पैर के तलवों पर सोरायसिस के लिए सही उपचार और देखभाल का पालन करना जरूरी है, खासकर जब खुजलाहट और दर्द बढ़ रहा हो। सबसे पहले, यह जानना महत्वपूर्ण है कि सोरायसिस त्वचा की एक अति-संवेदनशीलता स्थिति है जिसमें त्वचा कोशिकाएं तेजी से बढ़ती हैं। इसके लिए, आयुर्वेद में शरीर के त्रिदोषों - विशेष रूप से पित्त और वात दोषों के संतुलन पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
1. तिल का तेल और नारियल का तेल: नहाने से पहले तिल के तेल या नारियल के तेल से तलवों पर मालिश करें। ये तेल त्वचा को नमी और पोषण प्रदान करने में सहायक हैं। यह प्रक्रिया रोजाना करने से लाभ हो सकता है।
2. नीम का प्रयोग: नीम को त्वचा रोगों के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। नीम की पत्तियों का पेस्ट बनाकर उसे प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं, यह खुजली और सूजन में लाभदायक हो सकता है।
3. त्रिफला चूर्ण: त्रिफला का सेवन पाचन तंत्र को सुधारने और शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद कर सकता है। दिन में एक बार गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करें।
4. पथ्य-अपथ्य: अधिक खट्टा, तला, और मसालेदार भोजन से बचें, यह पित्त दोष को बढ़ा सकता है। ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज का सेवन करें।
5. आहार में हल्दी और मेथी: हल्दी और मेथी का सेवन भी लाभदायक हो सकता है। इन्हें खाने में मिलाकर नियमित रूप से लेना अन्दरूनी सूजन को कम कर सकता है।
अगर दर्द असहनीय है और घरेलू उपायों से कोई राहत नहीं मिल रही, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से चर्चा करना उचित रहेगा। गंभीर मामलों में इलाज में देरी करना ठीक नहीं होता।


