How to treat low libido and premature ejaculation effectively? - #56495
Sir ji mere ling tanav ki kami hai or shigrapatan bi jaldi ho jata plz help me tobsir iska koi upay bataye mai ye bimari jad se khatam krna chahta hu
How long have you been experiencing these issues?:
- Less than 1 monthHow would you describe the severity of your low libido?:
- Mild — occasional lack of interestHave you noticed any specific triggers for premature ejaculation?:
- No clear triggersHow often do you engage in sexual activity?:
- A few times a weekWhat is your overall stress level in daily life?:
- Low — very manageableHow is your overall health and energy level?:
- Excellent — very activeHave you tried any treatments or remedies for these issues before?:
- No, this is the first time seeking helpDoctors' responses
नमस्ते🙏, एक चिकित्सक के रूप में मैं समझता हूँ कि आप जिस समस्या का सामना कर रहे हैं, वह आपके आत्म-विश्वास और मानसिक शांति को प्रभावित कर सकती है। आयुर्वेद में इन विकारों को ‘शुक्र-क्षय’ और ‘ध्वज-भंग’ की श्रेणी में देखा जाता है, जिनका पूर्ण उपचार आहार-विहार में सुधार और सही औषधीय प्रयोग से संभव है। यहाँ आपकी स्थिति के लिए एक प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार योजना दी गई है: ●आयुर्वेदिक शक्तिवर्धक चूर्ण योग यह मिश्रण शुक्र धातु की वृद्धि और इरेक्शन (लिंग तनाव) की क्षमता में सुधार के लिए अत्यंत प्रभावी है। ▪︎मुख्य घटक: अश्वगंधा (वीर्यवर्धक, टेस्टोस्टेरोन और पेशीय शक्ति बढ़ाता है), कौंच बीज (उत्कृष्ट वाजीकरण, डोपामाइन स्तर बढ़ाकर शुक्राणु उत्पादन में सहायक), गोक्षुर (मूत्र संबंधी विकार दूर करता है और स्तंभन शक्ति बढ़ाता है), सफेद मूसली (शुक्र की गुणवत्ता और शारीरिक क्षमता बढ़ाती है), और विदारीकंद (प्रजनन अंगों को पोषण देता है)। ▪︎विधि: सभी जड़ी-बूटियका बारीक चूर्ण (60-80 मेश) बनाकर किसी एयरटाइट कांच या टिन के डिब्बे में रखें। ▪︎सेवन विधि: १ चम्मच (लगभग ३-५ ग्राम) चूर्ण को रात को सोने से पहले मिश्री मिले गुनगुने दूध के साथ लें। इसे कम से कम ३ महीने तक निरंतर उपयोग करें। ▪︎बाह्य उपचार:लिंग के आसपास के क्षेत्र में बाला अश्वगंधादि तेल से दिन में दो बार हल्की मालिश करें, जो रक्त संचार और नसों की शक्ति में सुधार करता है। ▪︎महत्वपूर्ण निर्देश:आयुर्वेद में केवल औषधि ही पर्याप्त नहीं है। इस दौरान अधिक मानसिक तनाव से बचें, नियमित योग (विशेषकर अश्विनी मुद्रा और प्राणायाम) करें, और विरुद्धाहार (जंक फूड, अत्यधिक मसालेदार भोजन) से परहेज करें। यदि लक्षण गंभीर बने रहते हैं, तो व्यक्तिगत परामर्श लेना उचित होगा। क्या आप अपनी जीवनशैली या खान-पान के बारे में कुछ और विस्तार से साझा करना चाहेंगे जिससे मैं आपको और बेहतर सलाह दे सकूँ?
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