How to treat swelling, pain, and cramps in both wrists and ankles? - #56821
Dr meri dono rist and ankle me swelling pain and cramps hotta hai aur hat ke dono angotho ki nasoe me damage ho gaya hai please uchit salah de
Doctors' responses
Dono wrists aur ankles mein swelling, pain aur cramps ke saath anguthon ki nasoṅ mein damage ki shikayat ho to pehle karan jaanchna zaroori hai. Yeh arthritis, uric acid, diabetes, vitamin B12 deficiency, thyroid disorder ya nerve compression se sambandhit ho sakta hai. Ayurvedic sahayata: Yogaraj Guggulu 2 tablets, din mein 2 baar, bhojan ke baad garam pani ke saath. Dashmool Kwath 20 ml + 20 ml garam pani milakar, din mein 2 baar bhojan se pehle. Maharasnadi Kwath 20 ml, din mein 2 baar (agar joint pain aur stiffness adhik ho). Mahanarayana Taila se halka massage karke garam sek karein, din mein 1–2 baar. Aahar: Thandi, oily aur packaged foods kam karein. Garam pani piyen. Haldi aur sonth ka upyog badhayein.
••दोनों कलाइयों (wrists) और टखनों (ankles) में सूजन, दर्द और ऐंठन (cramps) के साथ-साथ दोनों हाथों के अंगूठों की नसों में क्षति (nerve damage/compression) के लक्षण वात व्याधि (विशेषकर वात-रक्त या साम वात/आमवात) और धातु क्षयजन्य नाड़ी दुर्बलता की ओर संकेत करते हैं। अंगूठों की नसों में समस्या कार्पल टनल सिंड्रोम (Median nerve compression) या सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी से भी जुड़ी हो सकती है। ••आभ्यंतर चिकित्सा (Oral Medications) संधियों की सूजन (inflammation), शूल और नाड़ी की कमजोरी को दूर करने के लिए निम्नलिखित योग अत्यंत प्रभावी हैं: नाड़ी सुदृढ़ीकरण एवं वात शामक: ••एकांगवीर रस (125 mg) + महावातविध्वंसन रस (125 mg) + वसंत कुसुमाकर रस (100 mg - यदि धातु क्षय अधिक हो) — इन्हें मिलाकर सुबह-शाम शहद या गुनगुने पानी के साथ लें। यह नसों की क्षति (nerve damage) को रिकवर करने में मदद करेगा। ••क्षीरबला तेल (101 आवर्ती): 5 से 10 बूंदें रात को गुनगुने दूध के साथ लें। यह मज्जा धातु और तंत्रिका तंत्र (nervous system) को पोषण देता है। ••सूजन और शूल नाशक (For Joint Pain & Swelling): यदि सामता (Amadosha) के लक्षण हैं (जैसे सुबह जकड़न, भारीपन): अमृतोत्तर कषायम् या रास्नासतक कषायम् 15-20 ml समभाग गुनगुने पानी के साथ भोजन से पहले। •: कैशोर गुग्गुलु या त्रयोदशांग गुग्गुलु (2-2 गोली) भोजन के बाद गुनगुने पानी से। क्रैम्प्स (Cramps) और खल्ली व्याधि के लिए: ••महाकल्याणक घृत या सप्तअमृत लौह (यदि रक्त की अल्पता या नसों में खिंचाव ज्यादा हो)। मांसपेशियों की ऐंठन के लिए सूतशेखर रस या प्रवाल पिष्टी का योग भी पित्त-वात शामक के रूप में बेहतर काम करता है। २. बाह्य चिकित्सा (External Applications) ••नसों की क्षति और संधियों की सूजन में तीव्र आराम के लिए: लेप चिकित्सा: सूजन और दर्द वाले स्थानों पर दशमूलादि लेप या जटामांस्यादि लेप को गुनगुने पानी या कांजी में मिलाकर लगाएं। अभ्यंग एवं स्वेद: ••कलाइयों और टखनों पर विषगर्भ तेल या प्रसारिणी तेल (यदि जकड़न ज्यादा हो) अथवा क्षीरबला तेल (यदि नसों में सुन्नपन/कमजोरी ज्यादा हो) से हल्के हाथों से अनुलोम गति में अभ्यंग करें। इसके बाद दशमूल क्वाथ से नाड़ी स्वेद (Mild Steam) दें। ••ध्यान रहे: यदि सूजन में स्थानीय तापमान (Local temperature) बढ़ा हुआ हो या तीव्र लालिमा हो (Rakta-adhikyata), तो उष्ण स्वेद के बजाय पिंड तेल से केवल सौम्य अभ्यंग करें। ३. पंचकर्म परामर्श (Clinical Procedures) चूंकि लक्षण द्वंद्व शाखाओं (both upper and lower limbs) में हैं, इसलिए दोषों को जड़ से निकालने के लिए व्यवस्थित पंचकर्म की आवश्यकता है: ••ग्रीवा और कटि बस्ती: अंगूठे की नसों के लिए ग्रीवा बस्ती (Greeva Basti) (क्षीरबला या महानारायण तेल से) अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसका मूल उद्गम सर्वाइकल स्पाइन (C5-T1) से हो सकता है। ••मृदु विरेचन / बस्ति: वात के अनुलोमन के लिए गंधर्वहस्त्यादि एरंड तेल से मृदु विरेचन या यापन बस्ति / तिक्त क्षीर बस्ति का क्रम अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। ४. पथ्य-अपथ्य (Diet & Lifestyle) ••पथ्य: पुराना शाली चावल, कुल्थी, सहजन (शिग्रु), लहसुन, अदरक, परवल, गुनगुना पानी और गाय का घी। ••अपथ्य: दही, उड़द की दाल, अत्यधिक शीतल पेय, जंक फूड, रात में जागना (रात्रि जागरण) और वात वर्धक आहार (चना, मटर, आलू)।
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