How to treat acne scars and dark lips with Ayurveda for oily skin at 35 years old? - #56501
मेरी उम्र 35 वर्ष है। मेरी स्किन ऑयली है, प्रकृति पित्त हैं। 12–13 साल की उम्र में चेहरे पर कील,मुंहासे,फुंसियां हो गई थी। इलाज कराने के बाद कील मुंहासे ठीक हो गए, लेकिन चेहरे पर कई सारे गड्ढे पड़ गए है। चेहरे का रंग काला हो गया है जबकि शेष शरीर का रंग गोरा है। धूम्रपान नही करता हूं फिर भी होंठों का रंग काला है। मेरे चेहरे पर पड़े गड्ढों को पूरी तरह साफ करने (भरने)और चेहरे के प्राकृतिक रंग को वापस लाने के लिए आयुर्वेदिक दवाइयां बताइए। उन दवाइयों का नाम,मात्रा,खुराक,समय अवधि अवश्य बताएं। जिससे मेरे चेहरे पर जो गड्ढे हो गए हैं वह पूरी तरह से ठीक हो जाए। चेहरे की त्वचा को टाइट करने के लिए भी दवाइयां बताएं। डायट प्लान भी बताएं क्या-क्या खाऊं और क्या-क्या परहेज करना है। कितने समय तक दवाइयां खानी है, दवाइयों का कोर्स कितने महीने चलेगा।
How long have you had the acne scars and dark lips?:
- More than 3 yearsHow would you describe the severity of your skin issues?:
- Severe — affects self-esteemHave you tried any treatments for your skin issues before?:
- No, this is the first time seeking helpWhat is your daily diet like?:
- High in processed foodsDo you have any other skin concerns or symptoms?:
- Itching or irritationHow often do you engage in physical activity?:
- RarelyHow is your stress level currently?:
- Moderate — occasional stressDoctors' responses
●नमस्ते🙏। आयुर्वेद के दृष्टिकोण से आपकी समस्या (चेहरे के गड्ढे, त्वचा का कालापन और होंठों का रंग) शरीर में बढ़े हुए ‘पित्त’ और ‘रक्त’ (Blood) की अशुद्धि का संकेत है। 35 वर्ष की आयु में चयापचय (metabolism) में बदलाव के कारण, हमें आंतरिक शुद्धि और बाह्य उपचार दोनों पर ध्यान देना होगा। ●आंतरिक आयुर्वेदिक उपचार (Internal Medicine) त्वचा की गहराई से सफाई और रंगत सुधारने के लिए निम्नलिखित औषधियां सहायक हैं: ▪︎रक्तशोधक: ‘मंजिष्ठादि क्वाथ’ या ‘खदिरारिष्ट’। इसे 15-20 मिलीलीटर की मात्रा में बराबर पानी मिलाकर भोजन के बाद दिन में दो बार लें। यह रक्त को शुद्ध कर चेहरे के कालेपन को दूर करेगा। ▪︎पित्त शामक: ‘प्रवाल पिष्टी’ (125 मिलीग्राम) और ‘मुक्ता शुक्ति भस्म’ (250 मिलीग्राम) का मिश्रण शहद के साथ सुबह-शाम लें। यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करेगा। ▪︎त्वचा का पोषण: ‘कांचनार गुग्गुल’ (2 गोली, दिन में दो बार) का उपयोग करें। यह पुराने दाग-धब्बों और ऊतकों (tissues) के पुनर्निर्माण में मदद करता है। ▪︎होंठों का कालापन: रात को सोने से पहले शुद्ध गाय के घी से होंठों पर मालिश करें। यह पित्त की उष्णता के कारण हुए होंठों के कालेपन को ठीक करने में अत्यंत प्रभावी है। ▪︎अवधि: इन दवाइयों को आपको कम से कम 3 से 6 महीने तक निरंतर लेना होगा, क्योंकि चेहरे के पुराने गड्ढे और त्वचा के रंग में बदलाव के लिए कोशिका नवीनीकरण (cell regeneration) में समय लगता है। ●बाह्य उपचार (External Face Mask) ● A simple traditional face mask: • Multani mitti - 2 teaspoons • Neem powder - 1/2 teaspoon • Manjistha powder - 1/2 teaspoon • Mulethi powder - 1/2 teaspoon • Sandalwood powder - 1/4 teaspoon • Turmeric - 1 pinch • Borax Bhasma - 1/8 teaspoon • Rose water or aloe vera gel - as needed. ●Method: Mix all the ingredients to make a thin paste. Apply it only to the affected area or in a thin layer all over the face. After 10-12 minutes, wash it off with lukewarm water. This can be used 2-3 times a week. ● Why this paste is considered useful: Neem helps cleanse the skin and reduce the tendency to break out. Manjishtha is effective for redness and old scars. Mulethi is used to soothe the skin, while Sandalwood reduces excess heat and irritation. Borax Bhasma helps manage excess oil and inflamed pimples, and Multani Mitti effectively clears excess oil and clogged pores. If pimples are very red, painful, or reoccur, a second remedy is also used: at night, take 1/4 teaspoon of Triphala powder with fennel water in 1 glass of lukewarm water, which cools the body heat. This can be taken in the morning on an empty stomach or at night, 1 hour after meals. Triphala and Neem are considered in Ayurveda to reduce excess body heat, digestive disorders, and skin effects. When the stomach, sleep, and daily routine improve, the face often begins to gradually calm down. ●जीवनशैली और आहार (Lifestyle and Diet) ▪︎परहेज: अधिक मिर्च-मसाले, तली-भुनी चीजें, अत्यधिक खट्टा (अचार), और बहुत अधिक मीठा खाने से बचें। ये पित्त बढ़ाते हैं। ▪︎आहार:अपने भोजन में घी (सीमित मात्रा में), लौकी, तोरई, हरा धनिया, और नारियल पानी शामिल करें। यह पित्त को शांत रखेगा। ▪︎दिनचर्या: पर्याप्त पानी पिएं। चेहरे को बार-बार न छुएं, पिंपल्स को न दबाएं और रात को देर तक जागने से बचें। पर्याप्त नींद लेने से चेहरे की चमक वापस आती है। ▪︎त्वचा को टाइट करने के लिए: योग में ‘शीतली प्राणायाम’ और ‘भ्रामरी प्राणायाम’ का अभ्यास करें, जो मानसिक तनाव को कम कर त्वचा के लचीलेपन को बढ़ाते हैं। चेहरे पर बादाम के तेल से हल्के हाथों से ऊपर की ओर मालिश (Face Yoga) करने से त्वचा टाइट होती है। महत्वपूर्ण नोट: यद्यपि ये आयुर्वेदिक उपाय बहुत प्रभावी हैं, लेकिन चेहरे के गहरे गड्ढों के लिए कई बार ‘आयुर्वेदिक पंचकर्म’ (जैसे वमन या विरेचन) की आवश्यकता हो सकती है, जो शरीर के पित्त को जड़ से बाहर निकालते हैं। कृपया किसी अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक के मार्गदर्शन में ही उपचार शुरू करें। क्या आप पहले कभी किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से इस विषय पर परामर्श ले चुके हैं?
•प्रणाम। आपकी त्वचा की स्थिति, पित्त प्रकृति और पूरी समस्या को आयुर्वेद के दृष्टिकोण से समझकर मैं आपको एक संपूर्ण चिकित्सा योजना (Treatment Plan) बता रहा हूँ। ••रक्त की शुद्धि और पित्त को शांत करने के लिए निम्नलिखित दवाइयों का कोर्स 3 से 6 महीने तक लगातार चलाना होगा: ••कैशोर गुग्गुल (Kaishore Guggulu) 2 गोली सुबह और रात (खाना खाने के 30 मिनट बाद) गुनगुने पानी के साथ यह त्वचा के गड्ढों (Scars) को भरने और हीलिंग में मदद करता है। ••महामंजिष्ठादि काढ़ा (Mahamanjishtadi Kwath) 15-20 ml (बराबर मात्रा