What to do if my daughter is pregnant with high WBC count but has no symptoms? - #56412
मेरी बिटिया गर्भवतीहैं टैस्ट में पता चला है कि उसका WBC COUNT बढ़ा हुआ है उसे तकलीफकुछ नहीं है न सूजन है न बुखार है और ये काउंट पिछले तीन वर्षों से ऐसा ही है कृपया मार्गदर्शन करें
How long has your daughter been pregnant?:
- 6-9 monthsHas she experienced any other health issues during her pregnancy?:
- Other concernsHas there been any change in her diet or lifestyle recently?:
- No changesWhat were the specific WBC count values over the past three years?:
- Consistently above normalHas she had any infections or illnesses in the past three years?:
- No, none at allIs she taking any medications or supplements during her pregnancy?:
- Other prescribed medicationsHow does she feel emotionally and mentally during her pregnancy?:
- Very positive and relaxedDoctors' responses
गर्भावस्था में WBC Count सामान्य से कुछ बढ़ा हुआ रह सकता है। यदि 3 वर्षों से WBC बढ़ा हुआ है, कोई बुखार, सूजन, दर्द या संक्रमण के लक्षण नहीं हैं, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन नियमित रूप से स्त्रीरोग विशेषज्ञ की निगरानी में रहना चाहिए। आयुर्वेदिक सहयोग हेतु: गिलोय घनवटी 2 गोली दिन में 2 बार भोजन के बाद गुनगुने पानी से। आमलकी रसायन 1 चम्मच सुबह-शाम भोजन के बाद। पर्याप्त पानी पिएं, ताजे फल एवं संतुलित आहार लें। गर्भावस्था में कोई भी औषधि शुरू करने से पहले अपने स्त्रीरोग विशेषज्ञ और आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें। यदि WBC बहुत अधिक है या लगातार बढ़ रहा है तो CBC के साथ Peripheral Smear और अन्य आवश्यक जांच करानी चाहिए।
••प्रणाम। सबसे पहले आपको और आपकी बिटिया को गर्भावस्था की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। एक आयुर्वेदिक चिकित्सक के दृष्टिकोण से और आपकी बिटिया की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, मैं आपको पूरी तरह आश्वस्त करना चाहता हूँ कि चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। आपकी बिटिया को कोई लक्षण (जैसे बुखार, सूजन या दर्द) नहीं है, और यह काउंट पिछले 3 वर्षों से ऐसा ही बना हुआ है—ये दोनों बातें बहुत महत्वपूर्ण हैं। आइए इसे आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा (Modern Science) दोनों के नजरिए से समझते हैं: 1. आधुनिक चिकित्सा का दृष्टिकोण (Modern Medical Perspective) ••गर्भावस्था में प्राकृतिक बदलाव: गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) खुद को और गर्भ में पल रहे शिशु को सुरक्षित रखने के लिए री-सेट होती है। इस वजह से गर्भावस्था में WBC (White Blood Cells) का बढ़ना एक सामान्य और प्राकृतिक (Physiological) प्रक्रिया है। ••3 साल का इतिहास: चूंकि उनका काउंट पिछले 3 सालों से इसी स्तर पर है और उन्हें कोई तकलीफ नहीं है, इसका मतलब है कि यह उनके शरीर का अपना एक सामान्य बेसलाइन (Baseline) स्तर है। अगर कोई गंभीर संक्रमण (Infection) होता, तो इतने वर्षों में अन्य लक्षण जरूर सामने आते। 2. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण (Ayurvedic Insight) आयुर्वेद में इस स्थिति को हम ‘देह प्रकृति’ और ‘सौम्य धातु वृद्धि’ के रूप में देख सकते हैं। जब शरीर में बिना किसी व्याधि (बीमारी) के कोई घटक बढ़ा हुआ दिखता है, तो वह उस व्यक्ति की अपनी अनूठी शारीरिक बनावट या प्रकृति का हिस्सा हो सकता है। चूंकि उन्हें कोई ज्वर (बुखार), शोथ (सूजन) या शूल (दर्द) नहीं है, इसलिए आयुर्वेद के अनुसार उनके शरीर में कोई ‘आम’ (Toxins) या ‘दुष्ट दोष’ सक्रिय नहीं हैं। गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह सुरक्षित है। सुरक्षित आयुर्वेदिक एवं सामान्य परामर्श (Safe Guidelines) ••गर्भावस्था एक अत्यंत संवेदनशील समय होता है, इसलिए बिना किसी गंभीर कारण के किसी भी तीव्र औषधि (चाहे वह आयुर्वेदिक हो या एलोपैथिक) का सेवन नहीं करना चाहिए। इस समय हमारा मुख्य उद्देश्य ‘गर्भस्थापन’ (प्रेग्नेंसी को सुरक्षित रखना) और ‘रस धातु’ को उत्तम बनाना होना चाहिए। ••मधुर और सौम्य आहार: बिटिया को सुपाच्य, ताजा और सात्विक भोजन दें। दूध, घी, मखाना, और ताजे फलों का सेवन उनके और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए उत्तम है। तनाव मुक्त रहें: मानसिक तनाव से भी शरीर में इन्फ्लेमेटरी रिस्पॉन्स बढ़ता है। इसलिए उन्हें खुश और शांत माहौल में रखें। ••सद् वृत्त (Healthy Routine): सुबह-शाम हल्की वॉक (टहलना) और प्राणायाम (जैसे अनुलोम-विलोम) करना बहुत लाभकारी रहेगा। ••चूंकि गर्भावस्था में नियमित जांचें जरूरी होती हैं, इसलिए आप इन दो बातों का ध्यान रखें: ••अपनी गाइनेकोलॉजिस्ट (Gynecologist) को यह जरूर बता दें कि यह काउंट पिछले 3 सालों से ऐसा ही है, ताकि वे बेवजह उन्हें कोई एंटीबायोटिक न दें। ••एक बार डॉक्टर की सलाह से Peripheral Blood Smear (PBS) टेस्ट करवा लें, जिससे यह पूरी तरह कन्फर्म हो जाए कि कोशिकाएं सामान्य आकार-प्रकार की हैं (जो कि इस मामले में पूरी तरह संभावित है)।
About our doctors
Only qualified ayurvedic doctors who have confirmed the availability of medical education and other certificates of medical practice consult on our service. You can check the qualification confirmation in the doctor's profile.