खाने के बाद डकार और गैस की समस्या - #42276
खाना खाने से पहलेऔर बाद में डकार आते हैं। गैस बनते है पेट मेंआवाजआती है। पेट साफ नहीं होता। बदन पर खुजली आती हैं जीभ पर सफेद परत है।भूख नहीं लगती।प्यास लगती हैं।उपवास के दीन भी भूख नहीं लगती।एक आयुर्वेद डॉक्टर ने shhnkhvati दी हैफिर भी डकारे आती हैं गैस बनते है।अब अजीर्ण कंटक रसखआने को बोला है।वजन कम हो गया है। सासे है फूलती है।त्वचा बहुत रुखी है। उमर ४० है।वजन ३६ ।महिला ह।
आपके इन लक्षणों का अनुभव कब से हो रहा है?:
- 6 महीने से अधिकआपकी भूख और प्यास की स्थिति कैसी है?:
- बिल्कुल नहीं, हमेशा प्यास लगती हैआपकी पाचन स्वास्थ्य के बारे में क्या कहना चाहेंगी?:
- खराब, लगातार समस्याएंDoctors' responses
आपके द्वारा बताई गई समस्याएं संभवतः आपके पाचन तंत्र में असंतुलन और वात-पित्त दोष के बढ़ने के कारण हो सकती हैं। ऐसी अवस्था में, आयुर्वेद में अनेक उपाय हैं जो आराम प्रदान कर सकते हैं। सबसे पहले, आपके पाचन को सुधारने के लिए कुछ कदम उठाये जा सकते हैं।
आपके पेट और पाचन सम्बन्धी विकारों का समाधान करने के लिए त्रिफला का उपयोग बहुत प्रभावी हो सकता है। इसे रात के समय एक चुटकी गर्म पानी के साथ लें। त्रिफला पेट को साफ रखती है और पाचन में सुधार करती है। इसके अलावा, अजीर्ण कंटक रस एक समाधान हो सकता है, लेकिन कृपया डॉक्टर की निगरानी में ही इसे लें।
भोजन के बाद डकार और गैस से राहत पाने के लिए, भोजन के साथ हिंग्वाष्टक चूर्ण का सेवन करें। यह वात को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है और पाचन को मजबूत कर सकता है। भोजन के बाद, ½ चम्मच चूर्ण एक गिलास गर्म पानी के साथ लें।
रोज सुबह खली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने की आदत डालें। यह न केवल पाचन को बढ़ावा देगा बल्कि आपके शरीर को डिटॉक्स भी करेगा।
त्वचा की रूखापन के लिए, नारियल का तेल या तिल तेल का इस्तेमाल करें। स्नान के बाद या पहले शरीर पर मालिश करें।
आहार में सुधार अनिवार्य है। ताजे, पकाये हुए और हल्के भोजन का सेवन करें, और ठंडा, बासी या अत्यंत मसालेदार भोजन से बचें।
पेट की आवाजों से बचने के लिए, अन्न का संतुलित मात्रा में सेवन करें और अधिक भोजन करने से बचें। छोटे-छोटे खाने के अंतराल रखें।
यदि सांस फूलना भी है, तो डॉक्टर से परामर्श लें, क्योंकि यह अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। वजन कम होना भी चिंता का विषय है, इसके लिए एक प्रशिक्षित आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से व्यक्तिगत रूप से परामर्श लेना आवश्यक है। इस बीच, कायिक व्यायाम जैसे सावधानीपूर्वक योग का अभ्यास किया जा सकता है।
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