्य मात्रा: • Divya Youvanamrit Vati – 1–2 गोली सुबह और शाम भोजन के बाद दूध या गुनगुने पानी के साथ। • Divya Ashwashila Capsule – 1 कैप्सूल सुबह और 1 कैप्सूल शाम भोजन के बाद। यदि कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, तो ये औषधियां सामान्यतः उपयोग की जा सकती हैं, लेकिन यदि आपको हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, या कोई गंभीर बीमारी है, तो चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही लें। साथ में: • अश्वगंधा चूर्ण 3 ग्राम रात को दूध के साथ। • नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और पर्याप्त नींद रखें। यदि आपकी मुख्य समस्या इरेक्शन की कमजोरी, शीघ्रपतन, कामेच्छा में कमी, या मधुमेह के कारण यौन समस्या है, तो बताइए। उसके अनुसार अधिक उपयुक्त आयुर्वेदिक उपचार बताया जा सकता है।
सेक्सुअल पावर बढ़ाने के लिए सबसे अच्छी पतंजलि दवा कौन सी है और क्या यह हाई कोलेस्ट्रॉल वाले व्यक्ति के लिए सुरक्षित है? - #56767
सेक्स पावर बढ़ाने वाली पतंजलि की सबसे अच्छी दवा का नाम क्या है और जिनका कोलेस्ट्रॉल पर बढ़ा हुआ है क्या वो उस दवा का उपयोग कर सकता है क्या
How long have you been experiencing concerns with sexual power?:
- 1-3 monthsHave you been diagnosed with high cholesterol by a healthcare professional?:
- Yes, but not under treatmentAre you currently taking any medications for cholesterol or other health issues?:
- No, not currently taking anyHow would you rate your overall energy levels?:
- Moderate — some fatigueHave you noticed any changes in your libido or sexual performance?:
- Significant decreaseWhat lifestyle changes have you made to manage your cholesterol levels?:
- No changes madeDo you have any other health conditions that might affect your treatment options?:
- Yes, hypertensionडॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं
नमस्ते 🙏 Ask Ayurveda मैं आपका स्वागत हैं. आयुर्वेद में ‘सेक्स पावर’ को ओज और धातु बल से जोड़कर देखा जाता है। इसके लिए पतंजलि शिलाजीत कैप्सूल (Patanjali Shilajit Capsule) को एक अत्यंत प्रभावी औषधि माना जाता है। यह शरीर की ऊर्जा, सहनशक्ति (stamina) और पौरुष शक्ति को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने में सहायक है। इसके अलावा,अश्वगंधा चूर्ण या कैप्सूल और सफेद मूसली भी शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए श्रेष्ठ औषधियाँ हैं। जहाँ तक आपके कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का सवाल है, तो आपको बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है। शिलाजीत जैसे शक्तिवर्धक तत्व तासीर में गर्म होते हैं और यदि शरीर में दोष (जैसे बढ़ा हुआ मेद या कोलेस्ट्रॉल) असंतुलित हो, तो इनका सीधा सेवन बिना चिकित्सक की सलाह के नहीं करना चाहिए। बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हृदय के स्वास्थ्य और रक्त संचार से जुड़ा है, इसलिए केवल सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवा पर ध्यान केंद्रित करना पर्याप्त नहीं है। मेरी सलाह यह है कि: स्वयं उपचार न करें: बिना किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक (Vaidya) की देखरेख के इन दवाओं का सेवन न करें, क्योंकि वे आपकी प्रकृति और कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट देखकर ही सही डोज तय कर सकते हैं। कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान दें: यदि आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, तो पहले इसे नियंत्रित करना जरूरी है। इसके लिए पतंजलि की हृद्यामृत वटी (Hridyamrit Vati) या अर्जुन की छाल का सेवन कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन में सहायक हो सकता है, लेकिन यह भी चिकित्सक के परामर्श पर ही लें। जीवनशैली: आयुर्वेद में औषधि से अधिक महत्व आहार-विहार को दिया गया है। योग (विशेषकर कपालभाति और अनुलोम-विलोम), नियमित व्यायाम और गरिष्ठ/तले हुए भोजन से परहेज करना आपके कोलेस्ट्रॉल और यौन स्वास्थ्य दोनों के लिए सबसे उत्तम औषधि है।