में पानी मिलाकर) सुबह और रात (खाना खाने के बाद) दवा के बराबर गुनगुना पानी मिलाएं यह रक्त शोधक (Blood Purifier) है, जो चेहरे और होंठों का कालापन दूर करेगा। ••आरोग्यवर्धिनी वटी (Arogyavardhini Vati) 1 गोली दोपहर और रात (खाना खाने के बाद) सामान्य पानी से यह लीवर को डिटॉक्स कर त्वचा के एक्स्ट्रा ऑयल (Sebum) को नियंत्रित करती है। ••गिलोय सत्त्व + प्रवाल पिष्टी 250 mg गिलोय सत्त्व + 250 mg प्रवाल पिष्टी सुबह खाली पेट और शाम को (भोजन से 1 घंटा पहले) 1 चम्मच शहद या मलाई के साथ यह आपके शरीर की अतिरिक्त गर्मी (पित्त) को शांत करेगा। ••बाह्य लेप और त्वचा में कसाव (External Application & Tightening) त्वचा के गड्ढों को भरने और ढीली त्वचा को टाइट करने के लिए केवल दवाइयां काफी नहीं हैं, इसके लिए त्वचा पर नई कोशिकाओं (Cells) का बनना जरूरी है। क) चेहरे के गड्ढों और कसाव के लिए (Face Pack) सामग्री: लोध्र (Lodhra) पाउडर 1 चम्मच, मंजिष्ठा (Manjistha) पाउडर आधा चम्मच, और मुलतानी मिट्टी आधा चम्मच। विधि: इसे गुलाब जल या कच्चे दूध के साथ मिलाकर पेस्ट बनाएं। प्रयोग: हफ्ते में 3 बार चेहरे पर लगाएं। जब यह 80% सूख जाए, तो हल्के हाथों से ऊपर की तरफ (Upward direction) मसाज करते हुए सादे पानी से धो लें। यह त्वचा को टाइट करेगा और कोलाजन (Collagen) बढ़ाकर गड्ढों को भरेगा। ख) चेहरे की रंगत के लिए (Night Serum) रोज़ रात को चेहरा धोने के बाद कुंकुमादि तैलम (Kumkumadi Tailam) की केवल 2 से 3 बूंदें चेहरे पर लगाएं। उंगलियों से चेहरे की सर्कुलर मोशन में तब तक मालिश करें जब तक तेल त्वचा में समा न जाए। (यदि त्वचा बहुत ज्यादा ऑयली लगे, तो इसे केवल 30 मिनट लगाकर गुलाब जल से पोंछ लें, रातभर न छोड़ें)। ग) होंठों के कालेपन के लिए ••रात को सोते समय होंठों पर यष्टिमधु घृत (Yastimadhu Ghrita) या शुद्ध गाय का घी लगाकर हल्की मालिश करें। यह पित्त के कारण हुए कालेपन को पूरी तरह ठीक कर देगा। 3. पथ्य-अपथ्य (डाइट प्लान और परहेज) पित्त प्रकृति वालों के लिए खान-पान ही सबसे बड़ी दवा है। क्या खाएं (Do’s): सब्जियां: लौकी, तोरई, परवल, कद्दू, खीरा और हरी पत्तेदार सब्जियां। फल: अनार, पका हुआ आम, मीठा अंगूर, नारियल पानी और आंवला (आंवला त्वचा के लिए सर्वोत्तम है)। अन्य: रात को भीगे हुए बादाम और मुनक्का सुबह खाएं। पानी पर्याप्त मात्रा में पीएं (दिन में 3-4 लीटर)। ••क्या बिल्कुल न खाएं (Don’ts - कड़ा परहेज): मिर्च-मसाले: लाल मिर्च, गरम मसाला, चाट मसाला, अचार और अत्यधिक नमक। •तल-भुना: समोसे, कचोरी, फास्ट फूड और ज्यादा तेल वाला खाना। ••विरुद्ध आहार: दूध के साथ नमक वाली चीजें, या दूध के साथ खट्टे फल (जैसे शेक या स्मूदी) बिल्कुल न लें। ••चाय/कॉफी: दिन में 1 कप से ज्यादा चाय या कॉफी न लें, क्योंकि यह पित्त और कालेपन को बढ़ाती है। 4. समय अवधि (Course Duration) ••शुरुआती असर: आपको त्वचा की चमक और रंगत में 4 से 6 हफ्ते (1.5 महीना) में अंतर दिखने लगेगा। गड्ढों का भरना: चेहरे के पुराने गड्ढों को पूरी तरह ठीक होने और त्वचा के टाइट होने में 6 से 9 महीने का समय लग सकता है, क्योंकि त्वचा की गहरी परतों (Dermis) को ठीक होने में समय लगता है। ••आपको यह कोर्स कम से कम 6 महीने लगातार बिना रुके करना चाहिए।
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