जब मंदाग्नि (कमजोर पाचन) के कारण भोजन पूरी तरह नहीं पचता, तो वह शरीर में ‘आम’ (Ama Toxins) बनाता है। यह ‘आम’ आंतों की दीवारों पर चिपक जाता है, जिससे मल बार-बार आता है लेकिन अधूरा महसूस होता है। गैस और भारीपन इसी रुकावट के संकेत हैं। 👇👇👇👇👇👇 1) Gandharvahasthadi Castor Oil - 5-10 ml गुनगुना पानी के साथ सुबह (खाली पेट) 2) Dhanwantharam Gulika - 1 टेबलेट गुनगुना पानी के साथ नाश्ते के बाद 3) ) Ashtachoornam 3-ग्राम छाछ या पानी के साथ दोपहर (खाने से पहले 4) Abhayarishtam - 20 ml + 20 ml पानी के साथ दोपहर (खाने के बाद और रात में खाने के बाद 5) hinguvachadi churnam-3 ग्राम रात में खाने से पहले गुनगुने पानी के साथ क्या न खाएं भारी भोजनः उड़द की दाल, राजमा, छोले और पनीर से परहेज करें। ठंडा पानी: फ्रिज का ठंडा पानी पाचन को और धीमा कर देता है, हमेशा गुनगुना पानी पिएं। कच्चा सलादः कच्ची सब्जियां पचाने में भारी होती हैं, उन्हें पकाकर ही खाएं। मैदा और जंक फूडः बिस्किट, ब्रेड और बाहर का तला-भुना खाना पूरी तरह बंद कर दें।
यह समस्या आमतौर पर पाचन कमजोरी और आंतों में गैस/इर्रिटेशन के कारण होती है, जिससे बार-बार जाने का मन होता है लेकिन ठीक से साफ नहीं होता। खाना हल्का और समय पर लें। बहुत ज्यादा तला, मसालेदार और पैक्ड फूड अवॉइड करें। देर रात खाना और लंबे समय तक बैठे रहना कम करें। सुबह गुनगुना पानी पीना फायदेमंद रहेगा। घर पर खाने के बाद थोड़ा अजवाइन + काला नमक ले सकते हैं। दिन में एक बार जीरा-धनिया उबला पानी भी लें। पेट पर हल्की गर्म सिकाई करने से भी आराम मिलेगा। Kutajghan vati – 1 tablet दिन में 2 बार after food Hingwashtak churna (tablet form) – 1 tablet दिन में 2 बार after food Bilwadi gutika – 1 tablet दिन में 2 बार यह दवाइयाँ आंतों को शांत करके गैस और बार-बार जाने की समस्या को कम करने में मदद करेंगी। अगर लंबे समय तक ठीक न हो तो आगे जांच की जरूरत हो सकती है। Regards, Dr Raghuveer (Ayurvedacharya)
चिंता न करें। मसालेदार, तला हुआ एवं पैक बंद खाना न खाएं। नियमित व्यायाम एवं ध्यान करें। हरी सागसब्जी एवं ताज़ा फल रोजाना खाएं। उचित मात्रा में जल ग्रहण करें। छाछ का नियमित सेवन करें। Tab.stop-ibs 1-0-1 Sy.Gason 15ml twice a day Follow up after 2 weeks.
यह स्थिति आमतौर पर कफ + वात विकृति अग्नि मंद होना आंतों में आम (toxins) जमा होना से होती है 👉 इसे आधुनिक भाषा में Irritable Bowel Syndrome (IBS - incomplete evacuation type) से भी relate किया जा सकता है Treatment: 1. Hingwashtak churna + ghee (before food) deepan + vatanuloman गैस, bloating, incomplete evacuation में बहुत effective 👉 1/2 tsp + थोड़ा घी, खाना खाने से पहले 2. Mustakarishta digestion improve करता है loose tendency + IBS में helpful 👉 15–20 ml + equal water, दिन में 2 बार 3. Panchamrit Parpati + chhach (buttermilk) grahani (IBS) की best classical medicines में से एक absorption improve करता है 👉 125–250 mg, चाछ के साथ 4. Sutshekhar Ras acidity + digestion दोनों balance करता है gut irritation कम करता है 👉 1–2 tab, दिन में 2 बार 👉 केवल medicines से पूरा relief नहीं मिलेगा जब तक diet + routine ठीक नहीं करेंगे diet correction (most important) क्या avoid करें: दही (especially रात में) ठंडी चीजें heavy, oily food चाय ज्यादा मैदा, bakery क्या लें: गरम, हल्का खाना मूंग दाल, खिचड़ी जीरा, अजवाइन, सौंठ का use buttermilk (चाछ) + roasted jeera routine सुबह उठकर गुनगुना पानी रोज एक ही समय पर toilet जाने की आदत urge को ignore न करें stress कम करें (IBS में बहुत important) एक simple add-on (बहुत effective) 👉 रात को: 1 tsp isabgol + warm water यह stool bulk बनाता है और incomplete feeling कम करता है expected improvement 7–10 दिन: गैस और urge कम 2–3 हफ्ते: stool formation बेहतर 1–2 महीने: proper evacuation feeling
Take Anuloman ds 1tab 2times after food Chitrakadhi vati 1tab 2times after food