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मुझे हस्तमैथुन के बाद शुक्रपात और पेट की समस्या है
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Sexual Health & Disorders
प्रश्न #40695
103 दिनों पहले
947

मुझे हस्तमैथुन के बाद शुक्रपात और पेट की समस्या है - #40695

Client_40f647

सर मैंने बचपन में हस्तमैथुन किया जिससे मुझे स्वयं ही शुक्रपात होजाता हैऔर मैंने आयुर्वेद के डाक्टरों से पूंछा तो उन्होंने यह कहा किआपकी नसेंकमजोर हो गई हैं और सर अब मेरा पेटभी खराब रहता है जब भी पेट में जलन होती हैतो मुझेशुक्रपात हो जायाकरता हैयह समस्यापिछले बारहवर्षसे हैक्यायह नहींहोती है

आपकी पेट की समस्या कब से शुरू हुई?:

- 12 साल से अधिक

आपके पेट में जलन होने पर आप क्या करते हैं?:

- दवा लेते हैं

आपकी दैनिक जीवनशैली कैसी है?:

- मध्यम, थोड़ी सक्रिय
मुफ़्त
प्रश्न बंद है

इस स्थिति के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाए गए उपचार

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डॉक्टरों की प्रतिक्रियाएं

आपकी समस्या को समझते हुए, आयुर्वेद में इसका समाधान कैसे किया जा सकता है, यह देखना महत्वपूर्ण है। आपकी स्थिति स्खलन और पेट की समस्याओं के साथ जुड़ी हुई लगती है, जिसे आयुर्वेद में वात और पित्त दोष के असंतुलन के रूप में देखा जा सकता है। इनसे संबंधित समस्या को दूर करने के लिए कई उपाय और जीवनशैली के बदलाव करने की जरुरत हो सकती है।

पहले, अपने आहार में बदलाव करें। भारी, गरम, तैलीय और मसालेदार भोजन से बचें क्योंकि ये पित्त को बढ़ा सकते हैं। ठंडे, ताजे और पौष्टिक आहार लें जैसे सब्जियों का सूप, दलिया, और ताजे फल। दही और छाछ का सेवन करें, ये पाचन को सुधारेंगे।

अश्वगंधा और शतावरी जैसी जड़ी-बूटियाँ शारीरिक अभिज्ञान बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। प्रतिदिन एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण का सेवन दूध में मिलाकर कर सकते हैं। यह आपके स्नायविक प्रणाली को मजबूती प्रदान करेगा।

इसके अतिरिक्त, अपनी दिनचर्या में कुछ बदलाव लाएँ। प्रतिदिन अर्द्ध-सहज योग या प्राणायाम का अभ्यास करें जो मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा। इसके लिए नाड़ी शोधन प्राणायाम विशेष रूप से लाभकारी रहेगा।

आपको तनाव को प्रबंधित करना और उसे कम करना भी आवश्यक है। इसके लिए, ध्यान और योग करेगा आपको अच्छे परिणाम दे सकता है। इसके अलावा नियमित रूप से गहरी नींद लेना भी महत्वपूर्ण है।

यदि आपकी स्थिति में सुधार न हो या यह अधिक गंभीर हो जाये, तो किसी अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सक के पास पुनःपरामर्श के लिए जाएँ क्योंकि यह एक पुरानी समस्या है और आपकी व्यक्तिगत चिकित्सा आवश्यकता हो सकती है।

निर्धारित चिकित्सा एवं सलाह पर ध्यान देना सुनिश्चित करें, ताकि आपको दीर्घकालीन आराम प्राप्त हो सके।

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आपकी स्थिति पर विचार करते हुए, ऐसा लगता है कि शुक्रपात और पेट की समस्याएं आपके शरीर में वात का असंतुलन और अग्नि की कमी से उत्पन्न हो रही हैं। यह अस्थिरता नाड़ियों की कमजोरी और पाचन तंत्र की अप्रभावित स्थिति का संकेत हो सकती है।

पहले, अग्नि को संतुलित करने के लिए आप आहार में पाचन सुधारने वाले तत्व सम्मिलित करें। जैसा कि अदरक, अजवाइन और हींग - इन्हें भोजन में शामिल करके पाचन शक्ति को बढ़ावा दें। अधिक तले-भुने और मसालेदार खाद्य पदार्थों से बचें, जो पेट में जलन को बढ़ा सकते हैं।

दूसरा, नाड़ियों की मजबूती के लिए, अश्वगंधा और शतावरी का सेवन करें। यह जड़ी-बूटियाँ नाड़ियों को पोषण देती हैं और मानसिक तनाव को कम करती हैं। इसे दूध के साथ दिन में दो बार लिया जा सकता है।

इसके साथ ही, प्रतिदिन प्राणायाम और धीमी गति से योगासन करने की सलाह दी जाती है, जैसे कि वज्रासन और योग निद्रा, जो आपकी नसों और मन दोनों को आराम देंगे।

यदि यह स्थिति में सुधार नहीं होता, तो किसी कुशल चिकित्सक से व्यक्तिगत रूप से सलाह लेना बेहद आवश्यक है। स्थितियाँ जैसे बार-बार हो रहे स्वतः शुक्रपात और पेट की गंभीर समस्या, अधिक चिकित्सा ध्यान की जरूरत की ओर इशारा कर सकती हैं। सुरक्षित और समुचित देखभाल सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

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2 दिनों पहले
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2 दिनों पहले
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Warren
2 दिनों पहले
Thank you so much for the advice! I’ll definitely give those a try. Really appreciate the clear suggestions, had no clue what to do before!
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Kayden
2 दिनों पहले
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