••पतंजलि (दिव्य फार्मेसी) की श्रेणियों में इस स्थिति के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी दृष्टिकोण नीचे दिया गया है: 1. पतंजलि की सबसे प्रमुख औषधि: यौवन चूर्ण (Yauban Churna) या श्वेत मूसली चूर्ण ••आमतौर पर यौन शक्ति के लिए पतंजलि की ‘यौवन गोल्ड कैप्सूल’ या ‘शिलाजीत कैप्सूल’ का नाम लिया जाता है, लेकिन बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल वाले मरीज के लिए श्वेत मूसली (Safed Musli) सबसे बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प है। क्यों सर्वश्रेष्ठ है? श्वेत मूसली एक उत्कृष्ट वृष्य और बल्य औषधि है जो टेस्टोस्टेरोन के स्तर को सुधारती है। आधुनिक शोधों और आयुर्वेदिक मत के अनुसार, श्वेत मूसली में Hypolipidemic गुण होते हैं, यानी यह शरीर में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में मदद करती है, न कि बढ़ाने में। ••सावधानी (Heavy Formulations से बचें): पतंजलि की कई ताकत बढ़ाने वाली दवाओं (जैसे यौवन गोल्ड कैप्सूल) में भस्मों के साथ-साथ भारी मात्रा में ‘मकरध्वज’ या भारी पाक/अवलेह फॉर्मूलेशन हो सकते हैं, जिन्हें पचाने के लिए दीप्ताग्नि की आवश्यकता होती है। यदि मरीज का कोलेस्ट्रॉल बढ़ा है, तो उसकी अग्निमांद्य और मेदोवृद्धि की स्थिति को देखते हुए भारी घी-पाक वाली दवाओं से बचना चाहिए। 2. बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल में उपयोग: क्या वे कर सकते हैं? हाँ, लेकिन चुनिंदा औषधियों का ही। यदि मरीज पतंजलि की दवाओं का उपयोग करना चाहता है, तो उसे एक द्वि-आयामी दृष्टिकोण (Two-pronged approach) अपनाना होगा: क) यौन शक्ति (Vajikarana) के लिए: ••दिव्य श्वेत मूसली चूर्ण: 2-3 ग्राम दिन में एक बार। ••दिव्य अश्वगंधा चूर्ण/कैप्सूल: अश्वगंधा तनाव (Stress-induced erectile dysfunction) को कम करता है और कोर्टिसोल को नियंत्रित करता है। यह लिपिड प्रोफाइल पर कोई बुरा असर नहीं डालता। ••सेवन का माध्यम (Anupana): चूंकि कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, इसलिए पारंपरिक रूप से बताए गए गाढ़े या मलाईदार दूध के बजाय गुनगुने पानी या टोन/मिस्री रहित पतले दूध के साथ ही इन चूर्णों का सेवन कराना चाहिए। ख) कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण (Medohar) के लिए साथ में जोड़ें: यौन शक्ति की दवाओं का सही अवशोषण (Absorption) तब तक नहीं होगा जब तक धमनियों में ‘आम’ या कोलेस्ट्रॉल जमा रहेगा (Srotorodha)। इसलिए साथ में यह देना अनिवार्य है: ••दिव्य लिपिडोम टैबलेट (Divya Lipidom): यह पतंजलि की कोलेस्ट्रॉल के लिए विशेष दवा है जो अर्जुन, गुग्गुल और लहसुन से बनी है। यह धमनियों के अवरोध को हटाती है, जिससे जननांगों में रक्त प्रवाह (Blood circulation) सुधरता है और यौन शक्ति स्वतः बढ़ती है। ••दिव्य लहसुन घनवटी: लहसुन मेदोहर भी है और हृदय व वात रोगों में उत्तम है। 3. चिकित्सक के नाते मुख्य परामर्श बिंदु (Clinical Advice) “चिकित्सा का स्वर्ण नियम: पहले स्रोतस शुद्ध करें, फिर वाजीकरण दें।” ••स्रोतोशोधन (Clearing Channels): बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल शरीर में ‘मेद धातु’ की विकृति और स्रोतोरोध (Channels blockage) को दर्शाता है। जब तक स्रोतोरोध ठीक नहीं होगा, वाजीकरण औषधियां रस-रक्त धातुओं तक पूरी तरह नहीं पहुँच पाएंगी। ••शिलाजीत के प्रति सावधानी: यद्यपि पतंजलि की शुद्ध शिलाजीत कोलेस्ट्रॉल में दी जा सकती है (क्योंकि यह कफ-मेदोहर है), लेकिन यदि मरीज को उच्च रक्तचाप (Hypertension) या एसिडिटी की समस्या है, तो ग्रीष्म ऋतु में या उच्च खुराक में इसके सेवन से बचें। ••दीपन-पाचन: रोगी को शुरुआत में चित्रकादि वटी या आमपाचक वटी देकर अग्नि को प्रदीप्त करें, ताकि जो भी बल्य औषधि वह खाए, वह कोलेस्ट्रॉल न बनकर सीधे ‘शुक्र धातु’ का पोषण करे।
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